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विराग गुप्ता

विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट और संवैधानिक मामलों के जानकार हैं. साहित्य और विधि क्षेत्र में अनेक पुस्तकों के लेखन साथ आप हिन्दी और अंग्रेज़ी के राष्ट्रीय अख़बारों और पत्रिकाओं के लिए नियमित लिखते हैं. इनके प्रयासों से विधि और न्यायिक क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जिनमें सरकारी अधिकारियों के लिए ई-मेल और सोशल मीडिया नीति, साइबर जगत में बच्चों की सुरक्षा, इंटरनेट कंपनियों से टैक्स वसूली और चुनावों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नियम उल्लेखनीय हैं

  • पार्टियों के बड़े खर्चे, नेताओं की बद्जुबानी, पेड न्यूज़ और आचार संहिता के संगठित उल्लंघन को रोकने में विफल चुनाव आयोग द्वारा, राजनीतिक विश्लेषण को रोकने का अतिरेकी प्रयास, आयोग की प्रभुसत्ता को और भी अप्रासंगिक बना देगा.
  • सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की आंतरिक समिति ने यौन उत्पीड़न के आरोपों पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को क्लीन चिट दे दी, जिसके बाद विवाद और गहरा गया है. जांच समिति के अनुसार चीफ जस्टिस के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई ठोस आधार नहीं मिला है. आलोचकों के अनुसार न तो पीड़ित महिला का पूरा पक्ष सुना गया और न ही सभी पहलुओं की जांच की गई, तो फिर ठोस आधार कैसे मिलेंगे? जांच समिति द्वारा यदि व्हाट्सऐप कॉल के रिकॉर्ड ही मंगा लिए जाते तो पूरा मामला शीशे की तरह साफ हो जाता.
  • मद्रास हाईकोर्ट के दो जजों ने केंद्र सरकार को टिकटॉक ऐप पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्टे करने से इंकार कर दिया. इसके बावजूद टिकटॉक की वेबसाइट और ऐप पूरे भारत में अब भी उपलब्ध है. सवाल यह है कि हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद केंद्र सरकार आदेश पर अमल क्यों नहीं कर रही है.
  • लोकसभा चुनाव जीतने के लिए सभी पार्टियों ने लुभावने वायदों की बारिश कर दी है. नेताओं के चुनावी वायदों के पीछे बदलाव की विस्तृत रूपरेखा नहीं होती है इसीलिए सरकार बदलने के बावजूद सिस्टम नहीं बदलता है. चुनावों के बाद इन वायदों का क्या हश्र होता है, इसे लोकपाल मामले से समझा जा सकता है.
  • भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद-324 के तहत असीमित अधिकार मिले हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. विक्रम सिंह ने चुनाव आयोग को 3 लीगल नोटिस देने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके रोड-शो और बाइक रैली पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की.
  • उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर के कलेक्ट्रेट दफ्तर में सांसद और विधायक के बीच मारपीट के बाद उनके समर्थकों द्वारा तोडफोड़ भी की गई भाजपा हाईकमान ने इसे अनुशासनहीनता का मामला बताते हुए नेताओं को फटकार लगाई और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया. दूसरी ओर पुलिस द्वारा आईपीसी की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), धारा 427 (शरारती तत्व) और सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने के कानून के तहत अज्ञात लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करके मामले में लीपापोती कर दी गई.
  • भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-A के तहत सोशल मीडिया साइटों पर आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री पोस्ट करने वाले के लिए तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान था. श्रेया सिंघल मामले में सन 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66-A को गैर-संवैधानिक बताते हुए उसे निरस्त कर दिया था. पीयूसीएल नामक संगठन ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाकर बताया था कि निरस्त होने के बावजूद धारा 66-A के तहत देशभर में अनेक गिरफ्तारियां और मामले चल रहे हैं.
  • पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार  और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बीच राजनैतिक टकराव के दौर में नए CBI चीफ की ताजपोशी एक अजब संयोग है. संवैधानिक संकट की दुहाई देते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल कर ममता बनर्जी सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
  • मोदी सरकार के आखिरी बजट को अंतरिम वित्तमंत्री पीयूष गोयल 1 फरवरी को पेश करेंगे. अंतरिम बजट में इन 10-सूत्रों की थीम को लागू करके गोयल, भारत को आर्थिक महाशक्ति और विश्वगुरु बनाने का स्थायी मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं.
  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना आंदोलन में लोकपाल को हर मर्ज़ की दवा बताया गया. 'सुशासन' और 'अच्छे दिन' के नाम पर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली की सत्ता हासिल कर ली, पर लोकपाल का कोई अता-पता नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके बाद CBI में आधी रात को तख्तापलट की घटना के बाद संस्थाओं में आंतरिक संघर्ष बढ़ता जा रहा है. इन घटनाओं से भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था पर अनेक सवाल खड़े हो गए हैं.
  • जनता पार्टी ने पद्म सम्मानों को खत्म किया, तो अब BJP पहल करे : पद्म सम्मानों की शुरुआत नेहरू सरकार ने 1955 में की थी, जिस पर सदैव विवाद होते रहे हैं. आचार्य जेबी कृपलानी ने पद्म सम्मानों को खत्म करने के लिए 1969 में लोकसभा में बिल पेश किया, जिसे इंदिरा सरकार ने नहीं स्वीकारा. कृपलानी के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 18 से अंग्रेज़ी शासनकाल के दौर के सम्मान ख़त्म हो गए थे, जिन्हें नेहरू ने पद्म सम्मान के तौर पर पिछली खिड़की से लागू कर दिया.
  • कांग्रेस के शशि थरूर ने भारत में सोशल मीडिया के राजनीतिक इस्तेमाल की शुरुआत की थी, जिस पर बाद में BJP ने आधिपत्य जमा लिया. नवीनतम रिपोर्टों के मुताबिक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में व्हॉट्सऐप, फेसबुक, गूगल और ट्विटर का जमकर इस्तेमाल हुआ, जिसमें कांग्रेस ने अब फिर बढ़त हासिल कर ली है. राज्यों में चुनाव से पहले सेन्टर फॉर एकाउन्टेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज (CASC) संस्था ने विस्तृत सुझाव देकर चुनाव आयोग से 2013 के नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की अपील की थी. इसके जवाब में चुनाव आयोग ने फेसबुक और ट्विटर को पत्र लिखकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली. केंद्रीय कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सोशल मीडिया कंपनियों को भारतीय चुनावों में हस्तक्षेप नहीं करने की अनेक चेतावनी दी हैं, परंतु इन सभी चेतावनियों से बेख़बर सोशल मीडिया कंपनियों का भारतीय चुनावों में दखल बढ़ता ही जा रहा है, जो अगले आम चुनाव में संकट का सबब बन सकता है.
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के घूसखोर जज को नहीं हटाया गया : न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने जनवरी, 2018 में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अनेक मामलों पर सवाल उठाए गए थे, जिनमें मेडिकल काउंसिल में भ्रष्टाचार का मामला प्रमुख था. मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिए जाने में अनियमितताओं के मामलों में जजों को घूस दिए जाने के अनेक प्रमाण मिले थे.
  • CBI चीफ मामले की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने अगले हफ्ते के लिए स्थगित कर दिया है. राफेल मामले की विशेष जांच की याचिका पर भी सुनवाई खत्म होने के बाद, फैसला आना बाकी है. आरोपों की जांच करने वाली CBI के संदेह के दायरे में आने के बाद, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने भी आंखे तरेरना शुरू कर दिया है. अफसरों के परस्पर विवाद के भयानक दौर में, क्या CBI के कानूनी सिस्टम को ठीक करने की पहल होगी...?
  • CBI डायरेक्टर के दो साल के कार्यकाल को वैधानिक सुरक्षा होने की वजह से उन्हें जबरन छुट्टी पर भेजना गैरकानूनी है. संवैधानिक पदों पर बैठे अन्य लोग यदि सरकार के लिए तकलीफदेह हो जाएं, तो क्या राष्ट्रपति के माध्यम से उन्हें भी जबरन छुट्टी पर भेज दिया जाएगा...?
  • अमृतसर में रेल हादसे के बाद मुख्यमंत्री और केन्द्रीय रेल मंत्री विदेशी दौरों को रद्द करके भारी चिंता व्यक्त की है. विजयदशमी को रावण दहन के दिन हुई इन मौतों से यह फिर साबित हुआ कि राम भरोसे चल रहे देश में इन्सानों की जान की कोई कीमत नहीं है। देश में ट्रेन से कटकर मौत के सबसे बड़े हादसे के लिए किसकी जवाबदेही है और कौन है अपराधी?
  • मीडिया, बॉलीवुड और राजनीति की नामी शख्सियतों के विरुद्ध यौन उत्पीड़न के खुलासों के मामलों को कानूनी समाधान कैसे मिलेगा...? महिला आयोग ने रस्मी तौर पर कारवाई की है, लेकिन #MeToo से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया के भारीभरकम अभियान के बावजूद पुलिस, अदालत और सरकार की चुप्पी निराशाजनक है.
  • केशवानंद भारती मामले में 13 जजों द्वारा 1973 में 700 पेज में दिया गया फैसला आज भी नजीर माना जाता है. सुप्रीम कोर्ट में 6 साल की मुकदमेबाजी के दौर में 26 जजों ने आधार मामले को सुना और अब 1448 पेज के अंतिम फैसले से उलझनें और बढ़ गई हैं.
  • सुप्रीम कोर्ट के प्रांगण में मीडिया द्वारा फोटोग्राफी निषेध है. इसके बावजूद समलैंगिकता पर फैसले के बाद पूरा परिसर इन्द्रधनुषीय रंग से सराबोर हो गया. दो वयस्‍क लोगों का निजी सम्बन्ध मानते हुए समलैंगिकता को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया परन्तु इस फैसले के लिए अपनाई गयी कानूनी प्रक्रिया पर अनेक सवाल खड़े हो गये हैं.
  • 'डिजिटल इंडिया' में व्हॉट्सऐप कंपनी के 20 करोड़ यूज़र हैं, जो विश्व में सर्वाधिक हैं. जब डाटा को तेल सरीखा बहुमूल्य माना जाता हो, उस दौर में फ्री सर्विस देकर भी व्हॉट्सऐप 5.76 लाख करोड़ से ज़्यादा वैल्यू की कंपनी है. फ़ेक न्यूज़ को लेकर समाज, सरकार और सुप्रीम कोर्ट सभी चिन्तित हैं, लेकिन व्हॉट्सऐप के भारतीय कारोबार में फर्क क्यों नहीं आया.
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