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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

  • चुनाव आयोग के सामने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ आचार संहिता के उल्लंघन के पांच मामले आए. यह भी शर्मनाक मामला है कि भारत के प्रधानमंत्री आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं. आयोग ने चेतावनी दी थी कि सेना के नाम पर वोट नहीं मांगा जाएगा. धार्मिक पहचान और उन्माद के नाम पर वोट नहीं मांगा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के दबाव में शुरू में तीन चार नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई तो हुई लेकिन जब अमित शाह और नरेंद्र मोदी का नाम आया तो आयोग के हाथ कांपते से लगते हैं.
  • इस बीच आपरेशन बालाकोट होता है. पाकिस्तान भी जवाबी कार्रवाई करता है. विंग कमांडर अभिनंदन को वापस कर दिया जाता है. दोनों देशों के बीच तनाव कम हो जाता है. तनाव कम करने की पाकिस्तान की पहली शर्त पूरी हो जाती है. अब बाकी शर्तों पर बात होनी थी.
  • बिना वेतन के 28 महीने से कोई कैसे जी सकता है. भारत सरकार की संस्था अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा बर्ताव करे और किसी को फर्क न पड़े. सिस्टम ने एक कर्मचारी को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया. 29 अप्रैल को यह लिखकर आत्महत्या कर ली कि भारत सरकार ज़िम्मदार है.
  • एक समय राजीव गांधी भी अमिताभ बच्चन के साथ अपनी दोस्ती को राजनीति में खूब जमाते थे. वही अमिताभ बच्चन राजनीति में न जाने कितनों के दोस्त हुए. अब प्रधानमंत्री मोदी एक से अधिक कालकारों के साथ नज़र आते हैं.
  • बिहार में ऐसा कुछ हुआ है क्या कि 5 दिन के भीतर प्रधानमंत्री मोदी की सभा के अंत में लगने वाले नारे से वंदे मातरम का नारा ही ग़ायब हो गया. क्या ऐसा नीतीश कुमार की असहजता को देखकर किया गया, अगर नहीं तो इसका प्रमाण 4 मई को बगहा की रैली में मिल जाएगा जब प्रधानमंत्री और नीतीश कुमार दोनों साझा रैली करेंगे.
  • मसूद अज़हर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा चिन्हित, प्रतिबंधित और सूचित ग्लोबल आतंकवादी हो गया है. भारत ने लंबे समय तक कूटनीतिक धीरज का पालन करते हुए उसी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अज़हर को ग्लोबल आतंकी की सूची में डलवाया है जहां से उसे 2009, 2016, 2017 और मार्च 2019 में पहले सफलता नहीं मिली. पांचवी बार में मिली यह सफलता कूटनीतिक धीरज का मिसाल बनेगी.
  • 996 के बारे में आपने नहीं सुना होगा. इसका मतलब है लगातार 6 दिन 9 बजे सुबह से लेकर 9 बजे रात तक काम करना. 14 अप्रैल को चीन की सबसे बड़ी ई-कामर्स कंपनी के प्रमुख जैक मा ने एक ब्लॉग लिखा. उसने चीन में 996 संस्कृति की तारीफ की. चीन के आईटी सेक्टर में 996 की संस्कृति लंबे सयम से रही है मगर जैक मा के ब्लॉग के बाद से इसका विरोध तेज़ हो गया है.
  • अगले तीन चरण के चुनाव मुख्य रूप से हिन्दी भाषी प्रदेशों में ही हो रहे हैं. लेकिन इन प्रदेशों में हिन्दी की ही हालत ख़राब है. हिन्दी बोलने वाले नेताओं के स्तर पर क्या ही चर्चा की जाए, उनके भाषणों में करुणा तो जैसे लापता हो गई है. आक्रामकता के नाम पर गुंडई के तेवर नज़र आते हैं. सांप्रदायिकता से लैस हिन्दी ऐसे लगती है जैसे चुनावी रैलियों में बर्छियां चल रही हों. चुनाव के दौरान बोली जाने वाली भाषा का मूल्यांकन हम बेहद सीमित आधार पर करते हैं. यह देखने के लिए कि आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है या नहीं. मगर भाषा की भी तो आचार संहिता होती है. उसका अपना संसार होता है,संस्कार होता है. ज्ञान का भंडार होता है. उन सबका क्या.
  • एक तो सबसे सक्रिय चौकीदार निकला जिसने अध्ययन के दौरान के समय में 9000 बार ट्वीट किया है. 70 प्रतिशत ट्वीट सिर्फ 10 प्रतिशत ही चौकीदार कर रहे हैं. 24,000 चौकीदार नाम बदल कर खुश हो गए. चुप रह गए.
  • शांतिपूर्ण मतदान के बीच अशांतिपूर्ण मतदान आज भी मौजूद हैं. चार चरण के मतदान इस तरह बीत गए. तीन चरण के अभी बाकी हैं. चुनाव आयोग एक तरफ गिरिराज सिंह से लेकर मेनका गांधी के बयानों को लेकर चेतावनी तो जारी कर रहा है मगर प्रधानमंत्री के 9 अप्रैल के बयान पर उसकी कार्रवाई का कुछ पता नहीं चल रहा है. 20 दिन हो गए. पुलवामा और ऑपरेशन बालाकोट के नाम पर पहली बार वोट डालने जा रहे वोटरों से अपील करने वाले बयान को लेकर अब विपक्ष भी पूछने लगा है कि कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है.
  • लिंक्ड इन एक सोशल साइट है. इस पर राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के वरिष्ठ स्तर के अधिकारी अजय कुमार ने अंग्रेज़ी में विस्तार से पोस्ट लिखा है. इस पोस्ट में अजय कुमार बताते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान ने सबके सामने उन्हें गालियां दीं. उस तरह की गालियां जिन्हें यहां लिखना संभव नहीं हैं. अंग्रेज़ी में जिन्हें Cuss Word कहते हैं.
  • अक्षय कुमार ने प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लिया. लेकिन इंटरव्यू के लिए कैमरा किसका था? तकनीकि सहयोग किसका था? क्या इंटरव्यू के अंत में किसी प्रोडक्शन कंपनी का क्रेडिट रोल आपने देखा? इन सवालों पर बात नहीं हो रही है. क्योंकि इन पर बात होगी जो जवाबदेही तय होगी. सोचिए ग़ैर राजनीति के नाम पर आप दर्शकों के भरोसे के साथ इतनी बड़ी राजनीति हो गई.
  • पूर्वी दिल्‍ली लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी ने आतिशी को उम्‍मीदवार बनाया है. उनका मुकाबला बीजेपी के गौतम गंभीर और कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली के साथ है. आतिशी जोरशोर से चुनाव प्रचार में लगी हैं और उन्‍होंने कल्‍याणपुरी इलाके में रोड शो किया. इस दौरान उन्‍होंने NDTV के रवीश कुमार से बात भी की.
  • वैसे आम वाले सवाल ने प्रसून जोशी के उस सवाल को तगड़ा कंपटीशन दिया है. प्रसून जोशी ने कहा था कि आपमें फकीरी कहां से आती है. अक्षय कुमार को पता था कि वे फकीर का नहीं, प्रधानमंत्री का इंटरव्यू करने आ रहे हैं. एक व्यक्ति का इंटरव्यू करने जा रहे हैं. फिर भी देखना चाहिए कि प्रसून जोशी और अक्षय कुमार के सवालों में क्या अंतर है. किसके सवाल ज़्यादा राजनीतिक हैं किसके ज्यादा आध्यात्मिक हैं. ये आप तय करेंगे. प्रसून ने मोदी मे फकीरी देखा तो अक्षय उनमें सैनिक और सन्यासी देखकर कंफ्यूज हो गए.
  • दो साल पहले जब मैंने प्राइवेट स्कूलों की लूट पर लगातार कई दिनों तक प्राइम टाइम किया था तब लोगों ने रास्ते में रोक कर कहा कि आप मोदी विरोध में ऐसा कर रहे हैं. मुझे समझ नहीं आया कि स्कूलों के इस लूट सिस्टम पर रिपोर्ट करने का संबंध मोदी विरोध से कैसे है.
  • भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर ने भले ही अपने बयान से किनारा कर लिया लेकिन हेमंत करकरे के बारे में उनके बयान का असर गया नहीं है. प्रज्ञा ठाकुर भले ही इस बयान को छोड़ अपने राजनीतिक प्रचार में आगे निकल गईं हैं मगर उनके बयान हेमंत करकरे के साथ काम करने वाले पुलिस अफसरों की अंतरात्मा को चुनौती दे रहे हैं.
  • भारत के लाखों स्कूलों में न्यूक्लियर बम की विनाशलीला के बारे में बताया गया होगा. न्यूक्लियर बम बच्चों का खिलौना नहीं है. इसने लाखों लोगों की जान ली है. पीढ़ियां नष्ट की है. दुनिया भर में यही सीखाया जाता है कि न्यूक्लियर बम धरती पर इंसान के वजूद को मिटा देने का बम है. विज्ञान का अभिशाप है.
  • चुनाव में भाग लेने के साथ-साथ उसे समझने की प्रक्रिया भी चलती रहनी चाहिए. हमारा सारा ध्यान सरकार बदलने और बनवाने पर रहता है लेकिन थोड़ा सा ध्यान हमें उन कारणों पर भी देना चाहिए जो राजनीति को तय करते हैं. जिनके कारण राजनीतिक बदलाव असंभव सा हो गया है.
  • अमेरिका में पिछले पांच साल में निजी मुनाफे पर चलने वाले 1200 कॉलेज बंद हो गए हैं. हर महीने 20 कालेज बंद होने का औसत निकलता है. निजी मुनाफे के लिए खुले कॉलेजों में छात्रों का एडमिशन घटता जा रहा है. 2014 में जितना था उसका अब आधा हो गया है. यह होना था, इसकी वजह है. मुनाफे के लिए खोले गए इन निजी कालेजों का प्रदर्शन बहुत ख़राब हो रहा था.
  • उत्तर प्रदेश में 73 सीटों में से एक कम नहीं होगा. 72 की जगह 74 हो सकता है. यह बयान अमित शाह का है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का इंडियन एक्सप्रेस में लंबा इंटरव्यू छपा है. उनके इस दावे से यही निष्कर्ष लगता है कि बसपा और सपा का गठबंधन समाप्त हो चुका है. इस बार फिर बसपा को शून्य आने वाला है और सपा अपने परिवार के नेताओं को ही जिता सकेगी.
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