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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक- The Free Voice, इश्क़ में शहर होना। हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान।

  • Huffington post के अक्षय देशमाने ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दावेदारी को लेकर एक लंबी स्टोरी की है. अक्षय ने लिखा है कि इस रपट के लिए उन्होंने बैठकों के मिनट्स के सैकड़ों पन्ने देख लिए हैं. कई प्रमुख लोगों से बात की है और सरकारी पत्रचार को भी देखा है तब जाकर यह रिपोर्ट की है. रिपोर्ट 20 नवंबर को छपी है.
  • गायों ने गांवों को बदल दिया है. गांवों में गायों के नाम बदल गए हैं. कोई उन्हें आवारा गायें कहता है, कोई गाय के साथ आतंक जोड़ता है. नौजवान गायों को देख कर मोदी जी, योगी जी और वसुंधरा जी भी कहने लगे हैं. ये देखो, मोदी जी योगी जी जा रहे हैं. गाय की राजनीति माता कहने से शुरू हुई थी, आवारा कहने पर आ गई है.
  • राज्यपाल जी ने आते ही मुझसे हाथ मिलाया और प्राइम टाइम के यूनिवर्सिटी सीरीज़ का ज़िक्र किया और कहा कि शुक्रिया आपका, आपकी वजह से मैंने बिहार में बहुत कोशिश की मगर तबादला हो गया. हम दोनों इस संक्षिप्त टिप्पणी के साथ अपनी अपनी कुर्सी पर बैठ गए.
  • मुंबई गया था तो शहर में नेटफ्लिक्स के ही होर्डिंग नज़र आ रहे थे. दिल्ली में ही मिर्जापुर के बड़े-बड़े पोस्टर लगे हुए हैं. इन्हें देखकर लगा कि विज्ञापन की नज़र से इस वक़्त नेटफ्लिक्स ही नेटफ्लिक्स है.
  • जब भी हम सुप्रीम कोर्ट के किसी फ़ैसले की बात करते हैं, बात करने वाले की ज़ुबान पर जज साहिबान की टिप्पणियां और बड़े-बड़े वकीलों की दलीलें होती हैं. पर कई बार हम उस याचिकाकर्ता को भूल जाते हैं जो होता तो बेहद साधारण है मगर अधिकारों के सवाल को लेकर राज्य, जिसे हम बार-बार सरकार कहते हैं उसे बदल देता है.
  • नौकरी की समस्या गंभीर होती जा रही है. भले ही बेरोज़गारी के बाद भी किसी के चुनाव जीतने या हारने पर असर न पड़े. मैं आपको अपना अनुभव बताता हूं. हर दिन नौजवान नौकरी को लेकर मैसेज करते हैं. उनके लिए कोई दूसरी प्राथमिकता नहीं है.
  • नहीं छपने से ख़बर मर नहीं जाती है. छप जाने से अमर भी नहीं हो जाती है. मरी हुई ख़बरें ज़िंदा हो जाती हैं. क्योंकि ख़बरें मैनेज होती हैं, मरती नहीं हैं. बस ऐसी ख़बरों को ज़िंदा होने के इंतज़ार में अपने किरदारों के आस-पास मंडराते रहना पड़ता है.
  • छत्तीसगढ़ के दूसरे चरण के मतदान में 562 मशीनों के खराब होने की खबर छपी है. जिन्हें 15-20 मिनट में बदल देने का दावा किया गया है. चुनाव से पहले मशीनों की बाकायदा चेकिंग होती है फिर भी इस तादाद में होने वाली गड़बड़ियां आयोग के पेशेवर होने को संदिग्ध करती है. क्या लोगों की कमी है या फिर कोई अन्य बात है.
  • चूंकि मैं न्यूज़ की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल नहीं रहता, इसलिए नहीं कह सकता कि इन तमाम सूचनाओं का क्या होता होगा. TV पर सब लगाना संभव भी नहीं है. फिर भी एक रिपोर्टर सूचनाएं भेजता ही रहता है. छपें, चाहे गुम हो जाएं. कल रात से सोमेश पटेल की भेजी हुई सूचनाएं पढ़ रहा हूं. उन्हें एक नज़र में देखने से ग़ज़ब किस्म का चुनावी पाठ उभरता है, इसलिए सोचा कि इन्हें यहां दर्ज करता हूं.
  • चुनावी भाषणों और चर्चाओं में शिक्षा को जगह क्यों नहीं मिलती है? जिस मुद्दे से ज़्यादातर नौजवानों की ज़िंदगी प्रभावित होती है, वह किसी सरकार के मूल्यांकन का आधार क्यों नहीं बनता है. आज इंजीनियरिंग की पढ़ाई चरमरा गई है. 2017 में एक ख़बर पढ़ी थी कि भारत में 800 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो गए हैं. 8 अप्रैल को टाइम्स ऑफ इंडिया में मानस प्रतिम ने लिखा था कि AICTE से 200 इंजीनियरिंग कॉलेजों ने बंद होने की अनुमति मांगी है. यही नहीं हर साल 50 फीसदी से अधिक सीटें खाली रह जा रही हैं.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्री पर कई करोड़ के रिश्वत लेने का आरोप लगा है. यह आरोप किसी राह चलते ने नहीं बल्कि सीबीआई के डीआईजी ने बाक़ायदा लिखकर सुप्रीम कोर्ट में जमाकर लगाया है.
  • आज मैंने भाषण का तरीका बदल दिया है. मैंने अलग-अलग फार्मेट में भाषण दिए हैं लेकिन आज मैं वो करने जा रहा हूं जो कांग्रेस के नेता पिछले सत्तर साल में नहीं कर सके. मैंने रटा-रटाया भाषण छोड़कर कुछ नया करने का फैसला किया है. मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि यह भाषण रवीश कुमार ने लिखा है, लेकिन दोस्तो, भाषण कोई भी लिखे, अगर वह राष्ट्रहित में है. पर मैंने भी कह दिया कि मैं पढूंगा वही जो सरकारी दस्तावेज़ पर आधारित होता है.
  • आज कल हर दिन कोई न कोई दिवस यानी डे आ जाता है. एक डे जाता नहीं कि दूसरा डे आ जाता है. हर डे की अपनी प्रतिज्ञा होती है और न भूलने की कसमें होती हैं, मगर ये उसी दिन तक के लिए वैलिड होती है. अगले दिन दूसरा डे आता है, पोस्टर बैनर सब बदल जाता है. नए सिरे से प्रतिज्ञा लेनी पड़ती है कि हम इनके आदर्शों को नहीं भूलेंगे. भूल जाते हैं कि पिछले दिन ऐसी ही एक प्रतिज्ञा ले चुके हैं.
  • छत्तीसगढ़ के चुनावों में चार-चार मोर्चा है. एक मोर्चा है रमन सिंह का जो 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, चौथी बार बनना चाहते हैं. कांग्रेस पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. अजित जोगी की जनता कांग्रेस और मायावती की बसपा का तीसरा मोर्चा है. चौथा मोर्चा है समाजवादी पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी.
  • घोषणापत्र देखकर भले जनता वोट न करती हो मगर चुनावों के समय इसे ठीक से देखा जाना चाहिए. दो चार बड़ी हेडलाइन खोजकर हम लोग भी घोषणापत्र को किनारे लगा देते हैं. राजनीतिक दल कुछ तो समय लगाते होंगे, बात-विचार करते होंगे कि क्या इसमें रखा जा रहा है और क्या इससे निकाला जा रहा है, इसी को समझकर चुनावी चर्चाओं में घोषणापत्र को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
  • रफाल विमान सौदा सिर्फ सरकार के लिए ही टेस्ट नहीं है, बल्कि मीडिया के लिए भी परीक्षा है. आप दर्शक मीडिया की भूमिका को लेकर कई सवाल करते भी रहते हैं. यह बहुत अच्छा है कि आप मीडिया और गोदी मीडिया के फर्क को समझ रहे हैं. हम सबको परख रहे हैं.
  • हमने पिछले कई सालों में किसानों के कई आंदोलन देखे. 29-30 इस आंदोलन के केंद्र में दो मुद्दे प्रमुख रूप से रहे. फसलों का सही दाम दिया जाए और फसल बिकने की व्यवस्था सही की जाए. मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को अपने वादे के हिसाब से लागत से डेढ़ गुना देने का दावा करती है लेकिन तथ्य कुछ दूसरे भी होते हैं.
  • भारत कैंसर से लड़ने के लिए कितना तैयार है? महानगरों को छोड़ राज्यों की राजधानियों और कस्बों में कैंसर से लड़ाई की हमारी तैयारी क्या है? गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर कैंसर से जूझ रहे हैं. विदेशों में भी इलाज के लिए गए और फिर वापस आकर एम्स में भी इलाज करवाया.
  • 2014 के घोषणापत्र में बीजेपी ने नई शिक्षा नीति का वादा किया था. इंटरनेट पर सर्च कीजिए, वो नई शिक्षा नीति कहां है, अता-पता नहीं चलेगा. हमने अख़बारों में छपे इस संदर्भ में उनके बयानों का विश्लेषण किया है और साथ ही उनके ट्विटर हैंडल के ट्वीटस और री-ट्वीट्स का जिससे हम देख सकें कि प्रकाश जावड़ेकर देश की शिक्षा को लेकर कितने ट्वीट करते हैं और बीजेपी को लेकर कितने.
  • राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.
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