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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

  • मेरा शुरू से मानना रहा है कि संडे से बड़ी ख़बर कुछ नहीं होती. संडे घर पर रहने के लिए होता है. संडे को कुछ भी हो एंकरिंग करने नहीं जाना चाहिए. मैं ख़ुद को इतना महत्वपूर्ण नहीं समझना चाहता कि बिग ब्रेकिंग न्यूज़ में कुर्सी छेंक कर बैठ जाएं. दस साल की एंकरिंग में मैंने ख़ुद से किया यह वादा निभा दिया.
  • एग्ज़िट पोल पर अब ऐसी कोई बात नहीं है जो कही जा सकती है. टीवी में मुश्किल यही है कि जब सारी बात कह जा चुकी हो तो फिर से उसे कैसे कहें. दरअसल यही टीवी है. एग्जिट पोल के बाद सारे चैनलों को 22 तारीख की आधी रात तक वैसे ही ग़ायब हो जाना चाहिए जैसे एग्ज़िट पोल शुरू होते ही नमो टीवी अपने आप ग़ायब हो गया है.
  • शुक्रिया एग्ज़िट पोल का. एग्ज़िट पोल के नतीजे बता रहे हैं कि मोदी लहर धुंआधार है. हर सर्वे में बीजेपी प्लस की सरकार आराम से बन रही है. यह पूरी तरह आप पर है कि आप एग्ज़िट पोल पर भरोसा करते हैं या नहीं करते हैं. दोनों ही स्थितियों में एग्ज़िट पोल वालों पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. यह ज़रूर है कि 23 तारीख तक आप टीवी पर कुछ नहीं देख पाएंगे
  • सब कुछ ड्रामा जैसा लगता है. सारा ड्रामा इस यक़ीन पर आधारित है कि जनता मूर्ख है. उसे किसी बादशाह पर बनी फिल्म दिखाओ या ऐसा कुछ करो कि जनता को लगे कि वह किसी बादशाह को देख रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ गए हैं. पूरी यात्रा को एक सेट में बदल दिया गया है ताकि न्यूज़ चैनलों पर लगातार कवरेज़ हो सके.
  • उनकी असहमतियों को दर्ज नहीं किया जा रहा है. संपूर्ण बैठक में तीनों आयुक्त शामिल होते हैं. हर बात दर्ज की जाती है. मगर यह ख़बर हर भारतीय को परेशान करनी चाहिए कि आयोग के भीतर कहीं कोई खेल तो नहीं चल रहा है.
  • वैसे व्हाट्सएप ग्रुप में एग्ज़िट पोल तो कब से चल रहा है. खासकर पत्रकारों के, जो अपने हिसाब से किसी राज्य में चार सीट कम कर देते हैं तो चालीस सीट बढ़ा देते हैं. कई लोग किनारे ले जाकर पूछते हैं कि अकेले में बता दो किसकी सरकार बनेगी, सही बात है कि हमें नहीं मालूम है. इस चुनाव की एक ख़ास बात यह रही कि इंटरव्यू की ख़ासियत समाप्त हो गई. जो नेता अपने इंटरव्यू में जवाब नहीं दे रहे थे, वो दूसरे नेता के इंटरव्यू का मज़ाक उड़ा रहे थे
  • इस बात को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. सोचा जाना चाहिए और पूछा जाना चाहिए कि वो कौन सी शक्तियां हैं, वो कौन से लोग हैं और वो लोग किस राजनीतिक खेमे के साथ नज़र आते हैं जो बार-बार गांधी के हत्यारे को अवतार बताने चले आते हैं. पहली बार नहीं हुआ है जब गोडसे को देशभक्त बताया गया है. भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर ने कहा है कि नाथूराम गोडसे देशभक्त है. आतंकवादी नहीं है.
  • अब मैं जो उन्हें कहना चाहता हूं, उन्हें ध्यान से सुनना चाहिए. उन्हें देखना चाहिए कि इस मुद्दे को लेकर नैतिक बल और आत्म बल है या नहीं. गांधी को पढ़ना चाहिए. अगर उन्हें लगता है कि उनका मुद्दा सही है. नैतिकता के पैमाने पर सही है तो उन्हें सत्याग्रह का रास्ता चुनना चाहिए. बार-बार बताने की ज़रूरत नहीं है कि वे साढ़े तीन लाख से अधिक हैं. अगर हैं तो इनमें से एक-एक को गांधी मैदान में जमा हो जाना चाहिए और सत्याग्रह करना चाहिए. सत्याग्रह क्या है, इसके बारे में अध्ययन करना चाहिए. पांच हज़ार की रैली को नेता दिन भर ट्विट करते रहते हैं कि जन-सैलाब उमड़ गया है. सोचिए, अगर आपने लाखों की संख्या में जमा होकर सत्याग्रह कर दिया तो क्या होगा. यह फ़ैसला तभी करें जब सभी साढ़े तीन लाख शिक्षक सत्याग्रह के लिए तैयार हों. सत्याग्रह के लिए तभी तैयार हों जब उन्हें लगे कि उनके साथ अन्याय हुआ है. यह ध्यान में रखें कि उनकी बात को सुप्रीम कोर्ट ने सुना है. कमेटी बनवाई है. राज्य सरकार की कमेटी को भी शिक्षकों के साथ बात करनी पड़ी है. तो उनके पक्ष के बारे में भी सोचें और फिर भी लगता है कि यह ग़लत हुआ है तो मुझे मेसेज न करें. किसी मीडिया को मेसेज न करें. बल्कि मैंने तो कहा है कि आप टीवी देखना बंद कीजिए. अख़बार पढ़ना बंद कीजिए. आपने अपने केस में देख लिया कि जब आप परेशान हुए तो इनके छापने और नहीं छापने से आपकी समस्या पर कोई फर्क नहीं पड़ा. इसलिए फर्क नहीं पड़ता है कि क्योंकि आपमें नैतिक बल और आत्मबल नहीं है.
  • भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार चुनाव आयोग ने आर्टिकल 324 के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार 20 घंटे पहले ही ख़त्म करने का फ़ैसला किया है... यानी गुरुवार रात दस बजे के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार नहीं होगा जबकि इसे शुक्रवार शाम पांच बजे बंद होना था. ये ध्यान दिया जाना ज़रूरी है कि कल बंगाल में प्रधानमंत्री मोदी की दो रैलियां हैं. माथुरपुर लोकसभा क्षेत्र में शाम पौने पांच बजे और दमदम में शाम साढ़े छह बजे प्रधानमंत्री रैली करेंगे.
  • दुनिया में डिजिटल कैमरा कब आया, दुनिया में आने के बाद भारत कब आया, दुनिया में ईमेल कब लॉन्‍च हुआ और भारत में ईमेल कब लॉन्‍च हुआ. प्रधानमंत्री ने जब से एक इंटरव्यू में जवाब दिया है 2019 के चुनाव का आखिरी चरण क्विज़ शो में बदल गया है. जितने भी लोग इस सवाल को लेकर टेंशन में थे कि कौन जीतेगा, बीजेपी को कितनी सीटें आएंगी, यूपी में महागठबंधन का क्या होगा, वे सारे लोग डिजिटल कैमरा कब आया, यह पता लगाने में व्यस्त हैं.
  • प्रधानमंत्री ने यह बात इंडियन एक्सप्रेस के रवीश तिवारी और राजमकल झा से कही है. यह इंटरव्यू 12 मई को छपा है. इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री इंडियन एक्सप्रेस को कई बार पत्रकारिता को लेकर लेक्चर देते हैं. एक्सप्रेस के पत्रकार काउंटर सवाल नहीं करते हैं. ऐसा लगता है कि उन्होंने सुनाने के लिए एक्सप्रेस को बुलाया है. वे यह नहीं बताते हैं कि एक्सप्रेस की कौन सी ख़बर ग़लत थी मगर यह बताना नहीं भूलते हैं कि कौन सी ख़बर उसने नहीं की. किसी प्रधानमंत्री का यह कहना है कि न्यूज़ का छपना ही लोकतंत्र में एक मात्र काम नहीं है, डरावना है. आपको डरना चाहिए कि फिर जनता कितने अंधेरे में होगी.
  • जीडीपी का आंकड़ा बढ़ा-चढ़ा कर बताने के लिए फ़र्ज़ी कंपनियों का इस्तमाल किया गया है. नेशनल सैंपल सर्वे (NSSO) ने एक साल लगाकर एक सर्वे किया मगर उसकी रिपोर्ट दबा दी गई. पहली बार सर्विस सेक्टर की कंपनियों का सर्वे हो रहा था. इसके लिए NSSO ने कारपोरेट मंत्रालय से सर्विस सेक्टर की कंपनियों का डेटा लिया. जब उन कंपनियों का पता लगाने गए तो मालूम ही नहीं चल पाया.
  • मतदाता के पास अपनी एक्स-रे मशीन है. पत्रकार के पास एमआरआई मशीन है. दोनों एक दूसरे का टेस्ट कर रहे हैं. चैनल का नाम सुनकर लोगों ने गला खखार लिया है. अपना पैंतरा बदल लिया है. मतदाता कोई सिग्नल ही नहीं देता है. मतदाता डरा हुआ है. पत्रकार सहमा हुआ है. बातचीत शुरू होती है. मतदाता डरा हुआ है. पत्रकार सहमा हुआ है. पता नहीं कौन क्या निकल जाएगा.
  • चुनाव आयोग के सामने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ आचार संहिता के उल्लंघन के पांच मामले आए. यह भी शर्मनाक मामला है कि भारत के प्रधानमंत्री आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं. आयोग ने चेतावनी दी थी कि सेना के नाम पर वोट नहीं मांगा जाएगा. धार्मिक पहचान और उन्माद के नाम पर वोट नहीं मांगा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के दबाव में शुरू में तीन चार नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई तो हुई लेकिन जब अमित शाह और नरेंद्र मोदी का नाम आया तो आयोग के हाथ कांपते से लगते हैं.
  • इस बीच आपरेशन बालाकोट होता है. पाकिस्तान भी जवाबी कार्रवाई करता है. विंग कमांडर अभिनंदन को वापस कर दिया जाता है. दोनों देशों के बीच तनाव कम हो जाता है. तनाव कम करने की पाकिस्तान की पहली शर्त पूरी हो जाती है. अब बाकी शर्तों पर बात होनी थी.
  • बिना वेतन के 28 महीने से कोई कैसे जी सकता है. भारत सरकार की संस्था अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा बर्ताव करे और किसी को फर्क न पड़े. सिस्टम ने एक कर्मचारी को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया. 29 अप्रैल को यह लिखकर आत्महत्या कर ली कि भारत सरकार ज़िम्मदार है.
  • एक समय राजीव गांधी भी अमिताभ बच्चन के साथ अपनी दोस्ती को राजनीति में खूब जमाते थे. वही अमिताभ बच्चन राजनीति में न जाने कितनों के दोस्त हुए. अब प्रधानमंत्री मोदी एक से अधिक कालकारों के साथ नज़र आते हैं.
  • बिहार में ऐसा कुछ हुआ है क्या कि 5 दिन के भीतर प्रधानमंत्री मोदी की सभा के अंत में लगने वाले नारे से वंदे मातरम का नारा ही ग़ायब हो गया. क्या ऐसा नीतीश कुमार की असहजता को देखकर किया गया, अगर नहीं तो इसका प्रमाण 4 मई को बगहा की रैली में मिल जाएगा जब प्रधानमंत्री और नीतीश कुमार दोनों साझा रैली करेंगे.
  • मसूद अज़हर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा चिन्हित, प्रतिबंधित और सूचित ग्लोबल आतंकवादी हो गया है. भारत ने लंबे समय तक कूटनीतिक धीरज का पालन करते हुए उसी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अज़हर को ग्लोबल आतंकी की सूची में डलवाया है जहां से उसे 2009, 2016, 2017 और मार्च 2019 में पहले सफलता नहीं मिली. पांचवी बार में मिली यह सफलता कूटनीतिक धीरज का मिसाल बनेगी.
  • 996 के बारे में आपने नहीं सुना होगा. इसका मतलब है लगातार 6 दिन 9 बजे सुबह से लेकर 9 बजे रात तक काम करना. 14 अप्रैल को चीन की सबसे बड़ी ई-कामर्स कंपनी के प्रमुख जैक मा ने एक ब्लॉग लिखा. उसने चीन में 996 संस्कृति की तारीफ की. चीन के आईटी सेक्टर में 996 की संस्कृति लंबे सयम से रही है मगर जैक मा के ब्लॉग के बाद से इसका विरोध तेज़ हो गया है.
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