NDTV Khabar
होम | ब्लॉग |   रवीश कुमार 

रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक- The Free Voice, इश्क़ में शहर होना। हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान।

  • उपरोक्त संदर्भ में चौकीदार कौन है, नाम लेने की ज़रूरत नहीं है. वर्ना छापे पड़ जाएंगे और ट्विटर पर ट्रोल करने लगेंगे कि कानून में विश्वास है तो केस जीत कर दिखाइये. जैसे भारत में फर्ज़ी केस ही नहीं बनता है और इंसाफ़ झट से मिल जाता है. आप लोग भी सावधान हो जाएं. आपके ख़िलाफ़ कुछ भी आरोप लगाया जा सकता है. अगर आप कुछ नहीं कर सकते हैं तो इतना तो कर दीजिए कि हिन्दी अख़बार लेना बंद कर दें या फिर ऐसा नहीं कर सकते तो हर महीने अलग अलग हिन्दी अख़बार लें, तभी पता चलेगा कि कैसे ये हिन्दी अख़बार सरकार की थमायी पर्ची को छाप कर ही आपसे महीने का 400-500 लूट रहे हैं. हिन्दी चैनलों का तो आप हाल जानते हैं. मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं. इसके लिए आपको 28 और 29 अगस्त के इंडियन एक्सप्रेस में ऋतिका चोपड़ा की ख़बर बांचनी होगी. आप सब इतना तो समझ ही सकते हैं कि इस तरह की ख़बर आपने अपने प्रिय हिन्दी अख़बार में कब देखी थी.
  • जब सरकारें आपको कम्युनिस्ट बताकर गिरफ्तार करने आने लगे तो समझ लेने का वो आखिरी वक्त होता है कि अब आपकी कोई हैसियत नहीं है. जब टीवी चैनल अर्बन नक्सल और कम्युनिस्ट बताकर देश का दुश्मन टाइम बहस करने लगें तो समझ लेने का आखिरी वक्त होता है कि अब नौकरी से लेकर पढ़ाई पर बात नहीं होगी. अब आपकी बात ही नहीं होगी और जो भी होगी उस प्रोपेगैंडा के हिसाब से होगी, जिसे मैं अक्सर थीम एंड थ्योरी कहता हूं. जिसे लेकर एक तरफ विरोधी या सवाल करने वालों को कुचला जा सके और दूसरी तरफ सवाल न उठे इसका इंतज़ाम किया जा सके. थीम एंड थ्योरी के तहत तीन मूर्ति में किस किस की मूर्ति लगेगी बहुत कमज़ोर टॉपिक था. इसलिए आज एक नया टॉपिक न्यूज़ मीडिया के मार्केट में लांच हो गया है, जिसके सहारे धीरे-धीरे मीम बनकर आपके व्हाट्सऐप में आने लगेगा. आप लाठियां खाते रहें कि सरकारी नौकरी में बहाली कब होगी मगर आपके सारे रास्ते बंद हो चुके हैं.
  • हर दिन सोचता हूं कि अब नौकरी सीरीज़ बंद कर दें. क्योंकि देश भर में चयन आयोग किसी गिरोह की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने नौजवानों को इस कदर लूटा है कि आफ चाह कर भी सबकी कहानी नहीं दिखा सकते हैं. नौजवानों से फॉर्म भरने कई करोड़ लिए जाते हैं, मगर परीक्षा का पता ही नहीं चलता है. देश में कोई भी खबर होती है, ये नौजवान दिन रात अपनी नौकरी को लेकर ही मैसेज करते रहते हैं. मेरी नौकरी, मेरी परीक्षा का कब दिखाएंगे. परीक्षा देकर नौजवान एक साल से लेकर तीन साल तक इंतज़ार कर रहे हैं तो कई बार फॉर्म भरने के बाद चार तक परीक्षा का पता ही नहीं चलता है. यह सीरीज़ इसलिए बंद करना ज़रूरी है क्योंकि समस्या विकराल हो चुकी है. जब भी बंद करने की सोचता हूं किसी नौजवान की कहानी सुनकर कांप जाता हूं. तब लगता है कि आज एक और बार के लिए दिखा देते हैं और फिर सीरीज़ बंद नहीं कर पाता. 
  • मुज़फ्फरपुर बालिका गृह कांड से संबंधित अब किसी भी मामले की रिपोर्टिंग नहीं होगी. पटना हाईकोर्ट ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर यह बंदिश लगा दी है. पहले हो चुकी जांच और आगे होने वाली जांच से संबंधित कोई ख़बर ही नहीं छपेगी. हाईकोर्ट के इस आदेश पर एडिटर्स गिल्ड ने चिन्ता जताई है.
  • हम तुम्हारी हर झूठ पर भारी पड़ते हैं, भांडा फोड़ देते हैं और इस तरह आप धीरे-धीरे बदलते चले जाएंगे. नफरतों से सामान्य होना कितना सहज हो चुका है. मैं केरल नहीं गया. जाता तो गलत नहीं होता. उसके बाद भी किसी मदद करने वाले के चेहरे पर मेरा चेहरा लगाकर इस तरह से पेश किया जा रहा है ताकि कम दिमाग के लोग मान बैठे कि केरल जाना या बाढ़ पीड़ितों की मदद करना गलत है. कम दिमाग वालों में ऐसी मूर्खता होगी ही इसी भरोसे धारणा फैक्ट्री से ऐसी सामग्री बनाई जाती है. सोचिए जिसकी जगह मेरा चेहरा लगा है वह कितना अच्छा होगा. अपने कंधे पर एक बच्चे को बिठाकर ले जा रहा है. यह उस बंदे का अपमान है. हम समाज में ऐसे लोगों को तैयार कर रहे हैं जो इस तरह के झांसे में आ रहे हैं.
  • अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद अचानक से उनके नाम पर कई चीज़ें खुलने लगी हैं. यहां अटल वहां अटल. हमने अखबारों में छपी खबरों के आधार पर, नेताओं द्वारा की गई मांग के आधार पर एक सूची बनाई है. हमारे सहयोगियों ने भी यह सूची बनाने में मदद की है. दिल्ली के अखबार में छत्तीसगढ़ का विज्ञापन आता है कि नया रायपुर का नाम अटल नगर रख दिया गया है.
  • मैंने एक भी प्राइम टाइम एक देश एक चुनाव थीम पर नहीं किया. एक भी लेख नहीं लिखा. जहां तक मेरी याद्दाश्त सही है, मैंने इस मसले पर न तो कोई शो किया न ही छपा हुआ किसी का लेख पढ़ा.
  • सरकार ईपीएफओ यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आंकड़ों को इस तरह पेश करती है कि रोज़गार बढ़ा है. 20 जुलाई को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने रोज़गार के कई आंकड़े दिए जिसमें ईपीएफओ का भी आंकड़ा था. अब प्रधानमंत्री ने लोकसभा में तो बोल दिया कि संगठित क्षेत्र में 45 लाख नौकरियां बनी हैं, लेकिन जब ईपीएफओ ने समीक्षा की तो इसमें 6 लाख नौकरियां कम हो गईं.
  • मिर्ज़ा ग़ालिब की शमा की तरह कुलदीप नैयर हर लौ में तपे हैं, हर रंग में जले हैं. शमा के जलने में उनका यक़ीन इतना गहरा था कि 15 अगस्त से पहले की शाम वाघा बॉर्डर पर मोमबत्तियां जलाने पहुंच जाते थे.
  • एक ऐसे दौर में जब हमारी निजता, हमारे निजी आंकड़ों की प्राइवेसी को लेकर ख़तरा बढ़ रहा है एक नया विवाद खड़ा हो गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने डीलरों से कहा है कि वे अपना यहां काम करने वाले करीब दस लाख कर्मचारियों का डेटा दें. कुल 24 प्रकार की जानकारी मांगी गई है.
  • आज एक ऐसी कहानी पर बात करेंगे जिसके लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं है. ऐसी बहुत ही कम कहानियां होती हैं जिनके लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं होता. ऐसी कहानियों को हर खेमे के लोग बिना अपराध बोध के देख सकते हैं. देखते हुए कोई ज़िम्मेदार दिख जाए तो यह उनका दोष होगा. उनकी नज़र का कसूर होगा.
  • आज की राजनीति नौजवानों आपको चुपके से एक नारा थमा रही है. तुम हमें वोट दो, हम तुम्हें हिन्दू मुस्लिम डिबेट देंगे. इस डिबेट में तुम्हारे जीवन के दस-बीस साल टीवी के सामने और चाय की दुकानों पर आराम से कट जाएंगे.
  • कब तक सेना के बहादुर जवान हम सबको बाढ़ और तूफान से निकालते रहेंगे. कब तक हम उनकी बहादुरी के किस्सों के पीछे अपनी नाकामी को छिपाते रहेंगे. सेना, नौसेना, वायुसेना, कोस्टगार्ड और एनडीआरएफ की दर्जनों टीमें न हों तो जान माल का नुकसान कितना होगा, हम अब अंदाज़ा लगा सकते हैं.
  • महाराष्ट्र के पांच शहरों में कम तीव्रता वाले धमाके की योजना का पर्दाफाश हुआ है. मुंबई, पुणे, सोलापुर, सतारा और नालासोपारा में धमाके की योजना थी. महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में 20 देसी बम और 21 देसी पिस्तौल बरामद किया है. तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी जो अब चार हो गई है.
  • केरल के चेंगानुर से विधायक ने एशियानेट से कहा है कि अगर अभी रात में हेलिकाप्टर नहीं भेजे गए तो सुबह तक हज़ारों लोग मारे जा चुके होंगे. इडुक्की ज़िला से पूरा संपर्क टूट गया है. केरल ने 100 साल बाद ऐसी बाढ़ देखी है.
  • अमरीकी प्रेस के इतिहास में एक शानदार घटना हुई है. 146 पुराने अख़बार बोस्टन ग्लोब के नेतृत्व में 300 से अखबारों ने एक ही दिन अपने अखबार में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर संपादकीय छापे हैं. आप बोस्टल ग्लोब की साइट पर जाकर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर लिखे गए 300 संपादकीय का अध्ययन कर सकते हैं.
  • अटल बिहारी वाजपेयी की असली विरासत विपक्ष की राजनीति में है. विपक्ष की राजनीति विरोध की राजनीति होती है. 1957 से 1996 तक विरोध और विपक्ष की राजनीति में उनका जीवन गुज़रा है. उनके राजनीतिक जीवन का 90 फीसदी हिस्सा विपक्ष की राजनीति का है.
  • डॉलर के मुक़ाबले रुपये की राजनीति घूम फिर कर 2013-14 आ जाती है जब यूपीए के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नकारा साबित करने के लिए रुपये की कीमत का ज़िक्र होता था. आप मौजूदा प्रधानमंत्री मोदी के उस समय के ट्वीट को देखें या भाषण सुने तो रुपये के गिरते दाम को भारत के गिरते स्वाभिमान से जोड़ा करते थे. विपक्ष के नेताओं से लेकर रविशंकर और रामदेव भी कहा करते थे कि मोदी जी प्रधानमंत्री बनेंगे तो डॉलर के मुकाबले रुपया मज़बूत हो जाएगा. जब भी रुपया कमज़ोर होता है ट्‌विटर पर रविशंकर का ट्वीट चलने लगता है कि मोदी जी के प्रधानमंत्री बनते ही एक डॉलर की कीमत 40 रुपये हो जाएगी यानी रुपया मज़बूत हो जाएगा. वे किस आधार पर कह रहे थे, वही बता सकते हैं अगर वे इस पर कुछ कहें. आज भारत का रुपया डॉलर के मुकाबले इतना कमज़ोर हो गया जितना कभी नहीं हुआ था. पहली बार एक डॉलर की कीमत 70 रुपये हो गई है.
  • 15 अगस्त के आस-पास दिल्ली अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क हो ही जाती है, इसके बाद भी संसद के बिल्कुल करीब कंस्टीट्यूशन क्लब के बाहर उमर ख़ालिद पर गोली चलाने की कोशिश होती है. सुरक्षा के लिहाज़ से इस हाई अलर्ट ज़ोन में कोई पिस्टल लेकर आने की हिम्मत कैसे कर गया और फरार भी हो गया. उमर ख़ालिद कंस्टीट्यूशन क्लब के बाहर चाय की दुकान से पेप्सी पीकर लौट रहे थे कि पीछे से हमला होता है. उन्हें मुक्का मार कर गिरा दिया, लेकिन उमर ने उसका हाथ पकड़ लिया जिसके हाथ में पिस्तौल थी. ढाई बजे से वहां 'ख़ौफ़ से आज़ादी' नाम का कार्यक्रम होने वाला था, उसी के लिए उमर ख़ालिद समय से पहले पहुंच कर चाय पी रहे थे. तभी वहां कोई शख्स आया जो सफेद शर्ट में था और उमर ख़ालिद को धक्का देने लगा.
  • हरियाणा में मनोहरलाल खट्टर सरकार ने सरस्वती नदी की खोज में जाने कितने करोड़ बहा दिए. एक नदी की खोज का दावा कर लिया गया है. मुग़लावाली गांव के आस-पास सरस्वती नदी को लेकर जो नई संस्कृति गढ़ी जा रही है. कैसे भोले लोगों में यह विश्वास गढ़ा जा रहा है कि सरस्वती नदी मिल गई है.
«1234567»

Advertisement