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उमाशंकर सिंह

यूमैटिक कैमरा से मोबाइल जर्नलिज़्म तक, पत्रकारिता के 23 साल. वर्ष 2000-2002 तक कश्मीर में रहे. 2007 में पाकिस्तान की एमरजेंसी के अलावा स्वात और बाजौर जैसे इलाकों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं. अफ़ग़ानिस्तान से तालिबान पर और बुंदेलखंड में पानी की किल्लत पर रिपोर्ट के लिए दो बार रामनाथ गोयनका अवार्ड. NDTV इंडिया के फॉरेन अफेयर्स एडिटर को स्थानीय मुद्दों से लेकर विदेशी मामलों तक सभी में दिलचस्पी. व्यंग्य में रुचि.

  • दरअसल अहमद पटेल की कोरोना वायरस की चपेट में आकर हुई असामयिक मृत्यु ने पार्टी नेताओं को कई स्तर पर झकझोर दिया है. भावनात्मक स्तर पर भी और राजनीतिक स्तर पर भी. पटेल के जाने के बाद पार्टी में एक शून्य पैदा हुआ है. यही शून्य पार्टी के भीतर एक तूफ़ान ला सकता है. ख़ामोशी उसकी पूर्वपीठिका हो सकती है. 
  • उधर सचिन के जयपुर आने की ख़बर के बीच गहलोत जैसलमेर निकल गए. कहा गया कि सचिन के लौटने के उनके समर्थक विधायकों में जो नाराज़गी है उसे दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. इधर 19 थे तो उधर सौ से ज़्यादा हैं. तो नाराज़गी का आलम भी ज़्यादा होगा. लेकिन अब गहलोत के सामने हाईकमान के फ़ैसले और निर्देश की बाध्यता होगी और उनको उसी के हिसाब से चलना होगा.
  • इसमें कोई दो राय नहीं कि जब एक कूटनीतिक संवाद होता है, तो उसमें आपसी व्यवहार और भाव-भंगिमा का अपना महत्व होता है. राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की अंग्रेज़ी को शानदार बताया, तो उस मौके का अपनी तरह से इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उनके हाथ को ताकत लगाकर अपनी ओर खींचा और फिर उस पर एक ज़ोरदार थपकी रख दी. इसके ज़रिये उन्होंने दिखा दिया कि वह किस तरह की पर्सनल कैमिस्ट्री लेकर चलते हैं, और किस तरह हर मौके को अपने हिसाब से ढालकर अपना दबदबा दिखाते हैं.
  • हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को इंतजार है 10 जनपथ से किसी फैसले का. उन्होंने रोहतक की कल की अपनी रैली में धारा 370 के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी कांग्रेस के खिलाफ जमकर हमला बोला. माना यह जा रहा है कि हुड्डा अपनी अलग पार्टी बनाने के लिए नींव रख चुके हैं, लेकिन जाते-जाते कांग्रेस से एक सौदा कर लेना चाहते हैं. यही वजह है कि कल के अपने वक्तव्य के बाद हुड्डा अभी प्रेस से बात करने से बच रहे हैं.
  • कश्मीर पहले भी सुलगा है. सुलगता रहा है. वहां आतंकवाद का इतिहास क़रीब तीन दशक पुराना है. लेकिन हर बार उसे शांत करने की कोशिश भी होती रही है. कोशिश इस बार भी हो रही है. और बहुत अलग तरह की कोशिश हो रही है. लेकिन क्या कोशिश हो रही है किसी को पता नहीं.
  • शनिवार देर रात तक दहकता बहकता ट्वीट कर भ्रष्टाचार के खिलाफ़ अलख को थामे रखने की बात करने वाले कुमार विश्वास के सुर आख़िर रविवार दोपहर तक क्यों बदल गए? सत्येन्द्र जैन से 2 करोड़ रूपया लेने के कपिल मिश्रा के आरोप के बाद कुमार विश्वास ने केजरीवाल की तरफ से मोर्चा संभाला. बयान दिया है कि वे केजरीवाल को 12 साल से जानते हैं. वे भ्रष्टाचार नहीं कर सकते.
  • सुबह क़रीब नौ बजे का वक्त. कश्मीर में सुबह देर से होती है. रात की मेजबानी के बाद नींद की खुमारी में डूबा डार का परिवार अभी ठीक से जगा भी नहीं था. तभी गली में फौज़ी बूटों की गड़गड़ाहट के साथ दरवाज़े पर ज़ोर ज़ोर से दस्तक हुई. डार के दिल की धड़कन चौगुनी हो गई.
  • श्रीनगर में अक्टूबर महीने की एक रात. सन्नाटे को तोड़े बग़ैर सुरक्षबलों की एक टुकड़ी ने डाउन टाऊन के एक मोहल्ले को अपने घेरे में ले लिया. ये सुरक्षा का बिल्कुल बाहरी घेरा था और ये सिर्फ एहतियातन था. किसी गड़बड़ी की सूरत में ही इन्हें हरक़त में आना था. गली में कुछ दूरी पर सुरक्षाबलों की मौजूदगी से बेखबर मकबूल डार (काल्पनिक नाम) का पूरा परिवार गहरी नींद में सो रहा था. पर डार उनींदी में थे.
  • टीवी चैनलों पर एंकर्स उचक-उचक कर चिल्ला रहे हैं. कश्मीर में ज़िंदा पकड़ा गया आतंकवादी. फिर मोबाइल पर रिकॉर्ड किए गए मुनीर के कबूलनामे को सुनाते हैं. वह बताता है कि उसे रायफल छीनने भेजा गया था. एटीएम लूटने भी. सूमो से आया. आज ही लौटना था. उसे कोई ट्रेनिंग नहीं मिली है. मुनीर के हर शब्द को सुनाया और स्क्रीन पर पढ़ाया भी जाता है.
  • न ढ़ोल बजा, न नगाड़ा और न ही भांगड़ा हुआ. यहां तक कि जो तस्वीर सामने आयी उसमें राहुल और सिद्धू के अलावा कोई तीसरा नेता भी नज़र नहीं आया. राहुल गांधी के घर बिना किसी तामझाम के नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस की पंजाब टीम में शामिल हो गए. उस टीम में जिसकी बागडोर कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों में है.
  • कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राहुल की औपचारिक ताजपोशी जब होगी तब होगी. फिलहाल राहुल बगल की सीट पर सोनिया को बिठाकर पार्टी चलाते दिख रहे हैं या दिखना चाह रहे हैं. शायद इसे औपचारिकता में बदलने से पहले पार्टी को किसी अच्छी चुनावी कामयाबी का इंतजार है.
  • वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद अमेरिका ने जब अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई छेड़ी तो तालिबान ने पाकिस्तान के सरहदी कबाइली इलाक़े का रुख़ किया. यहां पैठ बनाने के लिए उसने पठानों की 6 हज़ार साल पुरानी जीवनशैली 'पख़्तूनवली' की परंपरा 'नानावतायी' का इस्तेमाल किया.
  • जब पेशावर में स्कूल में बच्चे मारे गए तो पूरा हिन्दुस्तान रोता है. हर चैनल हर अखबार हर पत्रकार रोता है. जब भी वहां धमाके में आम शहरियों की जान जाती है, हम सब रोते हैं. लेकिन पाकिस्तानी मीडिया का एक हिस्सा हिन्दुस्तानियों की मौत को हाफिज़ सईद और मसूद अज़हर जैसे आतंकवादी मंसूबों की जीत समझता है.
  • पाकिस्तान पर बम मार दो. उसका समूल विनाश कर दो. ईंट से ईंट बजा दो. इस बार मत छोड़ो. इस तरह की बातों से न सिर्फ सोशल मीडिया भरा पड़ा है बल्कि न्यूज़ चैनलों के स्‍टूडियोज़ से भी ऐसी ही चीख सुनाई पड़ रही है.
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब से बलूचिस्तान का मुद्दा उठाया है एक बहस छिड़ गई है कि आख़िरकार ये मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक है या फिर भारत को इससे हासिल क्या होगा. पहली बार ये सुनने में बड़ा अच्छा लगता है कि आख़िरकार भारत ने कश्मीर पर पाकिस्तान की हरक़तों की काट ढूंढ़ लिया है.
  • हरियाणा में राज्यसभा के इनेलो समर्थित उम्मीदवार आरके आनंद चुनाव हार गए और उनकी इस हार में हरियाणा के कांग्रेसी विधायकों की बड़ी भूमिका रही। कांग्रेस के 17 में से 14 विधायकों का वोट गिनने लायक नहीं माना गया।
  • खरही के ऊंचे पौधों के बीच संकरी कच्ची सड़क पर जब हम आगे बढ़े तो हमें भाड़े की बोलेरो गाड़ी किसी वरदान से कम नहीं लगी। आमतौर पर शहरों को जोड़ने वाली सड़क की शानदार हालत मुख्य सड़क से हटते ही थोड़ी पतली हो जाती है। ग्रामीण सड़कों की हालत चमचमाते हाईवेज़ से उलट है।
  • पाकिस्तान से गीता की वापसी की तैयारी केजियामणि के लौटने की कहानी की याद दिला रही है। हालांकि दोनों की कहानी में बड़ा फर्क है, लेकिन एक बात जो समान है, वह ये कि दोनों के कई साल पाकिस्तान में बीते हैं।
  • बिहार चुनाव में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बीजेपी की जीत की रणनीति को कहीं लालू की राजनीति और आसान तो नहीं कर रही? ये सवाल इसलिए क्योंकि लालू की राजनीतिक व्यवहार और उनके बयानों के कई पहलु ऐसा सोचने को मजबूर कर रहे हैं।
  • टीवी चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज चलने लगी कि मुलायम ने कांग्रेस पार्टी को अल्टीमेटम दे दिया है। कह दिया है कि अगर वह हंगामा करती रही तो उसका साथ नहीं देंगे। सरकारी सूत्रों के हवाले से इस खबर को खूब जगह मिली। आखिरकार मुलायम और सरकार ने कैसे मामले को अपने पाले में मोड़ने की कोशिश की?
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