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विवेक रस्तोगी

भाषा से प्यार करना और उसका सम्मान करना विरासत में मिला, और छोटी उम्र से ही अपनी सुनाने, और लिखने का चस्का पत्रकार बना गया. ढाई दशक से अधिक की पत्रकारिता में मीडियम बदलते रहे, लेकिन भाषा से लगाव खत्म नहीं हुआ, जो आज की पीढ़ी, विशेषकर ऑनलाइन मीडियम में दुर्लभ है. मानता हूं कि आनंदित और आंदोलित होने की सूरत में सबसे अच्छा लिखा जा सकता है, सो, कम लिखता हूं. वैसे, विशेषज्ञ किसी भी विषय का नहीं हूं, लेकिन पढ़ने के शौक की बदौलत किसी भी विषय पर कतई कोरा भी नहीं हूं.

  • पुरानी-नई किताबों की जिल्द की अलग-सी गंध आज भी पढ़ने का शौक ज़िन्दा रखे हुए है... सो, आप लोगों से अब सिर्फ यही कहना चाहता हूं, खुद भी कुछ न कुछ पढ़ने की आदत डालें, और अपने बच्चों को देखने दें कि आप क्या कर रहे हैं, ताकि वे भी वैसे ही बन सकें... और यकीन मानिए, अगर ऐसा हो पाया, तो हिन्दी की दशा सुधारने के लिए हर साल मनाए जाने वाले हिन्दी दिवस की ज़रूरत नहीं रहेगी...
  • जिन्हें नहीं देखा, नहीं देखा, परन्तु राजनीति की मुझे समझ आने के बाद राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यही एकमात्र नाम है, जिसे आदर्श राजनेता मान पाया हूं... जिसे विजय पर घमंड नहीं, पराजय से खीझ नहीं... विपक्ष में रहो, तो सत्ता से लड़ते हुए भी उसे सम्मान दो... सत्ता में रहो, तो विपक्ष को पूरा मान दो...
  • सबसे ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि किसी के लिए भी राय बनाने से पहले काफी कुछ सोचा जाना आवश्यक है, वरना किसी को भी परखने में भूल हो सकती है, और उस परिस्थिति में हम वह सब नहीं सीख पाएंगे, जो उस शख्स से सीखा जा सकता है...
  • अब बीजेपी के पास न सिर्फ राज्य को बेहतर तरीके से चलाने की ज़िम्मेदारी आयद होती है, बल्कि यह ज़िम्मेदारी भी उसी की है कि उन पर भरोसा करने वाले, और भरोसा नहीं करने वाले मुस्लिम समाज समेत समूची जनता बेखौफ नई सरकार को अपनी सरकार मान सके, क्योंकि दादरी कांड और मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार को लापरवाही और ढिलाई का कसूरवार बताने का मौका बीजेपी के हाथ से जा चुका है...
  • मेरे बेटे ने शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान को बहुत बाद में पहचानना शुरू किया, लेकिन अमिताभ बच्चन को उसने बहुत छोटी उम्र से पहचानना शुरू कर दिया था, और सच्चाई यह है कि परिवार के बाहर का पहला चेहरा अमिताभ बच्चन का ही था, जो उसने पहचाना...
  • कुछ ऐसी बातें और स्वभावगत विशेषताएं होती हैं, जो हमें जीवन में लगातार संघर्षरत रहने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं... मेरी जीवनचर्या में ऐसा ही एक नियम है, किन्हीं भी हालात में हार न मानना, और हालात को सुधारने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना।
  • भारतीयों के लिहाज़ से क्रिकेट वर्ल्डकप की सबसे रोचक जानकारी यह है कि पाकिस्तान कभी भी इस टूर्नामेंट में भारत को नहीं हरा पाया है। दोनों टीमें अब तक कुल पांच बार एक-दूसरे से वर्ल्डकप में भिड़ी हैं, और पांचों बार पाकिस्तान ने मुंह की खाई है।
  • दक्षिण अफ्रीकी कप्तान ग्रीम स्मिथ ने कुल 117 टेस्ट मैच खेले, जिनमें से 109 में वह कप्तान रहे... यह आंकड़ा विश्व रिकॉर्ड है, और मौजूदा खिलाड़ियों में उनके सबसे नज़दीक भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं, जिन्होंने 53 मैचों में कप्तानी की है...
  • दरअसल, सच कहूं तो यह पुरस्कार कपिल देव को काफी पहले मिल जाना चाहिए था, क्योंकि मेरी समझ से आज भारत में क्रिकेट का जो क्रेज़ मौजूद है, उसके पीछे कपिल देव के कुशल नेतृत्व के योगदान को कतई नकारा नहीं जा सकता...
  • जो कांग्रेसी आडवाणी के ब्लॉग के आधार पर कह रहे हैं कि उन्होंने हार कबूल कर ली है, उन्हें ब्लॉग को पढ़ना चाहिए, क्योंकि हार का डर कम से कम मुझे तो उनके आलेख में नहीं दिखाई दिया...
  • आप कहेंगे, इतना कुछ कहा, लेकिन खिलाड़ी का नाम नहीं बताया... यकीन मानिए, नाम लिखने की ज़रूरत ही महसूस नहीं हुई... आप कहिए, ज़रूरत है क्या...?
  • इस समाज को आज अच्छे और समझदार बाप और भाइयों की ज़रूरत है, ताकि 'मां' सुरक्षित और संतुष्ट रहकर जी सके...
  • आश्चर्यजनक रूप से किसी भी कामना के लिए लिंगभेद पूरी तरह खत्म हो जाता है, और भक्त चाहे पुरुष हो या स्त्री, कामनापूर्ति के लिए प्रमुखतः देवियों की ही शरण ली जाती है...
  • मैं नहीं जानता, कोर्ट क्या कहेगी, क्या करेगी... वहां मंदिर बनेगा या मस्जिद... कौन जीतेगा, कौन हारेगा... लेकिन इतना जानता हूं, अगर फसाद हुए तो मेरा-आपका मुल्क हार जाएगा...
  • 'दूर का राही', 'दूर गगन की छांव में' चला गया है, लेकिन मेरा हिन्दुस्तानी दिल हमेशा कहेगा... 'गाता रहे मेरा दिल...'
  • याद रखें, कोई शहर कितना भी सुंदर हो, सड़क पर हादसों में मरते हुए लोग उसे वीभत्स और डरावना बना देते हैं, दोस्तों...
  • हां, यह सही है कि नक्सलियों के लिए हथियार उठा लेने की यह नौबत क्यों आई, इस पर विचार करना, और उस वजह को जड़ से खत्म करना भी हमारा और हमारी सरकार का ही दायित्व है...
  • क्या ऐसा कुछ नहीं हो सकता कि अंतर्तम को झकझोरकर रख देने और गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर कर देने वाली ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके...
  • जो बच्चा आज उनतालीस, उनचास, उनसठ, उनत्तर और उनासी के बीच फर्क नहीं समझेगा, उसके लिए आने वाले दिनों में आम देशवासियों से बात करना, और देश के गौरव को समझना क्योंकर मुमकिन होगा... सो, आइए, भाषागत राजनीति में उलझे बिना ऐसे काम करें, जिससे हिन्दी और समृद्ध, और सशक्त हो...
  • बातचीत या शान्ति-वार्ता से पाकिस्तान के कान पर जूं भी नहीं रेंगती - इसका कितनी बार और सबूत चाहते हैं हम... कब जागेगा इंडिया, एक नई सुबह में, जिसमें आतंकवाद से इस तरह नहीं डरना पड़ेगा...
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