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रवीश रंजन शुक्ला

बीते दस साल से दिल्ली की पत्रकारिता में सक्रिय हैं. दिल्ली सरकार, बीजेपी, कांग्रेस और क्राइम जैसी बीट कवर करते रहे हैं. इससे पहले पंजाब, राजस्थान और उप्र में भी अमर उजाला, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और ईटीवी उप्र में काम कर चुके हैं. सामाजिक और ग्रामीण मुद्दों पर रिपोर्टिंग करना ज्यादा पसंद हैं. अन्तराष्ट्रीय मुद्दों पर ब्लॉग लिखने में दिलचस्पी है...

  • मेहरौली में अतिक्रमण हटाने की खबर के दौरान अचानक पीछे से अवाज आई रवीश जी क्या हाल है?  मैं घूमा तो तीन लड़के खड़े थे उन्हीं में से एक ने पुकारा था. मैंने सोचा कि एनडीटीवी के दर्शक होंगे इसलिए मुझे पहचान गए हैं, लेकिन चश्मा लगा रखे एक दरम्याने कद के लड़के ने आगे बढ़कर मेरी ओर हाथ बढ़ाते कहा आपने मुझे पहचाना? मैंने कहा नहीं. वो बोला मैं आपका ट्रोल हूं.
  • राहत इंदौरी का शेर है - 'चराग़ों को उछाला जा रहा है, हवा पर रौब डाला जा रहा है... न हार अपनी न अपनी जीत होगी, मगर सिक्का उछाला जा रहा है ...'
  • 1960 के बारे में बहुत सारे लोगों को ज्यादा पता नहीं है लेकिन ये आदर्शवादी विचारधारा का आदर्श दौर था. इस दौर में अन्याय का विरोध रोमांचक तरीके से युवाओं ने किया. ये कहना प्रसिद्ध इतिहासकार दिलीप सिमियन का है. 1968 के पचास साल पूरा होने पर इतिहासकार दिलीप सिमियन जनज्वार वेबसाइट के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे
  • इस बार एक हजार UPSC की सीटों पर हिन्दी माध्यम से परीक्षा देने वाले केवल 42 परीक्षार्थी ही सफल हो पाए...जबकि पिछली बार UPSC की परीक्षा में हिन्दी माध्यम का 41 वां स्थान था...
  • देश के सबसे बेहतरीन तकनीकी संस्थानों में से एक आईआईटी कानपुर अपने 22 मेधावी छात्रों को रैगिंग में शामिल होने के आरोप में एक से तीन साल तक के लिए निष्कासित कर देता है. हैरानी की बात तो ये है कि इन मेधावी छात्रों पर रैगिंग का आरोप लगाकर इनको सजा सुना दी गई, लेकिन आईआईटी प्रशासन अपने भीतर की लापरवाहियों को नहीं देखना चाहता है.
  • राजनीति ने हमेशा जिद्द और अकड़ को वक्त-वक्त पर तोड़ा है - भले ही वह किसी भी पार्टी की हो या किसी भी नेता की... लेकिन मां-बेटे की राजनीतिक नैया आरोपों की उफनती नदी में हर लहर के साथ डगमगा रही है, और वक्त के साथ अब यह किश्ती किसी किनारे लग पाएगी, या हिचकोले खाकर बह जाएगी, इसकी गवाही आने वाला वक्त ही देगा...
  • शनिवार को जब उन्हें मंत्री पद से हटाया गया उससे पहले उन्हें आभास हो गया था कि उनका मंत्री पद जाने वाला है. सुबह मैसेज आया कि टैंकर घोटाले पर उन्होंने पत्र लिखकर शीला दीक्षित पर कार्रवाई करने की मांग की है.
  • एक से तीन अप्रैल के बीच जब मीडिया और कार्यकर्ता उम्मीदवारों की लिस्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे तब बीजेपी के वरिष्ठ नेता रामलाल के घर पर सांसदों के साथ मनोज तिवारी की बैठक चल रही थी. हर वार्ड से आए तीन नामों पर चर्चा चल रही थी लेकिन हर सांसद के हाथ में उनके चहेतों की लिस्ट भी थी. खुद मनोज तिवारी भी अपने समर्थकों को खासतौर पर पूर्वांचल के लोगों को ज्यादा से ज्यादा टिकट दिलाना चाहते थे. इसी बीच प्रवेश वर्मा टिकटों के बंटवारे से नाराज दिखे. कहा कि अगर मेरा ये उम्मीदवार नहीं जीता तो मैं इस्तीफा दे दूंगा..इसके जवाब में मनोज तिवारी ने कहा कि आप इस्तीफा क्यों देंगे..जब प्रदेश अध्यक्ष मैं हूं तो...इसी तरह दक्षिणी दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी की रामलाल से बहस हुई..पूर्वी दिल्ली के सांसद गिरी ने तो ये तक कह दिया गया कि जिस वार्ड में रहता हूं उसके उम्मीदवार को मैं टिकट नहीं दिला पा रहा हूं तो मेरे सांसद रहने का क्या मतलब है..
  • एमसीडी में भ्रष्टाचार हो सकता है इसमें कोई दो राय नहीं है. पेंशन घोटाला, टोल टैक्स में घोटाला जैसी कई खबर इस पर हुई भी है. लेकिन अभी दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर एमसीडी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्हें लगाना भी चाहिए लोकतंत्र में राजनीतिक पार्टियों को पूरे तथ्य के आधार पर सरकारी संस्थाओं और सरकार की कमी बताने और इसका सियासी फायदा उठाने में कोई हर्ज नहीं है. लेकिन अगर दिल्ली सरकार पर आई ऑडिट रिपोर्ट पर कार्रवाई करके फिर मंत्री जी एमसीडी की लानत मलानत करते तो एक नज़ीर बनाते लेकिन अभी मेरे सामने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ऑडिट रिपोर्ट आई जिसका ऑडिट खुद दिल्ली ऑडिट विभाग ने किया है. भाई उस पर आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
  • सही मायने में अगर उत्तर प्रदेश की प्राइमरी शिक्षा को सुधारना है, तो नई शिक्षा नीति में शिक्षकों की राजनीतिक दखलअंदाजी को सीमित किया जाए। शिक्षकों को सीधे बच्चों और उनके अभिभावकों के प्रति जवाबदेह बनाया जाए। शिक्षा विभाग का मर्ज गंभीर है, मुख्यमंत्री जी, आपको कड़वी दवा पिलानी ही होगी।
  • नब्बे की दहाई में डॉ. नागेंद्र की मुलाकात पीएम नरेंद्र मोदी से हुई। योग के बारे में उनकी छोटी-सी चर्चा हुई। इसके बाद नरेंद्र मोदी लगातार डॉ. एचआर नागेंद्र से मिलते और योग के बारे में उनसे सलाह लेते रहते।
  • मुबारकबाद देना चाहता हूं ऐसे सलाहकार साहब को। आप इसी तरह हर सवाल से उबलते रहें...मंत्री को सवाल टालने की ट्रेनिंग देते रहें, भुनभुनाते रहें, सवालों का जरिया बनने वालों का लिस्ट से नाम काटते रहें...
  • इलाहाबाद में ठंड की वो धुंधभरी शाम थी, जब हम साहित्यिक पत्रिका में एक लेख पढ़कर तेलियरगंज के उनके डुप्लेक्स में मिलने चल गए थे।
  • लेखक का औसत दर्जे के किसान परिवार से ताल्लुक होने के कारण खेत, खलिहान और पशुओं से स्वाभाविक रिश्ता है। पिछले छह महीने से गोरक्षा और गोहत्या जैसी कई बहस और गाय पर हो रही राजनीति से अलग हमें लगा कि बदलते जमाने के हिसाब से गाय को देखने का नजरिया भी बदला जाए।
  • आठ साल पहले जिस कोल्हुवा के जंगल में ददुआ को एसटीएफ ने मार गिराया था उसी जंगल में बुंदेलखंड पैकेज को हम खोजने निकले। बुंदेलखंड के किसानों को आत्महत्या और सूखे से बचाने के लिए केंद्र सरकार 7266 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिलों को दिया।
  • सबसे ज्यादा कर्जे में डूबे जलालपुरा गांव जाते वक्त बाम्हौर गांव के नजदीक तीन बुजुर्ग किसान भाई मिले। उनकी उड़द की फसल सूख चुकी थी। तीनों के हाथों में फटा छाता और एक बुजुर्ग के शरीर पर कपड़े तक नहीं थे।
  • दिल्ली में बड़े दिनों बाद आई बारिश ने नौ पेड़ों को ज़मींदोज कर दिया। जिसमें एक राहगीर की मौत हो गई, वहीं तीन खुशकिस्मत रहे। बारिश ने दिल्ली को शंघाई बनाने वालों को पहले धोया, पोंछा और फिर टांग दिया, नेताओं की इन घोषणाओं को अगले साल के मानसून तक सूखने के लिए।
  • पूरी दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले नागरिकों के चरित्र से आप उस देश की राजनीतिक और समाजिक पृष्ठभूमि का अंदाजा लगा सकते हैं।
  • दिल्ली से करीब 65 किलोमीटर दूर पापरा गांव की नींद 42 साल बाद टूटी है। धूल उड़ाती मीडिया की बड़ी गाड़ी और कैमरे के लेंस शायद इतनी बड़ी तादाद में 42 साल बाद ही यहां दिखे हैं।

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