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चुनावी ब्लॉग

  • मायावती-जोगी ने दिलचस्प बनाया चुनाव...
    छत्तीसगढ़ में एक चरण के चुनाव के बाद बसपा नेता मायावती ने यह साफ किया है कि उनकी पार्टी चुनाव के बाद बीजेपी और कांग्रेस से समान दूरी बनाकर रखेगी. हालांकि उनके ही सहयोगी अजीत जोगी ने एक दिन पहले यह पूछे जाने पर कि क्या जरूरत पड़ी जो बीजेपी को अपना सर्मथन दे सकते हैं. इस पर उन्होंने कहा था कि राजनीति में कुछ भी संभव है मगर बाद में वे अपने बयान से पलट गए. जाहिर है मायावती चुनाव परिणाम से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है. जाहिर है इन चुनावों का 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी काफी असर पड़ने वाला है. सभी पार्टियों को पता है कि अभी तक छत्तीसगढ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर एक फीसदी से भी कम होता है. ऐसे में यहां एक-एक वोट कीमती होता है.
  • कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं तो छत्तीसगढ़ के छात्र कॉलेज जाना ही बंद कर दें...?
    घोषणापत्र देखकर भले जनता वोट न करती हो मगर चुनावों के समय इसे ठीक से देखा जाना चाहिए. दो चार बड़ी हेडलाइन खोजकर हम लोग भी घोषणापत्र को किनारे लगा देते हैं. राजनीतिक दल कुछ तो समय लगाते होंगे, बात-विचार करते होंगे कि क्या इसमें रखा जा रहा है और क्या इससे निकाला जा रहा है, इसी को समझकर चुनावी चर्चाओं में घोषणापत्र को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
  • राजस्थान...गहलोत या पायलट
    राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति की बिसात बिछ चुकी है. इसके साथ ही हमेशा की तरह नेताओं में भी इस पार्टी से उस पार्टी में जाने के लिए भगदड़ मची हुई है...नेताओं को मौसम वैज्ञानिक भी कहा जाता है खासकर चुनाव के संर्दभ में उन्हें चुनाव के ठीक पहले अंदाजा हो जाता है कि ऊंट किस करवट बैठेगा. इसके बाद वह उन पार्टियों के तरफ रुख करते हैं, जिसके बारे में उन्हें लगता है कि इस पार्टी की सरकार बनने वाली है...कुछ ऐसा ही राजस्थान कांग्रेस में हो रहा है...
  • राजस्थान में कांग्रेस की बात उलझी या फिर सुलझी
    राजस्थान में खुद को सत्ता के करीब पा रही कांग्रेस किसी तरह का जोखिम मोल लेने को तैयार नहीं. सचिन पायलट और अशोक गहलोत की महत्वाकांक्षाओं से जूझ रही पार्टी ने अब बीच का रास्ता निकाला है. मध्य प्रदेश के उलट राजस्थान में इन दोनों ही नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए कह दिया गया है.
  • राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावों में फोन बांटने का खेल क्या है?
    हमारे वक्त की राजनीति को सिर्फ नारों से नहीं समझा जा सकता है. इतना कुछ नया हो रहा है कि उसके अच्छे या बुरे के असर के बारे में ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो रहा है. समझना मुश्किल हो रहा है कि सरकार जनता के लिए काम कर रही है या चंद उद्योगपतियों के लिए.
  • हड़बड़ी में गड़बड़ी...
    मध्य प्रदेश चुनावों में प्रचार के दौरान राहुल गांधी की फिसली जुबान उन पर मुसीबत का सबब बनती दिख रही है. राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की एक अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का दावा कर दिया है.
  • मोदी के बाद योगी, बढ़ता जा रहा प्रभाव
    बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तेजी के साथ दूसरे सबसे बड़े चुनाव प्रचारक के रूप में उभर रहे हैं. गुजरात, त्रिपुरा और कर्नाटक में योगी आदित्यनाथ से चुनाव प्रचार कराने के बाद अब बीजेपी ने तीन हिंदी भाषी राज्यों के चुनावों में भी योगी आदित्यनाथ को आगे कर दिया है. बीजेपी के मुताबिक योगी आदित्यनाथ पीएम मोदी के चुनाव मैदान में कूदने से पहले जमीन तैयार करेंगे.
  • 2019 का सेमीफाइनल...
    पांच राज्यों में दिसंबर में चुनाव होने वाले हैं. ये राज्य हैं मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम. इन सभी राज्यों में लोकसभा की 83 सीटें हैं. सीटों की स्थिति देखें तो कुछ इस तरह से है. मध्यप्रदेश-29, राजस्थान -25, छत्तीसगढ़-11, तेलंगाना-17 और मिजोरम में 1 लोकसभा की सीट है.
  • एक-दूसरे के गढ़ों को भेदने में जुटीं कांग्रेस और बीजेपी
    मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों की सियासत सिंधिया घराने के इर्द-गिर्द घूमती है. जहां मध्यप्रदेश में यह घराना बीजेपी और कांग्रेस के बीच बंटा है तो वहीं राजस्थान में बीजेपी के साथ है. इनके गढ़ों में सेंध लगाने की कोशिश होती रहती है. आज इसका बीड़ा राहुल गांधी और अमित शाह दोनों ने उठाया.
  • क्या चुनाव आयोग भाजपा का चुनाव प्रभारी बन गया है?
    इस चुनाव आयोग पर कोई कैसे भरोसा करे. ख़ुद ही बताता है कि साढ़े बारह बजे प्रेस कांफ्रेंस है. फिर इसे तीन बजे कर देता है. एक बजे प्रधानमंत्री की सभा है. क्या इस वजह से ऐसा किया गया कि रैली की कवरेज या उसमें की जाने वाली घोषणा प्रभावित न हो?
  • हाथ में नहीं हाथी...
    मध्य प्रदेश में मायावती ने 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी साथ ही छत्तीसगढ़ में मायावती ने अजित जोगी से हाथ मिलाया है. इस पर कई लोगों को काफी आश्चर्य हुआ कि ऐसा कैसे हो गया और लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि विपक्ष का महागठबंधन टूट गया, यह गठबंधन नहीं लठबंधन है.
  • मायावती को क्यों आया गुस्सा?
    बीएसपी प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को करारा झटका दिया है. मायावती ने छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कांग्रेस से गठबंधन करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस की रस्सी जल गई पर बल नहीं गए.
  • कर्नाटक में जीत के सबके अपने-अपने दावे...
    कर्नाटक में वोटों की गिनती मंगलवार सुबह आठ बजे शुरू हो जाएगी. दोपहर होते-होते साफ हो जाएगा कि कर्नाटक किसका होगा? लेकिन एक्ज़िट पोल के रुझानों ने सबको उलझा दिया. 75 प्रतिशत एक्जिट पोल कहते हैं कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी जबकि 25 प्रतिशत एक्जिट पोल कांग्रेस के आगे रहने की भविष्यवाणी कर रहे हैं.
  • जब नेहरू ने मुझे फोन किया, नेहरू-व्हाट्सऐप की एक खोज के लिए
    रात नेहरू का फोन आया था. अपनी किसी किताब की समीक्षा की बात कर रहे थे. मैं काफी गुस्से में था. उनसे कहने लगा कि आप भगत सिंह से मिलने नहीं गए, पर मुझसे मिलने क्यों नहीं आए. नेहरू ने कहा कि तुमसे मिलता ज़रूर लेकिन तुम ट्रेन से हिन्दुस्तान नहीं आ रहे थे.
  • कर्नाटक बना कुरुक्षेत्र...
    कर्नाटक में दलित और आदिवासी सीटों की संख्या कुल 224 में से 51 है जिनमें 36 दलित और 15 आदिवासी सीटें हैं. 36 दलित सीटों में से कांग्रेस के पास 17, जेडीएस के पास 10 और बीजेपी के पास 6 सीट है. जबकि 15 आदिवासी सीटों में कांग्रेस के पास 9, जेडीएस और बीजेपी के पास एक-एक सीट है.
  • नेहरू से लड़ते-लड़ते अपने भाषणों में हारने लगे हैं नरेंद्र मोदी
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के लिए चुनाव जीतना बड़ी बात नहीं है. वह जितने चुनाव जीत चुके हैं या जिता चुके हैं, यह रिकॉर्ड भी लंबे समय तक रहेगा. कर्नाटक की जीत कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन आज प्रधानमंत्री को अपनी हार देखनी चाहिए. वह किस तरह अपने भाषणों में हारते जा रहे हैं.
  • इतिहास से खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं पीएम मोदी?
    आवश्यकता है ऐसे किसी भी व्यक्ति कि जो नेहरू और भगत सिंह पर गलत-सलत जानकारी रखता हो, या ऐसी जानकारी रखता हो जिसे गलत तरीके से पेश किया जा सके. ऐसे किसी योग्य को तुरंत उन लोगों से संपर्क करना चाहिए जो प्रधानमंत्री के भाषण के लिए रिसर्च करते हैं या फिर सीधे प्रधानमंत्री से ही संपर्क करना चाहिए. जरूरी है कि योग्य व्यक्ति इतिहास के बारे में कुछ नहीं जानता हो या फिर वही जानता हो जो इतिहास में ही न हो.
  • कर्नाटक चुनाव : मठ और जाति हैं हावी
    कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटों में से BJP ने 68 सीटें लिंगायत समुदाय के लोगों को दी हैं, वहीं कांग्रेस ने 49 और JDS ने 41 सीटें इस समुदाय को दी हैं. जबकि दूसरी बड़ी जाति वोक्कालिगा पर JDS की पकड़ है, क्योंकि देवेगौड़ा इसी जाति से आते हैं. JDS ने वोक्कालिगा समुदाय के 55 लोगों को टिकट दिया है, तो कांग्रेस ने 46 और BJP ने 38 सीटें इस समुदाय को दी हैं.
  • कर्नाटक चुनाव पर मेरी अंतिम राय, मेरे हिसाब से यह होने वाला है...
    मेरा मानना है कि कर्नाटक में BJP का जीतना देश के लिए अच्छा होगा. जीत के बाद प्रधानमंत्री दिल्ली आएंगे और कुछ काम करेंगे. अगर हार गए, तो वह अभी से उस राज्य की तरफ चले जाएंगे, जहां चुनाव होने वाले होंगे.
  • राहुल गांधी का पीएम बनने का सपना
    राहुल गांधी ने एक तरह से ऐलान कर दिया है कि 2019 में वे प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं. हालांकि उनके इस बयान का बीजेपी नेता काफी मखौल बना रहे हैं. मगर सबसे बडा सवाल है कि क्या यह संभव है और यदि यह संभव करना है तो कांग्रेस को अकेले 100 से अधिक सीटें जीतनी होंगी.
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