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नोटा


NOTA के जरिए मतदाताओं को नकारात्मक प्रतिक्रिया देने का अधिकार 'NOTA' का अर्थ है 'नन ऑफ द एबव', यानी इनमें से कोई नहीं. ईवीएम पर यह मतदान का विकल्प है, जो मतदाताओं को उनके निर्वाचन क्षेत्र में हर उम्मीदवार को अस्वीकार करने की अनुमति देता है. इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सितंबर 2013 में शुरू किया गया था. यह विकल्प मतदाता को सभी उम्मीदवारों को अस्वीकृत करने की इजाजत देता है. इस विकल्प के उपयोग से मतदाता अपनी नकारात्मक प्रतिक्रिया दे सकता है. 'नोटा' का अर्थ विजयी प्रत्याशी को खारिज करना नहीं है. अपने सितंबर 2013 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही 'NOTA' का विकल्प चुनने वाले मतदाताओं की संख्या किसी भी उम्मीदवार को मिले वोटों से अधिक हो, पर जो उम्मीदवार सबसे अधिक संख्या में वोट हासिल करे उसे निर्वाचित घोषित किया जाए. NOTA का विकल्प चुनकर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को वोट नहीं देने के निर्णय की अभिव्यक्ति तब संभव नहीं है जब किसी सीट पर केवल एक उम्मीदवार विधानसभा या लोकसभा का चुनाव लड़ रहा हो. शीर्ष अदालत के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनावों में, ऐसे मामलों में जहां केवल एक उम्मीदवार हो वहां रिटर्निंग ऑफिसर को धारा 53 (2) के प्रावधानों के अनुसार उस उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित करना होगा.NOTA का चिह्न इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के पैनल में सबसे नीचे या मतपत्र में सबसे नीचे होता है. यह चिह्न अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) ने डिजाइन किया है. इस चिह्न में पेपर पर क्रास का निशान होता है. सात चरणों वाले लोकसभा चुनाव के जरिए 17वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने जाएंगे. सात चरणों का मतदान 11 अप्रैल से 19 मई के बीच हुआ. मतगणना 23 मई को होगी.

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