NDTV Khabar

  • शुक्रवार 10 अगस्त को मुंबई में जो हुआ वो मुंबई में बहुत कम होता है. अपनी व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता के चलते पत्रकारों में एक राय कम ही बन पाती है जिसका फायदा नेता और पुलिस अक्सर उठाते हैं. लेकिन महाराष्ट्र एटीएस के बेरुखी भरे रवैये ने शुक्रवार को एटीएस प्रमुख अतुल चंद्र कुलकर्णी की प्रेस ब्रीफिंग का बहिष्कार करने को मजबूर कर दिया.
  • मीडिया से फ़ोन पर डॉन के कबूलनामे को मकोका जज ने भरोसेमंद मान छोटा राजन को दोषी करार दिया. जैसा फिल्मों में होता है वैसा उस दिन भी हुआ था. बस इस फिल्म का आखरी सीन एक जज ने लिख़ा. तारीख 1 जुलाई 2011 और वक़्त रात के 9 बजे का था. घर जाने की जल्दी उस दिन खत्म हो गयी थी, क्योंकि पहले से ही नीरज ग्रोवर हत्याकांड पर स्टोरी लिखना जारी था.
  • रेल प्रशासन यहां की बढ़ती भीड़ और होने वाली अनहोनी की आशंका से भली-भांति परिचित था. लेकिन उसे पुल बनाने के लिए जितनी तेजी दिखानी चाहिए थी, उतनी तेजी नहीं दिखाई.
  • मालेगांव 2006 बम धमाकों के सभी मुजरिमों को एनआईए की विशेष अदालत ने आरोप मुक्त कर दिया। मतलब यह कि अदालत को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने लायक भी सबूत नहीं मिले। इसलिए अदालत ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि चूंकि युवकों की पृष्ठभूमि अपराधिक रही है इसलिए उन्हें बलि का बकरा बनाया गया।
  • शीना बोरा हत्याकांड जितना रिश्तों के पेंच में उलझा है, उसकी जांच में मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया की दिलचस्पी भी उतना ही हैरान करने वाली है।
  • नागपुर के सीताबर्डी में स्थित द्वारका होटल में याकूब के बडे भाई सुलेमान अपने कमरे में थे। तभी रात 2 बजकर 10 मिनट पर एक सिपाही होटल पहुंचा। मैनेजर के साथ वो सुलेमान के कमरे मे गया। सुलेमान जागे हुये थे। टीवी पर समाचार चल रहा था।

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