NDTV Khabar
होम | ब्लॉग |   विजय अग्रवाल 

विजय अग्रवाल

लोगों में निराशा दूर कर उत्साह भरने का शौक है. इसलिए इससे जुड़े विषयों पर कई किताबें लिखी हैं जो लोगों ने काफी पसंद की हैं. अधिकतर पुस्तकें जीवन प्रबंधन से जुड़ी हुई हैं.

  • जनाब असदुद्दीन ओवैसी तो कानून के जानकार हैं। उन्हें इतना तो मालूम होगा ही कि संविधान 'मानवीय गरिमा की रक्षा' तथा दूसरों के धर्म एवं संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना रखने की बात भी कहता है, लेकिन मुश्किल यह है कि संविधान की यह भावना राजनीति की बिसात से मेल नहीं खाती।
  • जब बारी आई नौकरशाहों की टीम बनाने की, तो वहां पीएम ने कोई समझौता नहीं किया, भले ही इसके लिए अध्यादेश लाना पड़ा हो। प्रधानमंत्री के चयन के तौर-तरीकों पर बहस की जा सकती है, लेकिन उनकी योग्यताओं पर बहस की गुंजाइश नहीं, जिन्हें वह अपनी निकट की टीम में लेकर आए।
  • जैसे कहा जाता है, 'प्रेम किया नहीं जाता, हो जाता है...' इसी तर्ज पर कहा जा सकता है, प्रेम खोया नहीं जाता, खो जाता है। प्रेम का होना भले ही हमारे हाथ में न हो, लेकिन उसका खोना न खोना हमारे हाथ में ज़रूर है। वह कैसे, कुछ इसी तरह की तरकीबों पर हम यहां बात करेंगे।
  • जो किसी भी तरह की सामाजिक भूमिका में आ जाते हैं, उन्हें अपनी निजता का त्याग करना ही पड़ता है। यह भी तो ज़िन्दगी जीने का एक ऐसा अंदाज़ हो सकता है कि सिर उठाकर कहा जा सके 'ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा...'
  • कला के बिकाऊ बनते ही वह विज्ञापन का रूप ले लेती है। कपिल की कॉमेडी इसकी शिकारों का सर्वोत्तम और ताजा उदाहरण है। जैसे ही उनका यह शो रिलीज़ होने वाली फिल्मों का मंच बना, हीरो और हीराइनें प्रमुख हो गए। कपिल साइड में चले गए। साथ ही साइडलाइन हो गई उनकी कॉमेडी।
  • यह एक बहुत ही व्यावहारिक सवाल है कि 'मुझसे जिस काम के नाम पर पैसा वसूला जा रहा है, वह काम होना ही चाहिए। यदि काम नहीं, तो दाम भी नहीं।' नगर निगम, नगर पालिकायें सम्पत्ति कर लेती हैं, लेकिन कचरों के ढेरों का साम्राज्य फैला हुआ मिलता है।
  • पृथ्वीराज कपूर के पोते ऋषि को भले ही ऐतराज़ न हो, लेकिन पेशावर में रहने वाले 80 साल के निसार खान को है। हिन्दुस्तान और पाकिस्तान में रहने वाले उन लाखो-करोड़ों चहेतों को भी ऐतराज़ है, जिनके दिल-ओ-दिमाग में 'मुग़ल-ए-आज़म' का अकबर और 'जोकर' आज भी सांसें ले रहा है।
  • जैसा इसके नाम से ही आभास मिलता है, यह स्टार्ट अप तीन के इर्द-गिर्द ही घूमता रहेगा - भारत के बड़े शहर, पढ़ा-लिखा तकनीकी एवं प्रबंधकीय वर्ग तथा सालाना आय... ये तीनों भारत की उस ज़रूरत और संस्कृति से मेल नहीं खाते, जिसकी चर्चा डैनियल आइज़नबर्ग ने की थी।
  • क्या हम यह मान लें कि किसी भी क्षेत्र में कुछ नया सोचने और नया करने का काम एक ऐसा कोरा मस्तिष्क ही कर सकता है, जिस पर किसी भी तरह की औपचारिक शिक्षा के आखर उकेरे न गए हों? ऐसा मानना गलत नहीं होगा, और इसके लिए इतिहास आपका साथ देने में सक्षम है...
  • 'रीइन्वेन्ट' यानी पुनर्खोज। खुद की फिर-फिर से तलाश करना। अमिताभ बच्चन भी अपनी अधिकांश फिल्मों में ऐसा ही करते रहते हैं। और यही उनकी वह शक्ति है, और जिजीविषा भी।
  • ब्रिटेन में तो यहां तक व्यवस्था है कि वहां के उच्च सदन का सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। कनाडा, फ्रांस, जापान व जर्मनी जैसे द्वि-सदनीय व्यवस्था वाले देशों ने भी जनता द्वारा निर्वाचित सदनों को ही अधिकार-संपन्न बनाया है। अब भारत को भी चाहिए कि वह इस दिशा में विचार-विमर्श करे।
  • 'दिल्ली में एक दिन सम संख्या वाली और अगले दिन विषम संख्या वाली गाडि़यां चलेंगी', दिल्ली सरकार के इस फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका को न्यायालय ने खारिज कर दिया। जाहिर है कि न्यायालय को याचिका को खारिज करने में जन का हित मालूम पड़ा होगा।
  • 50वें जन्मदिन के सत्रह दिन पहले मिला यह तोहफा निश्चित ही 27 दिसंबर की तारीख को सलमान और उनके चहेतों के लिए खुशनुमा बनाने जा रहा है। 'हिट एंड रन' केस में पिछले 13 सालों से उलझे हुए अब्दुल रशीद सलीम सलमान खान को मुम्बई हाईकोर्ट ने मानसिक सुकून मुहैया कराया है।
  • हम अपने काम से ऊब जाते हैं, अपनी जगह से ऊब जाते हैं, अपने संबंधों से ऊब जाते हैं, और अंततः अपने आप तक से ऊब जाते हैं... क्यों...? इसलिए, क्योंकि हमने इन्हें नया नहीं किया। इन्हें नया करने के लिए समय चाहिए था, और हम थे कि हमारे पास वैसे तो सब कुछ था, एक समय को छोड़कर।
  • ये चंद पंक्तियां फिल्म 'गांधी' में सरदार पटेल की भूमिका निभाने वाले सईद जाफरी की डायरी की हैं, जिनमें अपनी पत्नी से अलग हो जाने की उनकी गलती का जीवनभर का दर्द बयां हो रहा है...
  • शेक्सपियर यहां तो पूरी तरह सही हैं कि नाम में क्या रखा है। यदि गुलाब को गुलाब न कहकर कुछ और कहा जाये, तो गुलाब को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन यदि 'सेक्युलर' को हिन्दी में 'पंथनिरपेक्ष' न कहकर 'धर्मनिरपेक्ष' कहा जाए तो फर्क पड़ जाएगा।
  • रामनाथ गोयनका पुरस्कार समारोह में कहे गए आमिर खान के शब्दों ने फिलहाल पूरे देश में खलबली मचा रही है। वैसे यदि देखें तो आमिर ने अपने घर में पत्नी से होने वाली उस आम बातचीत की बात कही थी, जो हम सभी के घरों में कभी न कभी होती ही रहती है।
  • जिंदगी को खतरे में डालने से भला किस तरह का मजा मिल सकता है। हम लोग तो अपनी जिंदगी की जद्दोजहद में ही केवल इसलिए लगे रहते हैं, ताकि उसे खतरों से बचा सकें...
  • जिंदगी के अपने-अपने अनुभव हमारी अपनी-अपनी सबसे बड़ी दौलत है, बशर्ते कि हम उसे ऐसा समझें। हमारे अपने अनुभव एक ऐसा चमकदार आईना है, जिसमें हम अपने अतीत की सारी घटनाओं को घटते हुए देख सकते हैं, उनका विश्‍लेषण कर सकते हैं।
  • चाहे ईश्वर के अवतार राम और कृष्ण हों, चाहे ईश्वर के पुत्र प्रभु यीशु हों, अथवा अल्लाह के संदेशवाहक मोहम्मद साहब हों, सभी ने इस धरती पर आकर जो कुछ किया, जैसा जीवन जिया, उससे यही संदेश मिलता है कि 'कर्म ही मुक्ति है...'
«123456»

Advertisement