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प्राइम टाइम : हमारी नीतियों में रोजगार को कितनी प्राथमिकता?

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जब गांव-शहर और घर-बाहर हर जगह नौकरी की बात होती रहती है तो फिर मीडिया में नौकरी की बात क्यों नहीं होती है. विपक्ष में रहते हुए नेता बेरोज़गारी का मुद्दा उठाते हैं मगर सरकार में आकर रोज़गार के बारे में बताते ही नहीं है. यह बात हर दल और हर मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री पर लागू होती है. चुनाव के समय के विज्ञापन देखिए, विरोधियों के विज्ञापन में नौकरी प्रमुख होगी, पललायन रोकने की बात होगी, सरकार के विज्ञापन में ये दोनों ही नहीं होते हैं. कितना पलायन रोका और कितनी नौकरियां दीं. भारत के कालेज बेरोज़गारी पैदा करने की फैक्ट्री हैं. दो तरह से. एक तो शिक्षकों के पद ख़ाली हैं, जिसके कारण शिक्षक बन सकने वाले नौजवान बेरोज़गार हैं और दूसरा जब पढ़ाने वाला ही नहीं होगा तो आपका बच्चा रोज़गार पाने के लायक ही नहीं बन पाएगा. अगर यह फोटो क्लियर है तो अब आगे बढ़ते हैं.


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