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अहमदाबाद : ...तो अनजाने में ही जीका की महामारी भुगतने के लिए मजबूर होते लोग

जीका के संक्रमण की जानकारी छुपाने पर अहमदाबाद के बापूनगर इलाके के लोगों में सरकार के खिलाफ भारी गुस्सा

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अहमदाबाद : ...तो अनजाने में ही जीका की महामारी भुगतने के लिए मजबूर होते लोग

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. सरकार पर इलाके में सफाई और स्वास्थ्य को लेकर संजीदगी नहीं बरतने का आरोप
  2. सरकार का कथन- जीका लोगों में भय फैलाता, इसलिए नहीं बताया गया
  3. सफाई में अमीर लोगों के इलाके को अहमियत देने का आरोप
अहमदाबाद: जीका वायरस से ग्रस्त अहमदाबाद के बापूनगर इलाके के लोग सरकार से नाराज हैं. लोगों का आरोप है कि सरकार ने जीका के बारे में जानकारी न देकर उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है. जीका के संक्रमण के बारे में न तो बताया गया न ही स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए समय पर जरूरी कदम उठाए गए. खुशकिस्मती से जीका का प्रकोप महामारी नहीं बन सका वरना इस इलाके के लोगों को प्रशासन की लापरवाही का भारी खामियाजा भुगतना पड़ता.  

निकिता पिछले 20 सालों से बापूनगर के गोललीमडा इलाके में रहती हैं. जब भी बाहर निकलती हैं कचरे की बदबू से मुंह ढंककर चलना पड़ता है. उनका आरोप है कि सरकार ने उनके इलाके में कभी भी सफाई और स्वास्थ्य को लेकर संजीदगी नहीं दिखाई. यह भी आरोप है कि जिस वक्त जीका वायरस सामने आने की बात आई तब भी इस इलाके में सफाई या स्वास्थ्य को लेकर कोई काम नहीं हुआ था. सरकार ने कहा है कि जीका लोगों में भय फैलाता इसलिए लोगों को नहीं बताया लेकिन एहतियात के सभी कदम उठाए गए थे. करीब 1.25 लाख लोगों के ब्लड सेम्पल लिए गए थे और इस पूरे इलाके में मच्छरों के नाश के लिए बड़े पैमाने पर कार्यवाही की गई थी.

हालांकि लोगों का आरोप है कि इस इलाके को कभी भी प्रशासन ने महत्व नहीं दिया. पिछले कई महिनों से इस इलाके में गंदगी बरकरार है. मच्छरों की उत्पत्ति के स्त्रोत बिखरे रहते हैं लेकिन प्रशासन कभी सफाई नहीं करता है. कई गलियों के मुंहाने पर कचरे के ढेर पड़े रहते हैं. सरकार रोज-ब-रोज कचरा उठाने का मूलभूत काम भी नहीं करती क्योंकि यह गरीब इलाका है.

स्थानीय निवासी नवीन मोरधरा का आरोप है कि यह इलाका गरीब है इसलिए प्रशासन इसकी तरफ नजर नहीं घुमाता. सफाई वगैरह के ज्यादातर काम शहर के पश्चिमी इलाके में होते हैं, जहां शहर के अमीर लोग रहते हैं.

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पूरे मसले पर म्युनिसिपल कार्पोरेशन को भी अंधेरे में रखा था. इसीलिए यहां के स्थानीय काउंसलर कांग्रेस के जेडी पटेल का भी आरोप है कि जब पता ही नहीं था तो प्रशासन ने सर्वेलेंस कब किया और जांच कब की. उनके मुताबिक इस पूरे इलाके में जीका वायरस के संक्रमण के वक्त भी कोई स्वास्थ्य एहतियात बरती ही नहीं गई. जो भी आंकड़े बता रहे हैं अधिकारियों ने वे टेबल पर बैठकर बनाए हैं.

लोगों का कहना है कि सरकार ने यह जानकारी छुपाकर उनके साथ धोखा किया है. लोग खुशकिस्मत रहे कि रोग और फैला नहीं और यह एक महामारी नहीं बन पाया.


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