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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक- The Free Voice, इश्क़ में शहर होना। हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान।

  • इंदौर में एक मेडिकल कॉलेज है. इंडेक्स मेडिकल कॉलेज. 10 जून 2018 को स्मृति लहरपुरे ने आत्महत्या कर ली. 8 अगस्त को उसी मेडिकल कॉलेज की एक और छात्रा शिवानी उइके ने आत्महत्या कर ली. दोनों के कारण एक से है. फीस. मनमानी फीस.
  • सबसे पहले दो तीन तारीखों को लेकर स्पष्ट हो जाइये. 10 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद रफाल डील का एलान करते हैं. इसके 16 दिन पहले यानी 25 मार्च 2015 को राफेल विमान बनाने वाली कंपनी डास्सो एविएशन के सीईओ मीडिया से बात करते हुए हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड के चेयरमैन का ज़िक्र करते हैं.
  • क्या राफेल लड़ाकू विमान की खरीद में घोटाला हुआ है, इस बारे में आज यशवंत सिन्हा, प्रशांत भूषण और अरुण शौरी ने प्रेस कांफ्रेंस की. इनकी मांग है कि सरकार सभी सवालों के जवाब दे, विपक्ष इन सवालों को ठीक से उठाए और मीडिया उन तथ्यों को उजागर करने का प्रयास करे, जिन्हें सरकार छिपाना चाहती है. प्रशांत भूषण ने प्रेस रिलीज में लिखा है कि सरकार दोस्ताना मीडिया के ज़रिए भ्रम फैला रही है. आइये पहले जल्दी से इसकी कहानी कैसे शुरू होती है उस पर नज़र डालते हैं. राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस की कंपनी डास्सों एविएशन बनाती है. 2007 से भारत इसे ख़रीदने का सपना देख रहा है. उस साल भारतीय वायुसेना ने सरकार को अपनी ज़रूरत बताई थी और यूपीए सरकार ने रिक्वेस्ट ऑफ प्रपोज़ल तैयार किया था कि वह 167 मीडियम मल्टी रोल कंबैट एयरक्राफ्ट खरीदेगा. इसमें साफ साफ कहा गया था कि जो भी टेंडर जारी होगा उसमें यह बात शामिल होगी कि शुरुआती ख़रीद की लागत क्या होगी, विमान कंपनी भारत को टेक्नॉलजी देगी और भारत में उत्पादन के लाइसेंस देगी.
  • हमारी राजनीतिक चर्चा थ्योरी और थीम के आसपास घूमती रहती है. शायद इनके विश्लेषण में विद्वान होने का मौक़ा मिलता होगा. राजनीति चलती भी है थीम और थ्योरी से. इस छतरी के नीचे हमारा सिस्टम कैसी-कैसी क्रूरताओं से भरा है.
  • NDTV 24x7, NDTV India पर हापुड़ के क़ासिम और अलवर के पहलू ख़ान की हत्या के मुख्य आरोपियों को अगर सौरव शुक्ला और अश्विनी मेहरा अपने कैमरे पर न पकड़ते तो इंसाफ मुमकिन नहीं था. अब भी पता नहीं कि इन आरोपियों पर दोष साबित करने के लिए पुलिस किस तरह से तथ्य जुटाएगी, कैसे चीज़ों को अदालत के सामने रखेगी, मगर इतनी बड़ी घटना जिस पर सबकी नज़र हो, उसमें भी आरोपी इतने आराम से पुलिस और समाज के सामने बेफिक्र हैं, इससे चिन्ता होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान ले लिया है.
  • तमिलनाडु की राजनीति का आज दूसरा युग समाप्त हो गया. डीएमके नेता एम करुणानिधि का देहांत हो गया. 94 साल के करुणानिधि 28 जुलाई से अस्पताल में भर्ती थे. तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि का लंबा दौर चला है. 5 दिसंबर 2016 को जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु की राजनीति अनिश्चतता से गुज़र रही थी. 5 बार मुख्यमंत्री रहे एम करुणानिधि के निधन ने राज्य की राजनीति का मैदान खुला छोड़ दिया है. जयललिता और करुणानिधि की राजनीति सिर्फ प्रतिस्पर्धा की राजनीति नहीं थी, दोनों ने विचारधारा के स्तर पर कई रेखाएं खीचीं हैं. आज स्क्रीन पर आप भले ही करुणानिधि के उदास और टूटे हुए समर्थकों को देख रहे हैं मगर इस शख्स ने तमिलनाडु का ग़ज़ब का इतिहास लिखा है. आप जानते है कि डीएमके की स्थापना अन्ना दुरई ने की थी. इस पार्टी में नौजवान नेता के रूप में एम करुणानिधि आए थे. इससे पहले वे पत्रकारिता में थे.
  • दोस्तों, मेरे पास कोई सचिवालय नहीं है. आए दिन लोगों के इतने मैसेज आते हैं कि सबको पढ़ना भी बस की बात नहीं रही. पढ़कर वादा करना भी मुश्किल है. तादाद इतनी है कि 90 फीसदी तो यूं ही पढ़कर डिलीट कर देने पड़ते हैं. कोई 10-20 नहीं, हर दिन 500 से 1,000 तक मुझे मैसेज आते हैं.
  • 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने विस्तार से एक खाका पेश किया कि भीड़ की हिंसा को रोकने के लिए पहले और बाद में पुलिस क्या क्या करेगी. वैसे तो पुलिस के पास पहले से भी पर्याप्त कानूनी अधिकार हैं लेकिन क्या ऐसा हो रहा है. हमारे सहयोगी सौरव शुक्ला और अश्विनी मेहरा ने भीड़ की हिंसा के कुछ आरोपियों से बात की है. पुलिस की किताब में उनकी भूमिका कुछ और है मगर वे खुफिया कैमरे पर अपनी भूमिका कुछ और बताते हैं.
  • क्या केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वह कह दिया, जो सब जानते हैं. उनका बयान आया कि आरक्षण लेकर क्या करोगे, सरकार के पास नौकरी तो है नहीं. बाद में नितिन गडकरी की सफाई आ गई कि सरकार आरक्षण का आधार जाति की जगह आर्थिक नहीं करने जा रही है, मगर इसी बयान का दूसरा हिस्सा भी था कि सरकार के पास नौकरी है नहीं.
  • सिनेमा हमेशा सिनेमा के टूल से नहीं बनता है. उसका टूल यानी फ़ॉर्मेट यानी औज़ार समय से भी तय होता है. व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए बनी इस फ़िल्म को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के चश्मे से मत देखिए.
  • दिल्ली को अब पता चला है, वैसे पूरा नहीं पता चला है, सुप्रीम कोर्ट को भी पता चल गया है और अदालत ने मामले का संज्ञान ले लिया है. बिहार के एक बालिका गृह के भीतर 44 में से 34 बच्चियों के साथ बलात्कार की पुष्टि की ख़बर को सिस्टम कैसे पचा सकता है और समाज कैसे डकार लेकर चुप रह सकता है इसे समझने के लिए नेता, नौकरशाही, न्यायपालिका और जाति के आधार पर गोलबंद ताकतवर लोगों के झुंड के भीतर झांक कर देखना होगा. बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के कहने पर ही मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस ने राज्य के कई सुधार गृहों का जायज़ा लिया और 27 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. 110 पेज की रिपोर्ट एक दो घंटे में पढ़ी जा सकती है मगर समाज कल्याण विभाग एक महीने तक हरकत में नहीं आया.
  • यह भाषण प्रधानमंत्री मोदी का है जो उन्होंने ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में दिया है. यह भाषण आपको बीजेपी की साइट और यू ट्यूब पर हर जगह मिल जाएगा. आप इसे सुनें तो पता चलेगा कि रोज़गार को लेकर प्रधानमंत्री क्या सोच रहे हैं? क्या भारतीय युवाओं को पता है कि रोज़गार को लेकर उनके प्रधानमंत्री क्या राय रखते हैं? परमानेंट रोज़गार की तैयारी में जवानी के पांच पांच साल हवन कर रहे हैं भारतीय युवाओं के बीच यह बात क्यों नहीं कही जा रही है कि रोज़गार का चेहरा बदल गया है. अब अस्थायी काम ही रोज़गार का नया चेहरा होगा.
  • पिछले दो दिनों से यूपी के बरेली के हाफिज़गंज कस्बे से लोग दनादन मैसेज कर रहे हैं कि हमारे इलाके की सड़क बेहद ख़राब है. हमारा कारोबार, जीवन सब कुछ तबाह हो गया है. नेशनल मीडिया यह सवाल क्यों नहीं उठाता है. बरेली के कुछ नौजवानों ने लिखा है कि यह गांव मेन हाईवे पीलीभीत बाईपास पर स्थित है. हमारे कस्बे की मेन रोड जिसकी तस्वीर हम अटैच कर रहे हैं, आप देख लीजिए. जून 2018 में विधायक जी ने रोड पास करवा कर शिलान्यास भी करवा दिया मगर फोटो देख लीजिए. कांवड़ियों के आने जाने का मार्ग भी यही है. पीलीभीत, नवाबगंज, खटीमा और टनकपुर के कांवड़िये इसी मार्ग से गुज़रते हैं. सर, शिव भक्त गंदे पानी और कीचड़ में से गुज़रते हैं. देखकर बुरा लगता है, पर हम जनता क्या कर सकते हैं. स्कूल के बच्चे रोज़ साफ सुथरे कपड़े पहनकर आते हैं लेकिन बेचारे रोज़ गंदे पानी से गुज़रते हैं, गिर जाते हैं और चोट लग जाती है.
  • रेलवे ख़ुद मानती है कि आठ लाख छात्रों के परीक्षा केंद्र पांच सौ किमी से दूर हैं. यह नहीं बताती कि पांच सौ से पंद्रह सौ या दो हज़ार किमी दूर हैं लेकिन प्रेस विज्ञप्ति में पांच सौ से ज़्यादा दूर लिख देने से दो हज़ार किमी की दूरी वाला भाव चला जाता है. जो रेल का परीक्षा से नहीं जुड़े हैं उन्हें झांसा तो मिल जाता है मगर जो परीक्षा दे रहे हैं उन्हें सच्चाई पता है.
  • भारत का वित्त मंत्री कौन है? इसका कोई एक जवाब नहीं हो सकता. इसका एक जवाब होता तो बिज़नेस स्टैंडर्ड में छपे विज्ञापन से साफ़ हो जाता लेकिन विज्ञापन देने वाले जूता चप्पल उद्योग संग (CFLA) को पता ही नहीं चला कि किसे वित्त मंत्री लिखें.
  • असम में 1951 में पहली बार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बना था. यह दूसरी बार है जब नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न बनाने का काम अंतिम चरण के करीब पहुंचा है. करीब का मतलब यह हुआ कि अभी सिर्फ ड्राफ्ट जारी हुआ है, अंतिम सूची 31 दिसंबर 2018 को आएगी.
  • ऑनलाइन का मतलब यही होता है कि आप अपने कंप्यूटर या फोन पर इंटरनेट के ज़रिए आचार-व्यवहार कर सकें. बिना घर से निकले सामान की खरीदारी कर सकें, बैंक का काम कर सकें और फार्म भर दें. भारत में बाज़ार में ऑनलाइन का कुछ और मतलब है और इम्तहान लेने वाली संस्थाओं के लिए ऑनलाइन का मतलब कुछ और है.
  • प्रधानमंत्री मोदी का बयान इस बात का क्लासिक उदाहरण है कि राजनीति में अब आरोप और जवाब दोनों ही पुराने हो चुके हैं. कोई आरोप लगाइये तो याद आता है कि पहले भी किसी पर लग चुका है, कोई जवाब दीजिए तो याद आता है कि पहले भी किसी ने ऐसा जवाब दिया है.
  • अगर आप पढ़ते लिखते हैं, सोचते विचारते हैं या आपके परिवार में कोई नौजवान पढ़ता लिखता है, दुनिया को देखने समझने के लिए अलग-अलग किताबें पढ़ता है, जिसे आस पास के लोग इंटेलेक्चुअल कहते हैं, तो थोड़ी सावधानी बरतने में कोई हर्ज नहीं है. कभी भी खुद को इंटेलेक्चुअल न कहें वर्ना अब ऐसा नेता हो गए हैं जिन्हें इंटेलेक्चुअल को गोली से मरवा देने का शौक चढ़ गया है. चुने हुए प्रतिनिधि बेलगाम होते जा रहे हैं. किसी को भी गोली मार देने की बात ऐसे कह रहे हैं जैसे कोई बादशाही हुक्म जारी किया जा रहा हो. कभी सेना को तो कभी आस्था को ढाल बनाकर ऐसी बातें कही जा रही हैं. हम ये कैसा भारत बना रहे हैं जहां विधायक बल्कि बीजेपी के विधायक कहते है कि मैं अगर गृहमंत्री होता तो सेना के ख़िलाफ बोलने वाले इंटेलेक्चुअल को गोली से उड़वा देता. क्या उन्हें नहीं पता कि सेना से रिटायर होने के बाद जनरल से लेकर ब्रिगेडियर और कर्नल तक सेना पर सवाल उठाते रहे हैं. ये कब से हो गया कि ऐसा करने पर गोली से उड़वा दिया जाएगा.
  • 9 अगस्त से रेलवे की परीक्षा शुरू हो रही है. अस्सिटेंट लोको पायलट और टेक्निशियन के 26,502 पदों के लिए परीक्षा हो रही है. इसमें 47 लाख से अधिक छात्र भाग लेंगे. रेल मंत्रालय की तरफ से दावा किया गया है कि रेलवे दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन परीक्षा कराने जा रहा है, क्योंकि इस परीक्षा में करीब एक लाख पदों के लिए दो करोड़ से अधिक छात्र हिस्सा लेंगे. यही हेडलाइन भी अख़बारों में छपता है ताकि फुल प्रोपेगैंडा हो सके.
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