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आनंदीबेन पटेल के लिए अच्छी खबर, गांधीनगर पालिका चुनावों में कांग्रेस-बीजेपी के बीच टाई

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आनंदीबेन पटेल के लिए अच्छी खबर, गांधीनगर पालिका चुनावों में कांग्रेस-बीजेपी के बीच टाई

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल (फाइल फोटो)

अहमदाबाद:

सबकी सांसें अटकी थीं, लेकिन आखिर में गुजरात की राजधानी गांधीनगर के परिणाम टाई रहे। शहर के 8 वॉर्ड की 32 सीटों में से कांग्रेस और बीजेपी दोनों को ही 16-16 सीटें मिलीं। इन परिणामों से बीजेपी को थोड़ी राहत मिली है, क्योंकि इस बार पाटीदार आंदोलन के चलते उसे हार का भय सता रहा था।

बीजेपी का प्रदर्शन सुधरा
पिछले चुनावों में कांग्रेस को 18 सीटें मिली थी और बीजेपी को 15 सीटें। हालांकि 3 सदस्य कांग्रेस से बीजेपी में चले गए थे, जिससे पिछले दो सालों से बीजेपी की ही सत्ता थी। बीजेपी के लिए अच्छी खबर ग्रामीण इलाकों से आई। गांधीनगर में चुनावी मुकाबला टाई होने के साथ ही बीजेपी अन्य ग्रामीण उपचुनावों की भी सफलता गिना रही है। बीजेपी ने 10 तालुका पंचायत सीट में से 7 में जीत दर्ज की है। पहले कांग्रेस की यहां 7 सीटें थीं। दो जिला पंचायत सीटों में से जहां पहले कांग्रेस काबिज थी, उनमें से बीजेपी एक सीट पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही।

रुझानों में उतार-चढ़ाव
शुरुआत से कांग्रेस जीत को लेकर ज्यादा उत्साहित थी। करीब 11 बजे जो रुझान थे, उनमें 14 सीटों पर कांग्रेस और 10 सीटों पर बीजेपी आगे थी। इसके बाद बीजेपी के नेता मतगणना स्थल से नदारद हो गए थे, लेकिन जब अन्य रुझानों में मामला कांग्रेस 15 और बीजेपी 13 सीटों पर आगे चल रही थी और सिर्फ एक वॉर्ड की गिनती बची, तो बीजेपी की जान में जान आई। क्योंकि अंतिम वार्ड बीजेपी का गढ़ माना जा रहा था।


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अब यहां से नदारद होने की बारी कांग्रेसी नेताओं की थी। लेकिन जनता को कोई नहीं जान पाता। अंतिम वार्ड में बीजेपी की पैनल टूटी और 4 में से 1 सीट कांग्रेस को मिली, जबकि तीन अन्य बीजेपी की। और मामला बराबरी पर छूटा। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि बीजेपी ने गांधीनगर में सत्ता, बाहुबल और पैसों का दुरुपयोग किया, फिर भी जीत नहीं पाई, इसलिए इसे कांग्रेस की जीत ही मानी जानी चाहिए।

आनंदीबेन पटेल के लिए राहत
हालांकि ये परिणाम बीजेपी से ज्यादा मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के लिए राहत देनेवाले होंगे, क्योंकि पिछले स्थानीय चुनावों में ग्रामीण इलाकों में करारी हार और पाटीदार आंदोलन को समेटने में नाकाम रहने पर पार्टी में अंदरूनी तौर पर उनको मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की चर्चा थी। लेकिन आम तौर पर कांग्रेस का गढ़ समझे जानेवाले गांधीनगर में परिणाम टाई रहने से अब उनकी स्थिति मजबूत हो गई है।



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