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विराग गुप्ता

विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट और संवैधानिक मामलों के जानकार हैं. साहित्य और विधि क्षेत्र में अनेक पुस्तकों के लेखन साथ आप हिन्दी और अंग्रेज़ी के राष्ट्रीय अख़बारों और पत्रिकाओं के लिए नियमित लिखते हैं. इनके प्रयासों से विधि और न्यायिक क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जिनमें सरकारी अधिकारियों के लिए ई-मेल और सोशल मीडिया नीति, साइबर जगत में बच्चों की सुरक्षा, इंटरनेट कंपनियों से टैक्स वसूली और चुनावों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नियम उल्लेखनीय हैं

  • सुप्रीम कोर्ट ने कॉल ड्रॉप पर मोबाइल कंपनियों द्वारा ग्राहकों को मुआवजा देने वाले नियम को खारिज करते हुए इसे मनमाना, असंगत और गैर-पारदर्शी बताया है। यह निर्णय देश के 100 करोड़ मोबाइल ग्राहकों के लिए बुरी खबर है।
  • सवाल यह है कि अगर सुप्रीम कोर्ट स्पीकर के निर्णय को बदलते हुए बागी विधायकों को योग्य करार देता है तो क्या विधानसभा में फिर शक्ति परीक्षण होगा...? एक अहम सवाल यह भी है कि 9 विधायकों की सदस्यता पर अंतिम निर्णय लेने से पूर्व हरीश रावत को सरकार बनाने की अनुमति मिलेगी...?
  • नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली द्वारा जारी मृत्युदंड प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर मामलों में गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को ही फांसी की सजा होती है। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के जज मदन बी लोकुर ने कहा कि भारत की आपराधिक न्यायिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई है जिसे तत्काल सुधारने की जरूरत है।
  • राजनीतिक गतिरोध के शिकार उत्तराखंड के जंगल भयानक आगजनी के शिकार हैं और अब उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसफ के ट्रांसफर से शहरी मीडिया में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है।
  • गुजरात के स्थापना दिवस पर आर्थिक रूप से पिछड़े, अगड़ी जाति के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण के लिए भाजपा सरकार ने 'गुजरात अनारक्षित आर्थिक पिछड़ा वर्ग अध्यादेश 2016' जारी किया है जो देशव्यापी सामाजिक अशांति का कारण बन सकता है।
  • दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर हलफनामे के बावजूद एप आधारित कैब कंपनियों का दिल्ली में अवैध परिचालन कैसे हो रहा है?
  • अदालत ने अपने आदेश से संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की है, परंतु सत्ता की दौड़ में भाग रहे नेता शक्तिमान की मौत के बाद क्या, राज (शक्ति) में नीति (मान) को ज़िन्दा रख पाएंगे...?
  • सुप्रीम कोर्ट में वकील ने प्रधानमंत्री द्वारा बिहार में की गई टिप्पणी - बिहारी बुद्धिमान होते हैं - का जिक्र करते हुए कहा, इससे लगता है कि दूसरे समुदाय के लोग बुद्धिमान नहीं। इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, चिंता मत कीजिए, जब प्रधानमंत्री पंजाब जाएंगे तो कहेंगे कि 'सिख बहुत बुद्धिमान हैं...!
  • आर्थिक अपराधियों का खुलासा करने की बजाए बैंकों को कॉरपोरेट के हवाले करने की साजिश हो रही है, जिसके खिलाफ 25 मई को बैंककर्मियों की हड़ताल प्रस्तावित है। संकट के जिम्मेदार लोगों का खुलासा करके, क्या सरकार देश की जनता के प्रति अपने संवैधानिक उत्तरदायित्व को पूरा करेगी...?
  • आईपीएल भारत में संगठित लूट का सबसे बड़ा प्रतीक है, जिसने इंडिया को पीकर सुखा दिया है। फिर आईपीएल के भ्रष्ट खेल पर महाराष्ट्र की बजाए पूरे राष्ट्र में क्यों न बैन लगना चाहिए...?
  • संविधान के अनुच्छेद 14,15 एवं 25 में समानता का मूल अधिकार है। मंदिरों में सभी वर्गों के प्रवेश के लिए महाराष्ट्र में 1956 में कानून बनाया गया था, जिसके उल्लंघन पर 6 महीने की सजा हो सकती है। इसके बावजूद तृप्ति देसाई की कानूनी मांग तथा हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने में महाराष्ट्र सरकार क्यों विफल रही?
  • ऑक्सफैम के अनुसार विश्व के 62 रईस लोगों के पास 3.5 अरब से ज्यादा की की सामूहिक संपत्ति है। क्या इसके लिए सरकार की आर्थिक, वित्तीय और टैक्स नीतियां जिम्मेदार नहीं...? क्या पनामा लीक्स का खुलासा सरकार और देश की आंख खोलेगा...?
  • उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए जेटली द्वारा अपने ब्लॉग में दिए गए तीनों तर्क नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद भोथरे साबित हुए हैं। नवीनतम आदेश के अनुसार सरकार के बहुमत का निर्धारण 31 मार्च को विधानसभा में कार्यवाही के आधार पर होगा।
  • बीजेपी द्वारा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की आर्थिक नीतियों को विश्व बैंक के इशारे पर लागू करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। अब पूर्ण बहुमत की नरेंद्र मोदी सरकार एक्साइज़ ड्यूटी को किस दबाव में लागू कर रहे हैं, जिसके विरोध में स्वयं मोदी जी वर्ष 2012 में पत्र लिख चुके हैं...?
  • लोकसभा में ‘आधार’ को मनी बिल के तौर पर पास करवाने के बाद राज्यसभा में बिल पेश किया गया है जिससे यह बिल संसद में पारित हो ही जाएगा। इस असंवैधानिक कदम को उठाने के लिए सरकार क्यों मजबूर हुई जो और भी कई वजहों से गैरकानूनी है?
  • श्री श्री रविशंकर पहले जुर्माना न देने की बात कर अब जुर्माना देने पर सहमत दिख रहे हैं, क्योंकि गैरकानूनी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के शरीक होने पर संवैधानिक संकट पैदा हो सकता था। श्री श्री का व्यक्तित्व और कृतित्व प्रेरणादायक है, लेकिन क्या वह कानून से ऊपर हैं...?
  • भविष्य में इन मुद्दों पर विचार किए बगैर ईपीएफ तथा बचत योजनाओं पर टैक्स यदि लगाया गया तो वह न सिर्फ गैरकानूनी होगा, वरन् जनता के संकट को भी बढ़ाएगा, जिसके दबाव में वित्तमंत्री को इस बार के बजट में रोलबैक की शुरुआत करनी पड़ी।
  • यह बीजेपी सरकार का तीसरा बजट है, जो पार्टी के घोषणापत्र तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का सालाना दस्तावेज भी माना जा सकता है। राजनीतिक आग्रहों से इस बार के बजट के थीम को गांव, गरीब और किसान के लिए रखा गया है...
  • सुरेश प्रभु जैसे पेशेवर और कुशल मंत्री से रेल बजट में विज़न की ठोस शुरुआत की उम्मीद थी, जो राजनीति के बैरियर से रुक गई लगती है। रेलमंत्री ने कहा कि मंदी के दौर से गुज़र रही दुनिया में रेलवे में सुधार की काफी गुंजाइश है, जिसकी शुरुआत करने में प्रभु अपने दूसरे बजट में भी विफल रहे हैं।
  • रेल बजट 25 फ़रवरी को पेश होगा। रेलमंत्री प्रभु ने कहा है कि रेल-बजट तो वित्तीय खर्च का लेखा-जोखा होता है इसलिए इसमें नई ट्रेनों और स्टेशनों की घोषणा नहीं होनी चाहिए? पर हकीकत यह है कि पुरानी योजनायें 6-8 लाख करोड़ फंड की कमी से पहले ही ठप पड़ी हैं तो फिर नयी योजनाओं की घोषणा का क्या औचित्य?
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