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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

  • अर्थव्यवस्था की हालत क्या है. जो ख़बरें बिजनेस अखबारों में छप रही हैं उन्हें देखकर लगता है कि चुनौतियां गंभीर होती जा रही हैं. लगातार 9 महीने से ऑटोमोबिल कंपनियों में उत्पादन ठप्प है. लघु एवं मझोले उद्योग का विकास रुक गया है. इनके लिए लोन की कमी हो गई है. जिन संस्थाओं से लोन मिलता है, उनकी हालत खराब है. एकर आरटीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2019 में दूसरी तरफ मुदा लोन का एनपीए 126 प्रतिशत बढ़ा है. बैंकों की अपनी पूंजी लड़खड़ा रही है. वो सरकार की मदद पर निर्भर है.
  • नदियों और जल के बारे में अनुपम मिश्र से कितना कुछ जाना. उनके संपर्क के कारण इस विषय से जुड़े कई बेहतरीन लोगों से मिला. चंडी प्रसाद भट्ट जी के संपर्क में आया, उनके काम को जाना. अनुपम जी के कारण ही ऐसे कई लोगों को जाना जो इस समस्या की आहट को पहले पहचान चुके थे और बचाने की पहल कर रहे थे. 'आज भी खरे हैं तालाब' का मुक़ाबला नहीं.
  • नाज़ी दौर के इतिहास को पलटिए आपको एक शब्द मिलेगा Cleansing जिसे यहूदियों की सफाई के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता था. उनकी बस्तियों की Cleansing से लेकर नस्ल की Cleansing तक का संदर्भ आपको जगह-जगह मिलेगा. आबादी के एक हिस्से को मिटा देने को Cleansing कहते हैं. जार्ज ऑरवेल की एक किताब है 1984. उसका कोई भी पन्ना आप पढ़ लें. एक Thought Police का ज़िक्र आता है, विचार पुलिस कह सकते हैं.
  • कितनी आसानी से कई नेता कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में चले गए. आना जाना लगा रहता है मगर एक दूसरे दल में जाने की बेचैनी बता रही है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता के भीतर कांग्रेस नहीं है. उसकी विचारधारा बहुत कमज़ोर पड़ चुकी है. पार्टी में बचे हुए नेता पार्टी के लिए कम बीजेपी में जाने के लिए ज़्यादा बचे हुए हैं. उनके भीतर अगर कांग्रेस होती तो वे रूकते.
  • अगले 48 घंटे में मुंबई और महाराष्ट्र में भारी से अति वृष्टि होने वाली है. मंगलवार को मुंबई, पुणे सहित महाराष्ट्र भर में दीवार गिरने से 31 लोगों की मौत हो गई. पुणे में पिछले हफ्ते दीवार गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बारिश के कारण महाराष्ट्र भर में दीवार गिरने से 46 लोगों की मौत हुई है. मुंबई में ही बारिश के कारण अलग-अलग दुर्घटनाओं में 25 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. ये सभी मज़दूर हैं इसलिए मात्र संख्या हैं. मुंबई में 30 जून और 1 जुलाई को जो बारिश हुई है वो दस साल में सबसे अधिक है. जुलाई भर में जितनी बारिश होती है उतनी बारिश मुंबई में सिर्फ दो दिनों के भीतर हो गई है. 2 जुलाई को भी खूब बारिश हुई जिसके कारण कई इलाकों में पानी भर गया. महानगर में सार्वजिनक छुट्टी की घोषणा कर दी गई है.
  • 'आर्टिकल-15' में अनुभव ने उसी उत्तर प्रदेश के सींग को सामने से पकड़ा है, जहां से देश की राजनीति अपना खाद-पानी हासिल करती है. फ़िल्म का एक किरदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शैली में बोलता है. फ़िल्म अपनी शूटिंग के लिए योगी आदित्यनाथ का शुक्रिया भी अदा करती है. फ़िल्म बॉब डेलन को समर्पित है. एक आदमी को आदमी बनने के लिए आख़िर कितने सफ़र पूरे करने होंगे. उत्तर प्रदेश के आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे से फ़िल्म शुरू होती है.
  • इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों पर बल्ला चलाने के आरोप में जेल बंद आकाश विजयवर्गीय जब बाहर आए तो कहा कि उन्हें पछतावा नहीं है लेकिन अब वे गांधी के रास्ते पर चलेंगे. वैसे गांधी के रास्ते में प्रायश्चित करना भी था. यही क्या कम है कि आज भी लोग गांधी के रास्ते पर चलना चाहते हैं. बस उस रास्ते पर अब गांधी नहीं मिलते हैं. प्रधानमंत्री मोदी पर कांग्रेस ने चौकीदार चौर है का आरोप लगाया तो उन्होंने मैं भी चौकीदार हूं का नारा दिया. इसी से प्रेरित होकर एक गायक ने विधायक आकाश विजयवर्गीय के समर्थन में म्यूज़िक वीडियो लांच किया है. मेरी गुजारिश है कि आकाश को सुपर हीरो बनाने वाले इस वीडियो को आप जब देखें तो गाना समाप्त होने तक चुप रहें और गाना जब समाप्त हो जाए तो उसके बाद भी चुप रहें.
  • मैंने मैच नहीं देखा. मुझे यक़ीन है कि मैच फ़िक्स नहीं था. भारतीय टीम कभी ऐसा नहीं करेगी. जर्सी पर जिस कंपनी का नाम होता है, वह भले कुछ भी कर सकती है. लोगों के पैसे लेकर भाग सकती है. घटिया प्रोडक्ट बेच सकती है, मगर टीम ऐसा नहीं करेगी. टीम की निस्वार्थता असंदिग्ध है.
  • अमेरिका की एक बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है WAYFAIR (वे-फेयर). इस कंपनी के कर्मचारियों को पता चला कि इसे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से दो लाख डॉलर का बिज़नेस आर्डर मिला है. ट्रंप प्रशासन उन शिविरों के लिए बिस्तर वगैरह ख़रीद रहा था, जिन्हें क़ैद कर रखा गया है. अमेरिकी मीडिया में ख़बरें आ रही हैं कि बच्चों के साथ अमानवीय बर्ताव हो रहा है. जगह की साफ-सफाई नहीं है और उन्हें बासी खाना दिया जाता है. कंपनी के कर्मचारियों को जब इस बिज़नेस करार की ख़बर लगी, तो 500 कर्मचारियों ने अपने बॉस को पत्र लिखा कि यह अनैतिक है और कंपनी इस बिज़नेस से होने वाले मुनाफे को दान करे. कर्मचारियों ने काम करने की जगह छोड़ दी और बाहर आ गए.
  • रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक इंटरव्यू आया है. यह इंटरव्यू उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को दिया है. जापान के ओसाका में होने वाली जी-20 की बैठक में जाने से पहले पुतिन का यह इंटरव्यू कई मायनों में अहम लगता है. पुतिन ने साफ-साफ कहा है कि उदारवाद का दौर समाप्त हो चुका है. अब इसमें कोई ताकत नहीं बची है. उदारवाद को बचे रहने का हक है मगर आज के समय में उसकी भूमिका क्या है. पुतिन तो यह भी कह रहे हैं कि बहुसंस्कृतिवाद के भी दिन लद गए हैं, जनता इसके खिलाफ है.
  • न्यूज़ देखना अब टिक टॉक देखने जैसा हो गया है. पूरा समाज और सिस्टम अपना केरिकेचर बन गए हैं. यानी ख़ुद का मज़ाक बन गए हैं. उन्नाव में जेल में पार्टी हो रही है तो लुधियाना की जेल में गोली चल रही है. सीआरपीएफ बुलानी पड़ती है. एक बंदा आता है जो रिवाल्वर ताने दिखता है, लेकिन उसे शायरी भी आती है. वो शायरी भी सुनाता है. व्हाट्सएप शायरी जिसके झांसे में बड़े बड़े लोग आ जाते हैं. सब कुछ का वीडियो मिल जाता है. तुरंत का नहीं मिलता है तो एक महीने बाद मिल जाता है. जैसे ही ये सब गुज़रता है योग की खूबियों पर प्रधानमंत्री का भाषण आ जाता है. जैसे लगता है कि अब सब ठीक हो जाएगा.
  • पकौड़ा तलना भी रोज़गार है. प्रधानमंत्री के इस कथन को राजनीतिक और सामाजिक तौर से बहुतों ने मज़ाक उड़ाया था. मगर 2019 के रिजल्ट ने मज़ाक उड़ाने वालों को नकार दिया. जो लोग अब भी इसका राजनीतिक और सामाजिक मज़ाक उड़ाते हैं उन्हें अपनी राय में संशोधन कर लेना चाहिए. शायद इसी जनसमर्थन से उत्साहित होकर उत्तर प्रदेश सरकार ने 23 जून को एक ट्वीट किया. इस ट्वीट में कहा गया है कि युवाओं को बड़ी संख्या में रोज़गार उपलब्ध कराने की दिशा में अग्रसर यूपी सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के ज़रिए ऋण मुहैया करवाकर नौजवानों को गन्ने के जूस के कारोबार से जोड़ने का फैसला लिया है.
  • लुधियाना का नाला बंद नहीं होता है. बुढ़ा दरिया कहलाता था. पहले नाले ने बुढ़ा दरिया को नाला किया. अब वह बुढ़ा नाला कहलाता है. एक दिन सतलुज को नाले में बदल देगा. नदियों को लेकर योजनाएँ बन रही हैं. योजनाओं के नाम बदल रहे हैं. मंत्रालय बन रहे हैं. मंत्रालय के नाम बदल रहे हैं. नदी नहीं बदल रही है. मरने वाले लोग भी नहीं बदल रहे हैं. जैसे कोई मंत्री बन रहा है, वैसे कोई कैंसर से मर रहा है. कैंसर से मरना भी मंत्री बनना है.
  • एक मिनट के लिए भूल जाइये कि मार खाने वाला तबरेज़ और मारने वाला पप्पू मंडल है. मारने का वीडियो बनाने और भीड़ का खड़े होकर तमाशा देखने वालों को भी भूल जाइये. अब आप याद कीजिए ऐसे कितने वीडियो आप देख चुके होंगे, कहीं कोई मास्टर स्कूल के छात्र को मार रहा है तो कहीं मां बाप ही मिलकर अपने बच्चों का जला रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपनी मर्जी से जाति तोड़ कर शादी कर ली है. हर तरह के वीडियो से आप सामान्य हो चुके हैं. फिर किससे उम्मीद की जाए कि वह इन वीडियो को देखकर बेचैन हो जाएगा. होता उल्टा है.
  • अभी तक गाय के नाम पर कमज़ोर मुसलमानों को भीड़ ने मारा. अब जय श्री राम के नाम पर मार रही है. दोनों ही एक ही प्रकार के राजनीतिक समाज से आते हैं. यह वही राजनीतिक समाज है जिसके चुने हुए प्रतिनिधि लोकसभा में एक सांसद को याद दिला रहे थे कि वह मुसलमान है और उसे जय श्री राम का नाम लेकर चिढ़ा रहे थे. सड़क पर होने वाली घटना संसद में प्रतिष्ठित हो रही थी.
  • पिता का नाम भारत के पहले कार्डियोलॉजिस्ट का नाम है. डॉ. श्रीनिवास. आज के समस्तीपुर के गढ़सिसाई गांव के रहने वाले थे. 1932 में समस्तीपुर के किंग एडवर्ड इंगलिश हाईस्कूल से आठवीं तक पढ़े. पटना साइंस कालेज आए. प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से 1944 में एमबीबीसी की पढ़ाई की. अब यह कॉलेज पीएमसीएच के नाम से जाना जाता है. स्वर्ण पदक हासिल किया. 1948 में एला लैमन काबेट फेलोशिप लेकर हार्वर्ड जाते हैं. वहां से डॉक्टर ऑफ मेडिसिन, डॉक्टर ऑफ साइंस की डिग्री लेते हैं.
  • अगर आपने अपनी राय चाहे पक्ष में हो या विपक्ष में न्यूज़ चैनलों के आधार पर बनाई है तो आपको शर्म आनी चाहिए. इतने बड़े सार्वजनिक मसले पर आपने राय बनाने के लिए कोई परिश्रम नहीं की. तीन तलाक़ पर कितनी बहस हुई है. न्यूज़ चैनलों पर हर दूसरी तीसरी शाम इस विषय पर डिबेट चला है. संसद में हुई है. सुप्रीम कोर्ट में हुई है. यह आपके विवेक के सम्मान का प्रश्न है. आप अपने विवेक को कैसे समृद्ध करते हैं, इसके लिए कितना श्रम करते हैं, इस पर निर्भर करता है कि आप किसी सार्वजनिक मसले में हिस्सेदारी से पहले कितनी मेहनत करते हैं. यह सवाल मोदी समर्थकों से भी है और मोदी विरोधियों से भी है.
  • जिस तरह चक्रवाती तूफानों के नाम होते हैं उसी तरह अब सूखे का भी नाम रखना चाहिए. मैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम पर ‘नीतीश सूखा’ रखना चाहता हूं. ‘नीतीश सूखा’ वह सूखा है जो राज्य सरकार की हज़ारों सबमर्सिबल पंप लगाने की नीति से आ चुका है या आने वाला है.
  • जीवन शैली बदलिए. क्या वो आपके बस में है? अगर नहीं तो योग आपके बस में नहीं हो सकता? फिर भी योग करते रहिए. सेल्फी के लिए नहीं, सेल्फ के लिए. अभ्यास से आगे जाइये. योग का सच्चा साधक आत्म प्रचार नहीं करता. वह भीड़ नहीं बनाता है. वह एकांत प्राप्त करता है.
  • सबमर्सिबल पंप पानी का ऐसा संकट लेकर आ रहा है जिसका अंदाज़ा हम सभी को है मगर नज़र हम सभी फेर ले रहे हैं. इस पंप के कारण ज़मीन के नीचे का पानी ग़ायब हो जाने वाला है. अगर ऐसा नहीं होता तो दिसंबर 2010 में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने गुड़गांव ज़िले में बोरवेल लगाने पर रोक नहीं लगाया होता.
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