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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

  • वैसे आम वाले सवाल ने प्रसून जोशी के उस सवाल को तगड़ा कंपटीशन दिया है. प्रसून जोशी ने कहा था कि आपमें फकीरी कहां से आती है. अक्षय कुमार को पता था कि वे फकीर का नहीं, प्रधानमंत्री का इंटरव्यू करने आ रहे हैं. एक व्यक्ति का इंटरव्यू करने जा रहे हैं. फिर भी देखना चाहिए कि प्रसून जोशी और अक्षय कुमार के सवालों में क्या अंतर है. किसके सवाल ज़्यादा राजनीतिक हैं किसके ज्यादा आध्यात्मिक हैं. ये आप तय करेंगे. प्रसून ने मोदी मे फकीरी देखा तो अक्षय उनमें सैनिक और सन्यासी देखकर कंफ्यूज हो गए.
  • दो साल पहले जब मैंने प्राइवेट स्कूलों की लूट पर लगातार कई दिनों तक प्राइम टाइम किया था तब लोगों ने रास्ते में रोक कर कहा कि आप मोदी विरोध में ऐसा कर रहे हैं. मुझे समझ नहीं आया कि स्कूलों के इस लूट सिस्टम पर रिपोर्ट करने का संबंध मोदी विरोध से कैसे है.
  • भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर ने भले ही अपने बयान से किनारा कर लिया लेकिन हेमंत करकरे के बारे में उनके बयान का असर गया नहीं है. प्रज्ञा ठाकुर भले ही इस बयान को छोड़ अपने राजनीतिक प्रचार में आगे निकल गईं हैं मगर उनके बयान हेमंत करकरे के साथ काम करने वाले पुलिस अफसरों की अंतरात्मा को चुनौती दे रहे हैं.
  • भारत के लाखों स्कूलों में न्यूक्लियर बम की विनाशलीला के बारे में बताया गया होगा. न्यूक्लियर बम बच्चों का खिलौना नहीं है. इसने लाखों लोगों की जान ली है. पीढ़ियां नष्ट की है. दुनिया भर में यही सीखाया जाता है कि न्यूक्लियर बम धरती पर इंसान के वजूद को मिटा देने का बम है. विज्ञान का अभिशाप है.
  • चुनाव में भाग लेने के साथ-साथ उसे समझने की प्रक्रिया भी चलती रहनी चाहिए. हमारा सारा ध्यान सरकार बदलने और बनवाने पर रहता है लेकिन थोड़ा सा ध्यान हमें उन कारणों पर भी देना चाहिए जो राजनीति को तय करते हैं. जिनके कारण राजनीतिक बदलाव असंभव सा हो गया है.
  • अमेरिका में पिछले पांच साल में निजी मुनाफे पर चलने वाले 1200 कॉलेज बंद हो गए हैं. हर महीने 20 कालेज बंद होने का औसत निकलता है. निजी मुनाफे के लिए खुले कॉलेजों में छात्रों का एडमिशन घटता जा रहा है. 2014 में जितना था उसका अब आधा हो गया है. यह होना था, इसकी वजह है. मुनाफे के लिए खोले गए इन निजी कालेजों का प्रदर्शन बहुत ख़राब हो रहा था.
  • उत्तर प्रदेश में 73 सीटों में से एक कम नहीं होगा. 72 की जगह 74 हो सकता है. यह बयान अमित शाह का है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का इंडियन एक्सप्रेस में लंबा इंटरव्यू छपा है. उनके इस दावे से यही निष्कर्ष लगता है कि बसपा और सपा का गठबंधन समाप्त हो चुका है. इस बार फिर बसपा को शून्य आने वाला है और सपा अपने परिवार के नेताओं को ही जिता सकेगी.
  • कचरे के बीच कॉलोनी है या कॉलोनी के बीच कचरा, हवा में दुर्गंध इतनी तेज़ है कि बगैर रूमाल के सांस नहीं ले सकते. मक्खियां और मच्छर इस कदर भिनभिना रहे हैं कि मुंह खुलते ही उनके भीतर जाने का ख़तरा है. ज़मीन पर नालियों का पानी और कीचड़ फैला है. अपने साफ-सुथरे जूते को रखें तो रखें कहां? यह बाहर से भीतर आए मेरा नज़रिया था. भीतर रहने वालों ने इसे अलग से देखना कब का बंद कर दिया है. उन्हें पता है कि नालियों और मच्छरों के बिना नहीं बल्कि इनके साथ जीना है.
  • आप सभी 18 अप्रैल के चुनाव आयोग की प्रेस कांफ्रेंस का वीडियो देखिए. यह वीडियो आयोग के पतन का दस्तावेज़ (document of decline) है. जिस वक्त आयोग का सूरज डूबता नज़र आ रहा था उसी वक्त एक आयुक्त के हाथ की उंगलियों में पन्ना और माणिक की अंगूठियां चमक रही थीं.
  • क्या ऐसा कोई कानून है कि चुनाव की ड्यूटी पर तैनात अधिकारी प्रधानमंत्री के काफिले की गाड़ी चेक नहीं कर सकता है? अगर ऐसा कोई कानून है तो चुनाव आयोग को पब्लिक को इसके बारे में बताना चाहिए. और अगर किसी अधिकारी ने हेलिकाप्टर की जांच कर दी तो क्या यह इस हद तक का अपराध है कि उस अधिकारी को निलंबित कर दिया जाए.
  • प्रधानमंत्री अपने इंटरव्यू में साफ़ साफ़ की जगह तथ्यों को यहां-वहां से मिला जुलाकर बोलते हैं. उनके हर बयान की जांच करेंगे तो महीना गुज़र जाएगा.
  • बताया कि ये पर्ची पांच साल तक नहीं मिटेगी. बेहतर है इसे गिना जाना चाहिए. वीवीपैट के अपने खर्चे भी हैं. इसका इस्तेमाल करने पर मतगणना की रफ्तार भी धीमी होती है. फिर बैलेट पेपर ही क्यों नहीं?
  • अगर मीडिया रिपोर्ट सही है, उनसे नौजवानों ने यही कहा है तो फिर नरेंद्र मोदी का यह कमाल ही माना जाएगा कि उन्होंने बेरोज़गारों के बीच ही बेरोज़गारी का मुद्दा ख़त्म कर दिया.
  • दिल्ली से जाने वाले पत्रकार लोगों के बीच मोदी-मोदी की गूंज को खोज रहे हैं. 2014 में माइक निकालते ही आवाज़ आने लगती थी मोदी-मोदी. 2019 में पब्लिक के बीच माइक निकालने पर आवाज़ ही नहीं आती है.
  • बिहार का बेगूसराय इन दिनों तरह-तरह के सराय में बदल गया है. सराय का मतलब होता तो लंबे सफर का छोटा सा ठिकाना, जहां यात्रि अंधेरे होने पर सुस्साते हैं और अगली सुबह अपनी यात्रा पर निकल पड़ते हैं. दिल्ली में एक है जुलैना सराय. यूसुफ सराय. बिहार में सबसे अधिक राजस्व देने वाला ज़िला बेगूसराय के एक गांव का लड़का जेएनयू गया था रिसर्च करने. आज उसने बेगूसराय से सीपीआई के उम्मीदवार के नाते पर्चा भर दिया.
  • 11 अप्रैल को पहला मतदान है. मतदान से ठीक तीन दिन पहले भाजपा का घोषणापत्र आया है. 2014 और 2019 के घोषणापत्र के कवर को ही देखें तो बीजेपी या तो बदल गई है या फिर बीजेपी में सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी रह गए हैं. 2014 में कवर पर 11 नेता थे. इनमें से अटल बिहारी वाजपेयी और मनोहर पर्रिकर अब दुनिया में नहीं हैं. आडवाणी और मुरली मनोहन जोशी को टिकट नहीं मिला है.
  • स्थानीय लोगों ने इस अमरीकी कंपनी के खिलाफ मुकदमा कर दिया है. उनका कहना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट आउटडेटेड हो गए हैं. हमें सोचना होगा कि कम प्रदूषण के साथ समाज को कैसे जीने के लिए बेहतर बनाया जा सके. अमेजन कंपनी के खिलाफ खूब प्रदर्शन हो रहे हैं. एक मांग यह भी है कि इन कंपनियों को टैक्स में बहुत छूट मिलती है जबकि इन्हीं के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों को सारे टैक्स देने पड़ते हैं. दिन भर मज़दूरी करने वाला, कम कमाने वाला ज़्यादा टैक्स देता है, कंपनी को कम से कम देना पड़ता है. ऐसा कैसे हो सकता है.
  • गुजरात इंफ़ैंट्री रेजीमेंट. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों समाजवादी पार्टी का घोषणापत्र पढ़कर चौंक गए होंगे. दोनों भाजपाई सोच रहे होंगे कि ये सपाई क्यों उनके राज्य के नाम पर रेजीमेंट बना रहा है? बनाना था तो गुजरात बख़्तरबंद रेजीमेंट बनाते और अहीर इंफ़ैंट्री रेजीमेंट!
  • इंडियन एक्सप्रेस की खुशबू नारायण की एक रिपोर्ट आई कि नोटबंदी वाले साल में 88 लाख करदाता टैक्स रिटर्न नहीं भर पाए. क्यों नहीं रिटर्न भर पाए क्योंकि नोटबंदी के बाद आर्थिक गतिविधियां ठहर गईं और लोगों की नौकरी चली गई. आमदनी घट गई. उसी वक्त ये आंकड़ा आता तो इन 88 लाख लोगों को सम्मानित किया जाता.
  • कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में ऐसा क्या कह दिया कि बीजेपी को लगता है कि इसमें देश तोड़ने का काम है. घोषणा पत्र के पहले दिन अरुण जेटली ने जब सवाल किया तो उनका फोकस इन्हीं बातों पर था. बीजेपी ने अपने प्रचार में इसी पर ज़ोर दिया है. 4 अप्रैल को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन्हीं बातों पर प्रेस कांफ्रेंस की. पहले देख लेते हैं कि कांग्रेस ने सुरक्षा के सवाल पर क्या कहा है. पेज नंबर 41 पर कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर को लेकर कहा है कि भारत के अनुच्छेद 370 को शामिल गया गया है. इस संवैधानिक स्थिति को बदलने की न तो अनुमति दी जाएगी और न ही ऐसा कुछ प्रयास किया जाएगा. ज़रूर शुरुआत से बीजेपी और आरएसएस का यह एजेंडा रहा है कि अनुच्छेद 370 बदल देंगे. वाजपेयी सरकार और मोदी सरकार यानी दो सरकारें अपना पूरा कार्यकाल करने के बाद भी क्या आपको याद है कि इसे हटाने को लेकर कोई ठोस पहल हुआ है.
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