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  • चूंकि क्रिकेट समूचे देश में जुनून की तरह छाया रहता है, सो, सौरव गांगुली और उनकी टीम पर बेहद बारीक नज़र रखी जाएगी, और अगर सौरव BCCI में प्रभावी और साफ-सुथरा प्रशासन दे पाते हैं, तो उनकी साख बहुत बढ़ेगी. BCCI ने हमेशा से पारदर्शिता को रोकने की कोशिश की है, सो, गांगुली का आकलन इसी आधार पर होगा कि वह स्थिति बदल पाती है या नहीं.
  • केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने खुद को नरेंद्र मोदी सरकार में 'सर्वश्रेष्ठ शिकारी' के रूप में ढाल लिया है. वह नपे-तुले अंतराल पर पाकिस्तान के खिलाफ आग उगलते, उसे चेताते सुनाई देते हैं. कभी वह पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर दावा करते हैं, कभी वह चेतावनी देते सुनाई देते हैं कि भारत परमाणु हथियारों के 'पहले इस्तेमाल नहीं' की नीति से बंधा हुआ नहीं है.
  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम आने के बाद एनसीपी के मुखिया शरद पवार (79) ने करामात दिखाते हुए बीजेपी को मात दे दी है. पवार जो कि जो राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं जिन्होंने अनुभव और संपर्कों के दम पर खुद को मजबूत किया है. 
  • कांग्रेस के मौजूदा हालात में यह टोटका सरीखा लगता है कि पार्टी ने आज की बैठक ऐसे एजेंडे के साथ की, जिससे न सिर्फ उसके प्रतिद्वंद्वी चकरा जाएंगे, बल्कि उसके अपने नेता भी. इससे पहले, कभी भी पार्टी अपनी या देश की ज़रूरतों को लेकर इतनी कटी-कटी कभी महसूस नहीं हुई थी.
  • एक वक्त था, जब कांग्रेस के लिए सब कुछ ठीक चल रहा था. वे बड़े परिवारों (उनमें से एक तो पूर्व राजपरिवार का सदस्य है) के उत्तराधिकारियों के रूप में चांदी का चम्मच लिए पैदा हुए थे, उनकी जमकर खातिर की गई, उनकी सुनी गई, और प्रशासन का तजुर्बा दिलवाने के लिए उन्हें राज्यमंत्री भी बनाया गया. अब माहौल बहुत बदल गया है. उम्र के पांचवें दशक में कदम रख चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद तथा दीपेंद्र हुड्डा 'पीटर पैन सिन्ड्रोम' से पीड़ित हैं, और सुधार के लिए संघर्षरत दिख रहे हैं.
  • एयर इंडिया की बिक्री के फैसले से लेकर अनुच्छेद 370 (जम्मू एवं कश्मीर का विशेष दर्जा) खत्म करने और आरिफ मोहम्मद खान को केरल का राज्यपाल बनाने तक गृहमंत्री अमित शाह ही हैं, जो मोदी 2.0 को लक्ष्यों को अमली जामा पहना रहे हैं.
  • 15 अगस्त को RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दुर्लभ तरीके से बेहद उदार शब्दों में अनुच्छेद 370 को हटाकर कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के लिए प्रधानमंत्री की सार्वजनिक रूप से सराहना की. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनावी नारे का इस्तेमाल करते हुए RSS के सरसंघचालक ने कहा, "अनुच्छेद 370 इसलिए गया, क्योंकि मोदी है, तो मुमकिन है..."
  • यदि भारत में कोई अभी भी नतीजों में रुचि रखता है, तो कांग्रेस अंततः आने वाले शनिवार को यह तय कर सकती है कि उसका अगला अध्यक्ष कौन होगा जो कि राहुल गांधी की जगह लेगा. राहुल गांधी लगभग तीन महीने पहले पद छोड़ चुके हैं.
  • आपकी नजर में राहुल गांधी जैसे अध्‍यक्ष का विकल्‍प कौन होगा? अगर आप किसी ऐसी पार्टी के सदस्‍य हैं जिसपर वंशवाद हावी रहा है या जिसे कांग्रेस के नाम से जाना जाता है, तो एक मात्र विकल्‍प होंगी उनकी बहन, प्रियंका गांधी. कांग्रेस में पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह जैसे कामयाब जननेता इन दिनों विरले ही देखने को मिलते हैं. अब उन्‍होंने भी प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी अध्‍यक्ष बनाए जाने की शशि थरूर की मांग का समर्थन कर दिया है.
  • तीन बार कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री बने येदियुरप्‍पा कभी भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. आखिरी बार साल 2018 में केवल दो दिन के लिए मुख्‍यमंत्री बने येदियुरप्‍पा अपनी चौथी पारी में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते. येद्दी के नाम से मशहूर येदियुरप्‍पा ने शुक्रवार को अकेले शपथ ली.
  • कांग्रेस के सामने इस समय बहुत बड़ा संकट मौजूद है - राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी का स्थान कौन लेगा - सो, उसके पास अपनी गिनी-चुनी सरकारों में से एक के गिर जाने के बारे में गंभीरता से सोचने का वक्त तक नहीं है. कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व का कर्नाटक इकाई को भेजा गया संदेश है - हमें परवाह नहीं, अगर आपकी सरकार गिर जाती है, क्योंकि जब तक हम शीर्षहीन हैं, हम राहुल गांधी की टाल-मटोल की नीति का ही पालन करते रहेंगे.
  • कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार को "संकट मोचन" कहते हैं. और, आज कर्नाटक के यह दिग्गज नेता मुंबई के रेनिसेंस होटल के बाहर पार्टी के एक मात्र व्यक्ति के रूप में दिखाई दिए. वे उन बागी विधायकों से मिलने के लिए बारिश में घंटों इंतजार करते रहे जिनके इस्तीफे से कर्नाटक सरकार गिरने की स्थिति में आ चुकी है.
  • एक ओर राहुल गांधी ने जहां अपने फैसलों पर अडिग रहकर राजनीति में अपनी विश्‍वसनीयता को बनाए रखा, तो वहीं दूसरी ओर उनके इस दृढ़ निश्‍चय ने उनकी ही पार्टी की 'दयनीय' हालत की तरफ सबका ध्‍यान खींचा है.
  • अगर राहुल पद छोड़ने के प्रति गंभीर हैं तो उन्हें अब एक काम करने की जरूरत है कि वह रास्ता साफ करें और एक नेता को आगे लाएं जो कमियों को दूर करके जल्दी से आगे बढ़ सकता है.
  • अगले माह अपना 49वां जन्मदिन मनाने से पहले आम चुनाव में बीजेपी के हाथों धूल चाटने की पीड़ा झेल रहे राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ने के अपने उस फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार नहीं हैं जिसके बारे में उन्होंने शनिवार को पार्टी को अवगत कराया था.
  • विपक्ष की राजनीति के इस दौर में नए साझीदार तलाशने के लिए उठाया गया यह पहला कदम है, और काफी अहम है, क्योंकि हाल ही में दक्षिण भारत की राजनीति के मज़बूत चेहरे और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन से मुलाकात की, ताकि यह चर्चा की जा सके कि एक हफ्ते में ही घोषित होने जा रहे चुनाव परिणाम के बाद कौन किसके साथ गठबंधन करेगा. बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती जैसे अन्य विपक्षी नेताओं ने तो देश के प्रशासन के शीर्ष पद पर विराजने की अपनी महत्वाकांक्षाओं को ज़ाहिर करने में कतई संकोच भी नहीं किया है.
  • 68 वर्षीय नीतीश कुमार को लगातार साझीदार बदलते रहने की वजह से भारतीय राजनीति में बेहद कमतर माना जाने लगा है. भले ही वो अब भी बिहार के मुख्‍यमंत्री हों लेकिन पिछले महीने के आखिर में पीएम मोदी के साथ एक ही मंच पर उनके बुझे हुए चेहरे ने उनकी दशा जाहिर कर दी.
  • हो सकता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके राजनीतिक बयान आमतौर पर उल्टे न पड़ते हों लेकिन एक पासा उल्टा पड़ ही गया.  उन्होंने बयान दिया कि मायावती को कांग्रेस और उनके साथ गठबंधन कर चुके अखिलेश यादव आपस में साठगांठ करके उनको धोखा दिया है, लेकिन उनके इस बयान को एक दिन बाद ही मायावती ने ही पूरी तरह खारिज कर दिया. इतना ही नहीं मायावती ने अपने समर्थकों से अपील कर डाली कि वो रायबरेली और अमेठी में कांग्रेस के शीर्ष नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पक्ष में वोट डालें. 
  • नेतृत्‍व का मतलब होता है कि आप दबाव का सामना कैसे करते हैं - एक महत्वपूर्ण लड़ाई में अपने विरोधी को बिना कोसे पूरी गरिमा और सम्‍मान के साथ. मेरे लिए, अपने दिवंगत पिता राजीव गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुच्‍छ टिप्‍पणी का जवाब देने के मामले में राहुल गांधी विजेता बनकर उभरे हैं.
  • अब यह कांग्रेस की आदत बन गई है कि वह सबसे बुरे हालात में पहुंचकर रुक जाती है. ताज़ातरीन उदाहरण है - कर्तव्यपरायण पुत्री ने परिवार के फैसले के सामने सिर झुका दिया है.
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