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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक- The Free Voice, इश्क़ में शहर होना। हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान।

  • एम जे अकबर पर 14 महिला पत्रकारों के लगाए आरोप और उनके जवाब की स्टोरी को लेकर एक अध्ययन यह भी करना चाहिए कि हिन्दी अखबारों ने अकबर पर लगे आरोपों का किस पन्ने पर और कितना छोटा सा छापा और जब खंडन आया तो उनके खंडन को कहां छापा और कितनी प्रमुखता से छापा.
  • 14 महिला पत्रकारों ने मुबशिर जावेद अकबर पर संपादक रहते हुए शारीरिक छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं. ये सारे लेख अंग्रेज़ी में लिखे गए हैं और अंग्रेज़ी की वेबसाइट पर आए हैं. हफिंग्टन पोस्ट, मीडियम, दि वायर, वोग, फर्स्टपोस्ट, इंडियन एक्सप्रेस. ग़ज़ाला वहाब, कनिका गहलौत, प्रिया रमानी, प्रेरणा बिंद्रा सिंह, शुमा राहा, प्रेम पणिक्कर, सुपर्णा शर्मा, सुतपा पॉल, दू पू कांप (DU PUY KAMP), रूथ डेविड, अनसुया बासु, कादंबरी एम वाडे. इन चौदह महिला पत्रकारों के संस्मरण को आप ग़ौर से पढ़ें.
  • प्रो. जी डी अग्रवाल की मौत ने साबित कर दिया है कि गंगा के नाम पर जो राजनीतिक भावुकता पैदा की जाती है वो फर्जी है. गंगा को लेकर कोई भावुकता नहीं है. न गंगा नदी के लिए और न ही गंगा मां के लिए है. प्रो. जी डी अग्रवाल गंगा के लिए स्वामी सानंद हो गए. शायद इसलिए कि इससे जुड़ी धार्मिकता गंगा के सवालों को बड़ा फलक देगी.
  • चैंपियन ऑफ़ द अर्थ की नाक के नीचे एक और अनर्थ हो गया. अपने जीवन काल में गंगा को साफ होते देखने की चाह रखने वाले प्रो. जी डी अग्रवाल का निधन हो गया. 17 साल तक आईआईटी कानपुर के सिविल एंड एन्वायरेन्मेंटल इंजीनियरिंग पढ़ा चुके प्रो. अग्रवाल ने न जाने कितने छात्रों को इस विषय के प्रति जागरूक किया.
  • सवाल अकबर के इस्तीफ़े का नहीं है. इस्तीफ़ा लेकर कोई महान नहीं बन जाएगा. वो तो होगा ही. मगर जवाब देना पडेगा कि इस अकबर में क्या ख़ूबी थी कि राज्यसभा का सदस्य बनाया, बीजेपी का सदस्य बनाया और मंत्री बनाया. इसके दो-दो दलों के अंदरखाने तक पहुंच होती है. सत्ता तंत्र का बादशाह बन जाता है. आराम से कांग्रेस का सांसद, आराम से भाजपा का सांसद.
  • आप अकबर की ख़बर को लेकर फेसबुक पोस्ट और YouTube वीडियो पर गौर कीजिए. इनके शेयर होने की रफ्तार धीमी हो गई है. प्रिंट मीडिया में अकबर की ख़बर को ग़ायब कर दिया गया है. अख़बारों के जिला संस्करणों में अकबर की ख़बर तीन-चार लाइन की है. दो-तीन दिन तो छपी ही नहीं. उन ख़बरों में कोई डिटेल नहीं है. एक पाठक के रूप में क्या यह आपका अपमान नहीं है कि जिस अख़बार को आप बरसों से ख़रीद रहे हैं, वह एक विदेश राज्यमंत्री स्तर की ख़बर नहीं छाप पा रहा है...?
  • उत्तरी दिल्ली नगर निगम का एक स्कूल है, वज़ीराबाद गांव में.  इस स्कूल में हिन्दू और मुसलमान छात्रों को अलग-अलग सेक्शन में बांट दिया गया है.  इंडियन एक्सप्रेस की सुकृता बरुआ ने स्कूल की उपस्थिति पंजिका का अध्ययन कर बताया है कि पहली कक्षा के सेक्शन ए में 36 हिन्दू हैं. सेक्शन बी में 36 मुसलमान हैं.
  • प्रधानमंत्री मोदी ने न तो एमजे अकबर को बर्ख़ास्त किया है और न ही एमजे अकबर ने विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दिया है. न ही अकबर के बचाव में कोई मंत्री आया है. न ही अकबर के लिए बीजेपी का कोई प्रवक्ता सामने आया है. दरअसल किस्सा ही ऐसा सामने आया है कि उसके सामने कोई सामने नहीं आ रहा है. मुबशिर जावेद अकबर मध्यप्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं तो वहां से भी कोई सामने नहीं आया है. एमजे अकबर भी अपने बचाव में अभी तक सामने नहीं आए हैं. उनका सामने आना ज़रूरी है, क्योंकि कई महिला पत्रकारों ने ऐसे प्रसंग सुनाए जिन्हें पढ़कर उन्हें भी अच्छा नहीं लगेगा. अकबर के सामने न आने से सरकार पर भी आंच आ रही है. उम्मीद है वे जल्दी सामने आएंगे और कुछ कहेंगे. किस पत्रकार के बारे में क्या धारणा है, मेरी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन जब कुछ महिला पत्रकारों ने संदर्भ और प्रसंग के साथ ब्योरा लिखा तो लगा कि अब अकबर की बात होनी चाहिए. मैंने कोई जल्दबाज़ी नहीं की. सोमवार के दिन भी रूका कि एक दिन ठहर कर देखते हैं फिर इस पर बात करेंगे. तो अपनी तरफ से जितना चेक सिस्टम हो सकता है हमने पालन किया.
  • पिछले चार साल से BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लोग उस महान अकबर की महानता को कतरने में लगे रहे, कामयाब भी हुए, जो इतिहास का एक बड़ा किरदार था. सिलेबस में वह अकबर अब महान नहीं रहा. मगर अब वे क्या करेंगे, जब मोदी मंत्रिमंडल का अकबर 'महान' निकल गया है. मोदी मंत्रिमंडल के अकबर की 'महानता' का संदर्भ यह नहीं है कि उसने किले बनवाए, बल्कि अपने आस-पास जटिल अंग्रेज़ी का आभामंडल तैयार किया और फिर उसके किले में भरोसे का क़त्ल किया.
  • किसी भी घटना में शामिल आरोपी के समाज के लोगों को क्या सामूहिक सज़ा दी सकती है? नहीं दी जा सकती है लेकिन हमने एक फार्मूला बना लिया है. बलात्कार का आरोपी किसी खास मज़हब का है तो उस मज़हब के खिलाफ तरह तरह के व्हाट्सऐप मटीरियल बन जाते हैं. बच्चा चोरी की अफवाह फैल जाती है तो भीड़ बन जाती है.
  • गुजरात में चौदह महीने की एक बच्ची के साथ बलात्कार की घटना ने एक नई परिस्थिति पैदा कर दी है. बच्ची जिस समाज की है उसके कुछ लोगों ने इसे अपने समाज की शान भर देखा है. वे सामूहिक रूप से उग्र हो गए हैं. कह सकते हैं कि इस समाज के भीतर भीड़ बनने के तैयार लोगों को मौक़ा मिल गया है.
  • इस चुनाव आयोग पर कोई कैसे भरोसा करे. ख़ुद ही बताता है कि साढ़े बारह बजे प्रेस कांफ्रेंस है. फिर इसे तीन बजे कर देता है. एक बजे प्रधानमंत्री की सभा है. क्या इस वजह से ऐसा किया गया कि रैली की कवरेज या उसमें की जाने वाली घोषणा प्रभावित न हो?
  • गांधी जयंती का यह डेढ़ सौंवा साल शुरू हो गया है. पिछले ही साल चंपारण सत्याग्रह का सौंवा साल था जब 1917 में गांधी चंपारण गए थे. इस 2 अक्तूबर से अगले 2 अक्तूबर की तक गांधी को याद करने के लिए बहुत से सरकारी कार्यकर्म होंगे.
  • आख़िर कब तक सरकार भी देखती और कब तक लोग भी देखते. पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस के दाम बढ़ते-बढ़ते कहां तक जाएंगे किसी को नहीं पता. कई महीनों से जनता पेट्रोल डीज़ल और रसोई गैस के दाम दिए जा रही थी और यह मान लिया गया था कि जनता इस बार उफ्फ तक नहीं कर रही है क्योंकि वह सरकार के ख़िलाफ़ नारे नहीं लगा रही है.
  • कायदे से 2 अक्तूबर को ऐसा नहीं होना चाहिए था मगर दिल्ली यूपी बॉर्डर पर किसानों को रोकने गई पुलिस के कारण हम सबको ये देखने को मिला. किसान किसी भी हाल पर राजघाट जाना चाहते थे. 2 अक्तूबर के पूरे दिन दिल्ली की इस सीमा पर टकराव और तनाव में बीता.
  • आज के दिन तमाम सरकारी और रूटीन कार्यक्रमों के बाद राजघाट के रास्ते उन लोगों के लिए खोल देने चाहिए थे, जो अपनी मांगों को लेकर वहां जाना चाहते थे. राजघाट सिर्फ राजनयिकों और राष्ट्रप्रमुखों के माल्यार्पण के लिए नहीं है. किसानों के भाषण के लिए भी है. दिल्ली किसानों से दूर जाएगी, तो किसान दिल्ली आएंगे ही. रास्ता नहीं रोका जाता, तो आराम से आते और किसान चले जाते.
  • आज एक डॉलर की कीमत 73 रुपये 37 पैसे को छू गई. रुपये की गिरावट का यह नया इतिहास है. भारत के रुपये का भाव इस साल 12 प्रतिशत गिर गया है. एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन भारतीय मुद्रा का है. 2013 में कभी एक डॉलर 72 के पार नहीं गया, लेकिन उस वक्त अक्टूबर से दिसंबर के बीच 13 प्रतिशत गिरा था. यहां तो 12 प्रतिशत में ही 72 के पार चला गया.
  • जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने अयोध्या मामले में तीन जजों की बेंच में असहमति की टिप्पणी दर्ज की. जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने सबरीमला मंदिर मामले में असहमति की टिप्पणी दर्ज की है. पहले हम अलग अलग केस में और अलग अलग बेंच में जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की असहमति की टिप्पणियों पर ग़ौर करेंगे.
  • राफेल विमान या किसी भी रक्षा ख़रीद के लिए कांट्रेक्ट नेगोशिएशन कमेटी (CNC) के प्रमुख वायुसेना प्रमुख थे. फ्रांस की टीम से दर्जनों बार बातचीत के बाद अंतिम कीमत के नतीजे पर पहुंचा गया था.
  • IL&FS (INFRASTRUCTURE LEASING AND FINANCIAL SERVICES) का नाम बहुत लोगों ने नहीं सुना होगा. यह एक सरकारी क्षेत्र की कंपनी है जिसकी 40 सहायक कंपनियां हैं. इसे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी की श्रेणी में रखा जाता है जो बैंकों से लोन लेती हैं. जिसमें कंपनियां निवेश करती हैं और आम जनता जिसके शेयर ख़रीदती है.
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