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NDTV Khabar

  • शाह ने खुद भी बार-बार मतदाताओं से BJP के पक्ष में 'इतनी ज़ोर से EVM पर बटन दबाने के लिए कहा, ताकि करंट शाहीन बाग में महसूस हो...' अब इसी समिट में वह आत्मावलोकन के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि विशेष रूप से यह टिप्पणी आक्रामक नहीं थी.
  • कांग्रेस का तर्क है कि प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा उत्तर प्रदेश में किए काम का असर दिखने लगा है - सबूत के तौर पर वह बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया तथा पूर्व मुख्यमंत्री मायावती द्वारा हाल ही में प्रियंका पर किए हमले को पेश करते हैं. इसके अलावा प्रियंका की योगी आदित्यनाथ से भी झड़प हो चुकी हैं. क्षेत्रीय महत्व रखने वाले एक ही राजनेता ने अब तक प्रियंका का विरोध नहीं किया है, और वह हैं समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख तथा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव.
  • आदित्य रश्मि उद्धव ठाकरे, उम्र 29 साल, महाराष्ट्र के कैबिनेट में आज शामिल किए गए. उनके पिता मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पार्टी के मामलों में भी उनके तब से बॉस हैं जब से उन्होंने शिवसेना प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली है. जूनियर ठाकरे के 'ट्रिपल-बैरल सरनेम' से सेना की राजनीति और रश्मि ठाकरे के प्रभाव के बारे में पूरी बातें सामने आती हैं, जो कि परिवार में मुख्य राजनीतिक रणनीतिकार हैं और जिन्होंने अपने बड़े बेटे के पेशेवर विकल्पों को आकार देने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है.
  • झारखंड की 14 में से 12 लोकसभा सीटें जीत लेने के सिर्फ सात ही महीने बाद BJP को राज्य में बेहद ज़ोरदार झटका लगा है.
  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने सोमवार सुबह उपचुनाव के रूप में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (JDS) के मुकाबले एक बड़ी लड़ाई जीतकर दिखाई है, जिसमें बहुत कुछ दांव पर लगा था. मोटे तौर पर इन्हीं दोनों विपक्षी पार्टियों से आए नेताओं की बदौलत BJP सोमवार दोपहर 12 बजे तक कुल 15 में से 12 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करती नज़र आ रही थी.
  • शरद पवार हमारे देश के सबसे शातिर और चतुर राजनेताओं में से एक हैं, और हर शब्द बेहद सावधानी से बोलते हैं. मोदी की ओर से 'मिलकर काम करने' के लिए कथित रूप से पिछले माह की गई पेशकश को लेकर सार्वजनिक रूप से TV इंटरव्यू में उनका बोलना सोची-समझी रणनीति थी.
  • कांग्रेस जिसको शिवसेना के साथ जाने के चलते पार्टी के भीतर ही आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, उसने कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी के रूप में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी दलीलें रखने में शिवसेना की मदद की.
  • हम फिलहाल दो चीजों के बारे में जानते हैं. कांग्रेस नेता और शाही परिवार से संबंधित ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर हैंडल से अपनी पार्टी से संबंधित सारी जानकारी हटा ली है. अब उनके ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि वो केवल एक लोक सेवक और क्रिकेट समर्थक हैं. इससे पहले सिंधिया के ट्विटर हैंडल पर लिखा था कि वह गुना से पूर्व सांसद हैं. इसके अलावा उनके मंत्री पद से जुड़ी जानकारी भी उनके ट्विटर हैंडल पर थी.
  • महाराष्ट्र में, और बाहरी समर्थन से हरियाणा में भी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार बना लेगी, लेकिन इन दोनों विधानसभाओं के लिए हुए चुनाव की असलियत यह है कि मतदाताओं ने दर्प और कर्णभेदी अति-राष्ट्रवाद पर समय रहते अंकुश लगा दिया है, और यह भी कि जनता को आर्थिक अंतःस्फोट की परवाह है. कुछ ही महीने पहले लोकसभा चुनाव में BJP ने शानदार बहुमत हासिल किया था.
  • चूंकि क्रिकेट समूचे देश में जुनून की तरह छाया रहता है, सो, सौरव गांगुली और उनकी टीम पर बेहद बारीक नज़र रखी जाएगी, और अगर सौरव BCCI में प्रभावी और साफ-सुथरा प्रशासन दे पाते हैं, तो उनकी साख बहुत बढ़ेगी. BCCI ने हमेशा से पारदर्शिता को रोकने की कोशिश की है, सो, गांगुली का आकलन इसी आधार पर होगा कि वह स्थिति बदल पाती है या नहीं.
  • केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने खुद को नरेंद्र मोदी सरकार में 'सर्वश्रेष्ठ शिकारी' के रूप में ढाल लिया है. वह नपे-तुले अंतराल पर पाकिस्तान के खिलाफ आग उगलते, उसे चेताते सुनाई देते हैं. कभी वह पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर दावा करते हैं, कभी वह चेतावनी देते सुनाई देते हैं कि भारत परमाणु हथियारों के 'पहले इस्तेमाल नहीं' की नीति से बंधा हुआ नहीं है.
  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम आने के बाद एनसीपी के मुखिया शरद पवार (79) ने करामात दिखाते हुए बीजेपी को मात दे दी है. पवार जो कि जो राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं जिन्होंने अनुभव और संपर्कों के दम पर खुद को मजबूत किया है. 
  • कांग्रेस के मौजूदा हालात में यह टोटका सरीखा लगता है कि पार्टी ने आज की बैठक ऐसे एजेंडे के साथ की, जिससे न सिर्फ उसके प्रतिद्वंद्वी चकरा जाएंगे, बल्कि उसके अपने नेता भी. इससे पहले, कभी भी पार्टी अपनी या देश की ज़रूरतों को लेकर इतनी कटी-कटी कभी महसूस नहीं हुई थी.
  • एक वक्त था, जब कांग्रेस के लिए सब कुछ ठीक चल रहा था. वे बड़े परिवारों (उनमें से एक तो पूर्व राजपरिवार का सदस्य है) के उत्तराधिकारियों के रूप में चांदी का चम्मच लिए पैदा हुए थे, उनकी जमकर खातिर की गई, उनकी सुनी गई, और प्रशासन का तजुर्बा दिलवाने के लिए उन्हें राज्यमंत्री भी बनाया गया. अब माहौल बहुत बदल गया है. उम्र के पांचवें दशक में कदम रख चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद तथा दीपेंद्र हुड्डा 'पीटर पैन सिन्ड्रोम' से पीड़ित हैं, और सुधार के लिए संघर्षरत दिख रहे हैं.
  • एयर इंडिया की बिक्री के फैसले से लेकर अनुच्छेद 370 (जम्मू एवं कश्मीर का विशेष दर्जा) खत्म करने और आरिफ मोहम्मद खान को केरल का राज्यपाल बनाने तक गृहमंत्री अमित शाह ही हैं, जो मोदी 2.0 को लक्ष्यों को अमली जामा पहना रहे हैं.
  • 15 अगस्त को RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दुर्लभ तरीके से बेहद उदार शब्दों में अनुच्छेद 370 को हटाकर कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के लिए प्रधानमंत्री की सार्वजनिक रूप से सराहना की. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनावी नारे का इस्तेमाल करते हुए RSS के सरसंघचालक ने कहा, "अनुच्छेद 370 इसलिए गया, क्योंकि मोदी है, तो मुमकिन है..."
  • यदि भारत में कोई अभी भी नतीजों में रुचि रखता है, तो कांग्रेस अंततः आने वाले शनिवार को यह तय कर सकती है कि उसका अगला अध्यक्ष कौन होगा जो कि राहुल गांधी की जगह लेगा. राहुल गांधी लगभग तीन महीने पहले पद छोड़ चुके हैं.
  • आपकी नजर में राहुल गांधी जैसे अध्‍यक्ष का विकल्‍प कौन होगा? अगर आप किसी ऐसी पार्टी के सदस्‍य हैं जिसपर वंशवाद हावी रहा है या जिसे कांग्रेस के नाम से जाना जाता है, तो एक मात्र विकल्‍प होंगी उनकी बहन, प्रियंका गांधी. कांग्रेस में पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह जैसे कामयाब जननेता इन दिनों विरले ही देखने को मिलते हैं. अब उन्‍होंने भी प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी अध्‍यक्ष बनाए जाने की शशि थरूर की मांग का समर्थन कर दिया है.
  • तीन बार कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री बने येदियुरप्‍पा कभी भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. आखिरी बार साल 2018 में केवल दो दिन के लिए मुख्‍यमंत्री बने येदियुरप्‍पा अपनी चौथी पारी में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते. येद्दी के नाम से मशहूर येदियुरप्‍पा ने शुक्रवार को अकेले शपथ ली.
  • कांग्रेस के सामने इस समय बहुत बड़ा संकट मौजूद है - राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी का स्थान कौन लेगा - सो, उसके पास अपनी गिनी-चुनी सरकारों में से एक के गिर जाने के बारे में गंभीरता से सोचने का वक्त तक नहीं है. कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व का कर्नाटक इकाई को भेजा गया संदेश है - हमें परवाह नहीं, अगर आपकी सरकार गिर जाती है, क्योंकि जब तक हम शीर्षहीन हैं, हम राहुल गांधी की टाल-मटोल की नीति का ही पालन करते रहेंगे.
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