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विराग गुप्ता

विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट और संवैधानिक मामलों के जानकार हैं. साहित्य और विधि क्षेत्र में अनेक पुस्तकों के लेखन साथ आप हिन्दी और अंग्रेज़ी के राष्ट्रीय अख़बारों और पत्रिकाओं के लिए नियमित लिखते हैं. इनके प्रयासों से विधि और न्यायिक क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जिनमें सरकारी अधिकारियों के लिए ई-मेल और सोशल मीडिया नीति, साइबर जगत में बच्चों की सुरक्षा, इंटरनेट कंपनियों से टैक्स वसूली और चुनावों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नियम उल्लेखनीय हैं

  • महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार को बेजा प्रभावित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कॉमेडियन का ट्वीट उल्टी करवट बैठ गया, क्योंकि कपिल को नवजोत सिंह सिद्धू से जोड़कर ट्वीट को बीजेपी विरोधी माना गया. कपिल शर्मा पर एफआईआर की तर्ज पर देशभर के नेता, अफसर तथा बिल्डरों पर सख्त आपराधिक कार्रवाई होने से आम जनता के अच्छे दिन ज़रूर आ सकते हैं.
  • कानूनी तथा संवैधानिक संकट को राजनीतिक लाभ में बदलने में केजरीवाल की असाधारण निपुणता है. दिल्ली में तीन मंत्री बर्खास्त हो चुके हैं तथा 12 विधायकों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई चल रही है, जिसके बावजूद राजनीति के अखाड़े में केजरीवाल खुश नज़र आ रहे हैं. अन्य राज्यों में संसदीय सचिवों पर कार्रवाई किए बगैर यदि दिल्ली के 21 विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया तो पंजाब तथा गोवा के आगामी चुनाव में केजरीवाल उसको राजनीतिक लाभ की गुगली में बदल सकते हैं.
  • अभिनेत्री से राजनेता बनी रम्या द्वारा सार्क प्रतिनिधि मंडल के सदस्य के तौर पर पाकिस्तान यात्रा के बाद दिए गए बयान से राजद्रोह के कानून तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस का नया दौर शुरू हो गया है. एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तमिलनाडु की जयललिता सरकार को अवमानना के राजनीतिक मुकदमों के लिए कड़ी डांट लगाई.
  • आप तो हमेशा सच का साथ देते हैं, तो फिर बीसीसीआई को दंडित करने की बजाय भ्रष्टाचार के संगठित गिरोह का आप सलाहकार क्यों बन गए? कानून को आप मुझसे बेहतर जानते हैं, लेकिन भ्रष्ट लोगों की मदद करना क्या आईपीसी के तहत अपराध नहीं है?
  • विश्व के 150 से अधिक देशों में जीएसटी लागू है, लेकिन भारत में जीएसटी पर राजनीति ही भारी पड़ती रही है. राज्यसभा द्वारा संविधान संशोधन विधेयक पर अनुमोदन की सहमति के बावजूद जीएसटी के क्रियान्वयन की राह में बड़ी अड़चनें तो अभी बाकी ही हैं...
  • डीजल वाहनों को लेकर एनजीटी का आदेश कानूनी नजरिए से त्रुटिपूर्ण है जिससे वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी होने के साथ देशव्यापी प्रदूषण भी बढ़ सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन को रद्द करते हुए 15 दिसंबर, 2015 की स्थिति को बहाल करने का आदेश दिया है, लेकिन पढ़िए, विलंब से आए इस निर्णय को लागू करने में क्या हो सकती हैं कानूनी अड़चनें...
  • अमेरिका में प्रति वर्ग किलोमीटर 35 लोग, चीन में 146 लोग तथा भारत में 441 लोग रहते हैं। इसलिए सरकार तथा अर्थशास्त्रियों को आंकड़ों की जटिलता के बजाय जनसंख्या विस्फोट की भयावहता के यथार्थ को एकमत से स्वीकार कर लेना चाहिए, तभी समस्या का समाधान होगा।
  • लोकतंत्र के मंदिर को स्वच्छ करने का मोदी सरकार का पहला वादा पूरा नहीं हुआ, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की राय के बाद ज़रूरी कानूनी बदलाव नहीं किए गए। नए कानून मंत्री के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री के 'डिजिटल इंडिया' के स्वप्न को, कानूनों में बदलाव का 'प्रसाद' कब मिलेगा...?
  • देश में समान नागरिक संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड- यूसीसी) लागू करने की संभावना का पता लगाने के लिए मोदी सरकार द्वारा विधि आयोग को पत्र लिखने से राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया है। क्या सरकार के इस कदम से संविधान की अवहेलना हुई है...?
  • जनता को राहत देने के लिए पीएम को 'मन की बात' के अलावा नीतियों में बदलाव भी करना होगा, वरना बेरोजगारी तथा अभावों से लाचार भारत, काले धन से लबालब स्मार्ट सिटी के दरवाजे पर शरणार्थी के तौर पर दस्तक तो देगा ही...!
  • दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के सामने बीजेपी सांसद महेश गिरी के धरने को डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी के समर्थन से टीवी और सोशल मीडिया पर मेलो-ड्रामा का नया एपिसोड चालू हो गया है, जिसकी धुन में राजनेता मस्त हैं पर कानून तो पस्त ही है...
  • दिल्ली की 'आप' सरकार द्वारा 21 विधायकों की संसदीय सचिव पद पर नियुक्ति में कानूनी विवाद से देश के अन्य राज्यों में इन पदों के औचित्य पर बहस छिड़ गई है।
  • कर्नाटक में राज्‍यसभा सीट के चुनाव के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की स्टिंग आने के बाद 15 चुनावी राज्यों में माहौल गर्म हो गया है।
  • प्राचीन भारत में कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लेकर आधुनिक भारत के संविधान में सुगम तथा प्रभावी न्याय को सुशासन की कसौटी का मुख्य आधार माना गया है। न्यायिक व्यवस्था के पुनरावलोकन से ही मोदी सरकार की दो साल की उपलब्धियों का सही मूल्यांकन हो सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कॉल ड्रॉप पर मोबाइल कंपनियों द्वारा ग्राहकों को मुआवजा देने वाले नियम को खारिज करते हुए इसे मनमाना, असंगत और गैर-पारदर्शी बताया है। यह निर्णय देश के 100 करोड़ मोबाइल ग्राहकों के लिए बुरी खबर है।
  • सवाल यह है कि अगर सुप्रीम कोर्ट स्पीकर के निर्णय को बदलते हुए बागी विधायकों को योग्य करार देता है तो क्या विधानसभा में फिर शक्ति परीक्षण होगा...? एक अहम सवाल यह भी है कि 9 विधायकों की सदस्यता पर अंतिम निर्णय लेने से पूर्व हरीश रावत को सरकार बनाने की अनुमति मिलेगी...?
  • नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली द्वारा जारी मृत्युदंड प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर मामलों में गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को ही फांसी की सजा होती है। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के जज मदन बी लोकुर ने कहा कि भारत की आपराधिक न्यायिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई है जिसे तत्काल सुधारने की जरूरत है।
  • राजनीतिक गतिरोध के शिकार उत्तराखंड के जंगल भयानक आगजनी के शिकार हैं और अब उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसफ के ट्रांसफर से शहरी मीडिया में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है।
  • गुजरात के स्थापना दिवस पर आर्थिक रूप से पिछड़े, अगड़ी जाति के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण के लिए भाजपा सरकार ने 'गुजरात अनारक्षित आर्थिक पिछड़ा वर्ग अध्यादेश 2016' जारी किया है जो देशव्यापी सामाजिक अशांति का कारण बन सकता है।
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