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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक- The Free Voice, इश्क़ में शहर होना। हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान।

  • बिज़नेस स्टैंडर्ड के सोमेश झा ने इस रिपोर्ट की बातें सामने ला दी है. एक रिपोर्टर का यही काम होता है. जो सरकार छिपाए उसे बाहर ला दे. अब सोचिए अगर सरकार खुद यह रिपोर्ट जारी करे कि 2017-18 में बेरोज़गारी की दर 6.1 हो गई थी जो 45 साल में सबसे अधिक है तो उसकी नाकामियों का ढोल फट जाएगा. इतनी बेरोज़गारी तो 1972-73 में थी. शहरों में तो बेरोज़गारी की दर 7.8 प्रतिशत हो गई थी और काम न मिलने के कारण लोग घरों में बैठने लगे थे.
  • इस रिपोर्ट के आधार पर बैंक के बोर्ड ने चंदा कोचर को निकाल दिया है. चंदा कोचर को दिया जाने वाला बोनस वगैरह सब रोक लिया गया है. उन्हें अब कोई सुविधा नहीं मिलेगी. बकाया राशि भी नहीं दी जाएगी. उन्हें जो शेयर वगैरह मिले थे अब सब रोक लिए जाएंगे. जस्टिस श्रीकृष्णा ने अपनी जांच में चंदा कोचर को दोषी पाया है. बताया है कि उनके कार्यकाल में नियमों को तोड़ कर कई फैसले लिए गए और उसकी जानकारी बैंक की सालाना रिपोर्ट से छिपाई गई.
  • डॉ. निर्मल कुमार के बारे में ही जान लीजिए, आपको सत्यनाश कथा का सार मिल जाएगा. निर्मल कुमार गया इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल हैं. इन्हें औरंगाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज, जहानाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज, अरलव इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल पद का प्रभार दिया गया है. यानी यह एक शख्स चार-चार इंजीनियरिंग कॉलेज का काम देखेगा. अगर आपने अपनी बुद्धि बेच नहीं दी है तो हिसाब लगाकर देखिए कि निर्मल कुमार काम क्या करेंगे.
  • कोबरा का मानना है कि यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला है. कोबरापोस्ट की कहानी में किरदार है DHFL नाम की एक संस्था. जिसने कई शेल कंपनियों को लोन दिया, ग्रांट दिया. फिर इन कंपनियों के ज़रिए उस पैसे को भारत से बाहर ले जाया गया. उनसे संपत्ति ख़रीदी गई. कोबरापोस्ट की इस रिपोर्ट में Dewan Housing Finance Corporation Limited (DHFL) के प्रमोटर की भूमिका पकड़ी गई है. इसके हिस्सेदार (stakeholders) कपिल वाधवान, अरुणा वाधवान और धीरज वाधवान की कई शेल कंपनियां हैं जिसे DHFL से लोन दिया जाता है. इस पैसे से मारिशस, श्री लंका, दुबई, ब्रिटेन में शेयर और संपत्तियां खरीदी जाती है.
  • हमने यही जाना है कि प्रधानमंत्री का एक-एक मिनट का वक्त कीमती होता है. मगर साल शुरू होते ही बीस से अधिक कार्यदिवस के बराबर समय वे सौ रैलियां निपटाने में लगे हैं. फिर बीजेपी के कार्यकर्ताओं से वीडियो कांफ्रेंसिंग करते हैं. जो काम बीजेपी अध्यक्ष को करना चाहिए वो भी प्रधानमंत्री को करना पड़ रहा है. फिर आप ख़ुद सोचें कि क्या प्रधानमंत्री के पास इतना अतिरिक्त समय है कि वे लगातार जनसंपर्क में ही रहते हैं. क्या प्रधानमंत्री का समय इतना फालतू हो गया है कि उपदेशक की भूमिका में बच्चों को संबोधित कर रहे हैं?
  • इस वक्त बेरोज़गारी को लेकर राजनीतिक मुद्दा गरमाया हुआ है, ऐसे में बेरोज़गारी के आंकड़े जारी न करने का आरोप सरकार पर लगे, उसके लिए अच्छा नहीं है. इस इस्तीफे के बाद चार सदस्यों वाले नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन में अब दो ही सदस्य रह गए हैं. जे वी मीनाक्षी दिल्ली स्कूल आफ इकोनमिक्स में प्रोफेसर हैं और पी सी मोहनन इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विस के सदस्य रहे हैं. इस इस्तीफे के बाद चीफ स्टेटिशियन प्रवीण श्रीवास्तव और नीति आयोग के अमिताभ कांत ही बचे रह गए हैं.
  • इस तरह के बयान फिल्मों में मोहल्ले के दादा टाइप के किरदार दिया करते थे मगर अब फिल्मों में भी इस तरह के सीन कम हो गए हैं. देश में संविधान है, कानून है, पुलिस है, कोर्ट है. इसके बाद भी एक केंदीय मंत्री यह कहते हैं कि हिन्दू लड़की को छूने वाले हाथ का वजूद खत्म कर देना चाहिए. यानी वे भीड़ को या अपने समर्थकों को कह रहे हैं कि कानून की ज़रूरत नहीं है. इस बयान से एक और मतलब निकल सकता है कि कोई हिन्दू लड़की के अलावा किसी और की लड़की को छू सकता है. मेरी लड़की और उसकी लड़की के इस बंटवारे को समझना चाहिए. एक सांसद और मंत्री को यह कहना चाहिए कि हमने ऐसी व्यवस्था बना दी है कि वह किसी के साथ भेदभाव नहीं करती है मगर वो तो यह कह रहे हैं कि व्यवस्था को छोड़ो, हिन्दू लड़की को छूने वाले हाथ का वजूद खत्म कर दिया जाएगा.
  • इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के बाद सीबीआई जो सफाई देती है वो और भी गंभीर है. एजेंसी का कहना है कि सर्च से संबंधित सूचनाएं लीक गईं इसलिए उनका तबादला किया गया. कमाल है. अगर ऐसा हुआ तो उस सूचना से फायदा किसे हुआ है, किसे लीक की गईं थीं सूचनाएं. अब उस एस पी को ही आरोपी बना दिया गया है. अगर सीबीआई का एस पी गुप्त सूचनाएं लीक करे तो क्या सिर्फ तबादले की कार्रवाई होनी चाहिए? किसकी आंखों में धूल झोंकने का खेल खेला जा रहा है? किसकी आंखों में चमक पैदा करने के लिए तबादले का खेल खेला जा रहा है? सीबीआई कहती है कि उसके खिलाफ जांच हो रही है मगर यह जवाब नहीं दे सकी कि एस पी मिश्रा ने किसकी अनुमति से एफ आई आर की?
  • हम सब जानते हैं कि सीबीआई की साख दो कौड़ी की नहीं है. इसका काम है नागरिकों को फंसाना और मुकदमों को उलझना. हाल के दिनों में सीबीआई ने खुद से साबित किया है जब उसके दो निदेशकों की लड़ाई सड़क पर आ गई. दोनों एक दूसरे पर रिश्वत से लेकर केस को प्रभावित करने के आरोप लगाने लगे हैं. लेकिन जब देश के वित्त मंत्री सीबीआई की जांच पर सवाल उठा रहे हैं तो उसी के साथ प्रभावित भी कर रहे हैं.
  • एक किताब होती तो आपके लिए भी आसान होता लेकिन जब कोई लेखक रचते-रचते संसार में से संसार खड़ा कर देता है तब उस लेखक के पाठक होने का काम भी मुश्किल हो जाता है. आप एक किताब पढ़ कर उसके बारे में नहीं जान सकते हैं. जो लेखक लिखते लिखते समाज में अपने लिए जगह बनाता है, अंत में उसी के लिए समाज में जगह नहीं बचती है.
  • शिक्षा, कला, विटेंज वाइन और तेज़ रफ़्तार से भागने वाली कारों का सुख सिर्फ अमीरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. यह उस शख्स का कहना था जो एक मजदूर नेता के तौर पर राजनीतिक यात्रा शुरू करता है और दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति बनता है. सीरिल रामाफोसा भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मेहमान हैं.
  • जब भी ये लगता है कि लोगों को किसी बात से फर्क नहीं पड़ता है तभी कहीं से तस्वीर आ जाती है कि चंद लोग किसी ग़लत के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. अफसोस कि उनकी ये लड़ाई उन्हीं की बन कर रह जाती है. वैसे सबसे पहले तो उन्हीं की होनी चाहिए लेकिन सरकार और प्रशासन का बर्ताव ऐसे होता है जैसे किसी दूसरे देश के नागरिक हों.
  • भारत के किसी भी दल में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है. सिद्धांत रूप में इसे स्वीकार कर लेने में किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए. आंतरिक लोकतंत्र का मतलब चयन की प्रक्रिया से है. किसी भी दल में चुनाव नहीं होता है. इस आधार पर भारत के सभी दलों ने निराश किया है, अगर उनके समर्थकों को इन बातों से निराशा होती है तो.
  • ट्रंप कितना झूठ बोलते हैं, इसका हिसाब रखने वाला भी खलिहर होगा. वाशिंगटन पोस्ट के दफ्तर में स्टूल पर बिठा दिया होगा कि लो गिनो कि राष्ट्रपति कितना झूठ बोलते हैं. अब उसने गिन दिया है कि अब तक कार्यकाल में 8,158 झूठ और भ्रामक बयान दे चुके हैं. यह ख़बर दुनिया भर में छप गई है.
  • चुनाव आयोग ने लंदन में ईवीएम मशीन की हैकिंग का दावा करने वाले सैयद शुजा के खिलाफ दिल्ली पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई है. दिल्ली पुलिस इस पर कानूनी राय ले रही है जिसके बाद एफआईआर दर्ज की जा सकती है. आयोग का कहना है कि शुजा ने दावा किया है कि वह ईवीएम मशीन की डिज़ाइन में शामिल था और वह भारत में चुनाव को हैक कर सकता है. चुनाव आयोग ने 21 जनवरी को ही सुजा के लगाए आरोपों को रिजेक्ट कर दिया था.
  • 18 जनवरी की आधी रात से पहले राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों से नौजवान आनंद विहार स्टेशन पर जमा हो गए थे, क्योंकि 19 जनवरी को सुबह 6:30 बजे भुवनेश्वर जाने वाली नंदनकानन एक्सप्रेस छूट न जाए. यह ट्रेन चलने से पहले ही 9 घंटे लेट हो जाती है. दोपहर 3 बजे दिल्ली से रवाना होती है.
  • दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए बड़ौदा स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स के कलाकारों को बुलाया है. संदीप और अनुज ने बताया कि इससे पहले भी वे बड़ौदा में 70 से अधिक कलाकृतियां बना चुके हैं. शिल्पकार अनुज और संदीप ने बताया कि कबाड़ देखते ही उनके भीतर का कलाकार जाग जाता है कि इसका कुछ किया जाए. एक भी कबाड़ ख़रीदकर नहीं लाया गया, बल्कि ज़रूरत के हिसाब नगर निगम के गोदामों से ही खोजा गया.
  • पांच साल में सरकार के काम के विज्ञापन पर पांच हज़ार करोड़ से अधिक ख़र्च करने और लगातार रैलियां करते रहने के बाद भी प्रधानमंत्री सरकारी ख़र्चे से 100 रैलियां कर लेना चाहते हैं. आचार संहिता से पहले उन्होंने 100 रैलियां करने की ठानी है. इस लिहाज़ से 100 ज़िलों में उनकी रैली की तैयारी चल रही होगी.
  • मोदी सरकार का तर्क रहता है कि भारत और फ्रांस के बीच जो करार हुआ है उसकी गोपनीयता की शर्तों के कारण कीमत नहीं बता सकते. मगर उस करार में कहा गया है कि गोपनीयता की शर्तें रक्षा से संबंधित बातों तक ही सीमित हैं. यानी कीमत बताई जा सकती है. कीमत क्लासिफाइड सूचना नहीं है. विवाद से पहले जब डील हुई थी तब सेना और सिविल अधिकारियों ने मीडिया को ब्रीफ किया था और बकायदा कीमत बताई थी.
  • सरकार का काम है कि वह ऐसी नीति बनाए कि सरकारी बीमा कंपनियों को प्रोत्साहन मिले. मगर जनता के पैसे से चलने वाले सरकारी बैंक के अधिकारियों को निजी बीमा कंपनी की पॉलिसी बेचने के लिए मजबूर किया गया.
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