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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक- The Free Voice, इश्क़ में शहर होना। हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान।

  • कौशल श्रॉफ नाम के एक खोजी पत्रकार ने अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और केमैन आइलैंड से दस्तावेज़ जुटाकर डोभाल के बेटों की कंपनी का खुलासा किया है. 'कैरवां' पत्रिका के अनुसार ये कंपनियां हेज फंड और ऑफशोर के दायरे में आती हैं. टैक्स हेवन वाली जगहों में कंपनी खोलने का मतलब ही है कि संदिग्धता का प्रश्न आ जाता है और नैतिकता का भी. यह कंपनी 13 दिन बाद 21 नवंबर 2016 को टैक्स केमन आइलैंड में विवेक डोभाल अपनी कंपनी का पंजीकरण कराते हैं.
  • मीडिया में गढ़ी गई छवि के बरक्स अगर आप ठेके पर काम करने वाले मज़दूरों पर आई सीएजी की रिपोर्ट को देखेंगे कि तो पता चलेगा कि रेलवे बग़ैर किसी मंत्री के चल रहा है. राम भरोसे कहना ठीक नहीं होगा क्योंकि राम भरोसे तो सारा देश चलता है.
  • सरकारी स्कूलों और कालेजों में शिक्षा की हालत ऐसी है कि जरा सा सुधार होने पर भी हम उसे बदलाव के रूप में देखने लगते हैं. सरकारी स्कूलों में लाखों की संख्या में शिक्षक नहीं हैं. जो हैं उनमें से भी बहुत पढ़ाने के योग्य नहीं हैं या प्रशिक्षित नहीं हैं.
  • जवाहर लाल यूनिवर्सिटी का मसला फिर से लौट आया है. 9 फरवरी 2016 को कथित रूप से देशदोह की घटना पर जांच एजेंसियों की इससे अधिक गंभीरता क्या हो सकती है कि तीन साल में उन्होंने चार्जशीट फाइल कर दी. वरना लगा था कि हफ्तों तक इस मुद्दे के ज़रिए चैनलों को राशन पानी उपलब्ध कराने के बाद इससे गोदी मीडिया की दिलचस्पी चली गई है. उस दौरान टीवी ने क्या क्या गुल खिलाए थे, अब आपको याद भी नहीं होंगे.
  • सूरत के राधा कृष्ण कपड़ा बाज़ार में चोरी को लेकर हंगामा मचा हुआ है. राधा कृष्ण कपड़ा मार्केट भारत का सबसे बड़ा कपड़ा बाज़ार माना जाता है. यहां पर कपड़े की पांच-छह हज़ार दुकानें हैं. जब से यहां पिछले कई रविवार को डुप्लीकेट चाबी की मदद से माल चोरी की घटना सामने आई है, व्यापारियों के होश उड़े हुए हैं. सब अपने माल का स्टॉक चेक कर रहे हैं और सीसीटीवी की रिकार्डिंग देख रहे हैं. सारी दुकानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं और जिनके यहां हैं, बहुतों के पास नाइट विज़न नहीं हैं.
  • हिन्दी अख़बारों के संपादकों ने अपने पाठकों की हत्या का प्लान बना लिया है. अख़बार कूड़े के ढेर में बदलते जा रहे हैं. हिन्दी के अख़बार अब ज़्यादातर प्रोपेगैंडा का ही सामान ढोते नज़र आते हैं. पिछले साढ़े चार साल में हिन्दी अख़बारों या चैनलों से कोई बड़ी ख़बर सामने नहीं आई. साहित्य की किताबों से चुराई गई बिडंबनाओं की भाषा और रूपकों के सहारे हिन्दी के पत्रकार पाठकों की निगाह से बच कर निकल जाते हैं. ख़बर नहीं है. केवल भाषा का खेल है.
  • रिटायर जस्टिस ए के पटनायक का बयान आया है कि उन्हें वर्मा के ख़िलाफ़ केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के कोई प्रमाण नहीं मिले थे. सुप्रीम कोर्ट ने ही जस्टिस पटनायक से कहा था कि वे सीवीसी की रिपोर्ट की जांच करें. पटनायक ने चौदह दिनों के भीतर जांच कर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम  कोर्ट को सौंप दी थी.
  • मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल को लोक सभा में पास करा लिया है. इसके प्रावधान के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सताए गए वैसे हिन्दू, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई को भारत में छह साल रहने के बाद नागरिकता दी जा सकती है जो 31 दिसंबर 2014 के पहले भारत आ गए थे.
  • आलोक वर्मा ने ही पिछले साल अपने नंबर टू स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए थे. उन पर 3 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप था. अस्थाना ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका लगाई है कि एफआईआर रद्द की जाए. इस याचिका पर अभी निर्णय नहीं आया है.
  • भारत दुनिया का अनोखा देश हैं, जहां रेलवे की ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए किसी को 26 घंटे की रेलयात्रा करनी पड़ती है. इस महीने 21, 22 और 23 जनवरी को सहायक लोको पायलट और टेक्नीशियन के 64,317 पदों के लिए दूसरे चरण की परीक्षा होनी है. 10 दिन पहले छात्रों के सेंटरों की लिस्ट जारी की गई है. छात्रों के सेंटर 1,500 से 2,000 किलोमीटर दूर दिए गए हैं.
  • सभी प्रकार की सरकारों से आज तक ये न हुआ कि एक पारदर्शी और ईमानदार परीक्षा व्यवस्था दे सकें जिस पर सबका भरोसा हो. बुनियादी समस्या का समाधान छोड़ कर हर समय एक बड़े और आसान मुद्दे की तलाश ने लाखों की संख्या में नौजवानों को तोड़ दिया है.
  • अगस्त 2018 से जनवरी 2019 आ गया लेकिन इस रिपोर्ट का कुछ पता नहीं है. 25 दिसंबर को बिजनेस स्टैंडर्ड में वित्त मंत्री अरुण जेटली का इंटरव्यू छपता है. इस इंटरव्यू में सवाल पूछा जाता है कि क्या आप मौजूदा 7.5 प्रति वर्ष की विकास दर से संतुष्ट हैं, इसी से जुड़ा सवाल है नौकरियों को लेकर. जवाब में वित्त मंत्री कहते हैं, 'मैं मानता हूं कि जब अर्थव्यवस्था लगातार विस्तार कर रही हो, यहां तक कि 7.5 प्रतिशत की दर से, नौकरियों में वृद्धि तो होनी ही है.
  • आरक्षण सिर्फ ग़रीब सवर्णों के लिए नहीं है. जैसा कि मीडिया में चलाया जा रहा है. यह आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके को दिया जा रहा है. जिसमें हिन्दू सवर्ण, मुसलमान और ईसाई शामिल हैं. इसके मसौदे से यही बात ज़ाहिर होती है.
  • नौकरियां कहां हैं, धीरे धीरे जब नौकरी का सवाल बड़ा हो रहा था, ऐसे आंकड़े आ रहे थे कि पिछले साल शहरों और गांवों में एक करोड़ लोगों की नौकरियां चली गई हैं, मोदी सरकार ने 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला कर लिया है, बल्कि संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन यानी 8 जनवरी को संविधान संशोधन विधेयक भी पेश किया जाएगा.
  • कहीं से घूमते-फिरते हुए आकर बैठे और बिठाए गए ये लोग गिनती में दो, चार, छह और कभी-कभी दस भी होते हैं. कई साल से आते-आते इनके चेहरे पर टीवी की ऊब दिखने लगी है. जो नया आता है वो भी इसी टाइप के टीवी को देखते-देखते ऊबा हुआ लगता है.
  • सावित्री बाई ने पहला स्कूल नहीं खोला, पहली अध्यापिका नहीं बनीं, बल्कि भारत में औरतें अब वैसी नहीं दिखेंगी जैसी दिखती आई हैं, इसका पहला जीता जागता मौलिक चार्टर बन गईं. उन्होंने भारत की मरी हुई और मार दी गई औरतों को दोबारा से जन्म दिया.
  • अपने नेता जी की सुविधा से आप सक्रिय होते हैं, मेरा नंबर पब्लिक करते हैं और फिर ख़ुद ही फ़ोन करते रहते हैं. अब मैं फ़ोन तो उठाता नहीं. आप आज दिन भर फ़ोन करते रहे. कई सौ नंबरों से फ़ोन आए. आपको क्यों लगता है कि साहब की राजनीति की सुविधा के हिसाब से मुझ पर दबाव बना लेंगे?
  • चुनाव आते ही कुछ युवा पत्रकार व्हॉट्सऐप करने लगते हैं कि मुझे चुनाव यात्रा पर ले चलिए. आपसे सीखना है. लड़का और लड़की दोनों. दोनों को मेरा जवाब 'न' है. यह संभव नहीं है. कुछ लोगों ने सीमा पार कर दी है. मना करने पर समझ जाना चाहिए, पर कई लोग नहीं मानते हैं. बार-बार मैसेज करते रहते हैं, इसलिए यहां लिख रहा हूं. यह क्यों संभव नहीं है?
  • मणिपुर के पत्रकार किशोरचंद्र वांग्खेम को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत एक साल की सज़ा हुई है. NSA का एक सलाहकार बोर्ड होता है. 11 दिसंबर को राज्य सरकार ने पत्रकार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को इसके सामने पेश किया. 13 दिसंबर को बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी और NSA के तहत गिरफ्तारी को मंज़ूरी दे दी.
  • बिहार की एक आंगनवाड़ी सेविका की बेटी का पत्र आया है. मैं सोच रहा था कि इस पत्र को आपके सामने कैसे रखूं. इतने मामूली पैसे से कोई महिला अपने वजूद की रक्षा कर पाती है, तो यह पैसा कितना मायने रखता होगा. स्टेट की समीक्षा की ज़रूरत आ पड़ी है. हमारी राज्य व्यवस्थाएं सड़ गईं हैं. उनके भीतर संभावनाओं का विस्तार नहीं हो रहा है.
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