NDTV Khabar
होम | ब्लॉग |   विवेक रस्तोगी 

विवेक रस्तोगी

भाषा से प्यार करना और उसका सम्मान करना विरासत में मिला, और छोटी उम्र से ही अपनी सुनाने, और लिखने का चस्का पत्रकार बना गया. ढाई दशक से अधिक की पत्रकारिता में मीडियम बदलते रहे, लेकिन भाषा से लगाव खत्म नहीं हुआ, जो आज की पीढ़ी, विशेषकर ऑनलाइन मीडियम में दुर्लभ है. मानता हूं कि आनंदित और आंदोलित होने की सूरत में सबसे अच्छा लिखा जा सकता है, सो, कम लिखता हूं. वैसे, विशेषज्ञ किसी भी विषय का नहीं हूं, लेकिन पढ़ने के शौक की बदौलत किसी भी विषय पर कतई कोरा भी नहीं हूं.

  • मेरी सोच कहती है कि छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर हम इस तेज़-रफ़्तार ज़िन्दगी में कुछ रफ़्तार हासिल कर सकते हैं, वरना वे दिन अब ज़्यादा दूर नहीं, हम सब साइकिल से सफर किया करेंगे...
  • मैं आपसे, और अपने-आप से भी, वादा करता हूं, कि मेरा बेटा बालिग़ होने से पहले मेरी कार को हाथ नहीं लगा पाएगा, क्योंकि मैं अपने बेटे से बहुत प्यार करता हूं... आप भी करते हैं न...?
  • किसी को भी बुरा कहने से पहले उसके गुण, अच्छाइयां भी याद कर लें, क्योंकि भगवान रामचंद्र का विरोधी और शत्रु होने के बावजूद रावण 'सिर्फ बुरा' ही नहीं था...
«12

Advertisement