गुजरात : उना में अस्मिता रैली के बाद हिंसा में कई दलित घायल

गुजरात : उना में अस्मिता रैली के बाद हिंसा में कई दलित घायल

उना में दलितों की अस्मिता रैली का दृश्य

नई दिल्ली:

उना में अस्मिता रैली का दिन दलितों के लिए आतंक का दिन रहा. 5 अगस्त को अहमदाबाद से निकली दलित अस्मिता यात्रा का समापन उना में हुआ, करीब 10,000 दलित पूरे देश से जुटे, लेकिन उसके बाद जो हुआ वो उस इलाके के दलितों में दोबारा डर फैलाने वाला था. रैली से वापस जा रहे दलितों पर कई जगह हमले हुए. दिनभर में हुई हिंसक झड़पों में करीब 25 से ज्यादा दलितों को चोटें आईं हैं.

रैली में हिस्सा लेकर नाथाभाई मकवाणा और उनके 10 साथी वापस जा रहे थे तो सामतेर गांव के पास कथित गौरक्षकों ने उनकी गाड़ी दोपहर करीब 12.30 बजे रोक ली. उन पर हॉकी, लोहे के सरिये, पत्थर वगैरह से हमला किया गया. करीब 60 लोगों ने उन्हें घेरकर हमला किया. नाथाभाई का आरोप है कि हमले से 50 फीट दूरी पर ही पुलिस हथियार लेकर बैठी थी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया. साथ में सफर कर रहे 11 में से 9 लोगों को चोटें आईं हैं. बड़ी मुश्किल से जान बचाकर भाग पाये. 9 में से तीन लोगों को ज्यादा चोटें लगी होने की वजह से अहमदाबाद सिविल हस्पताल में भर्ती किया गया है.

पूरी अस्मिता रैली का नेतृत्व कर रहे युवा नेता जिग्नेश मेवाणी भी घायल लोगों से मिलने अहमदाबाद सिविल हस्पताल पहुंचे. मेवाणी का आरोप है कि दलितों पर हमले तीन दिन से हो रहे हैं. जब अस्मिता रैली उना के करीब पहुंची तभी से उन पर हमले हो रहे हैं. उन्होंने रैली से एक रात पहले भी खुद पुलिस स्टेशन जाकर आला अधिकारियों से दलितों को सुरक्षा प्रदान करने की गुजारिश की थी, लेकिन कुछ हुआ नहीं. किसी हमलावर को गिरफ्तार तक नहीं किया गया जिसकी वजह से दबंगों के हौसले बढ़ गए और ज्यादा हमले हुए. घायल लोग अहमदाबाद के सिविल अस्पताल, भावनगर और महुवा के अस्पताल में भर्ती हैं.

दूसरी ओर पुलिस कह रही है कि उन्होंने जरूरी कार्रवाई की और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया. गीर सोमनाथ जिले के एसपी एचआर चौधरी का कहना है कि सामतेर में शाम तक प्रदर्शनकारी लोग रास्ता जाम किए थे और सड़क खाली नहीं कर रहे थे जिसकी वजह से कार्रवाई की गई. यहां भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कुल 46 राउन्ड टीयर गैस और 6 राउन्ड गोलियां भी दागी गईं. पूरी घटना में कुछ पुलिसकर्मी समेत करीब 10 लोग घायल हुए. यहां से करीब 20 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया.

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लेकिन, दलितों का आरोप है कि अगर कार्रवाई दो दिन पहले की होती तो दलितों पर हमले नहीं होते और वो घायल नहीं होते. इन घटनाओं के चलते गीर सोमनाथ जिले के उना और आसपास के इलाकों में दलितों में डर का माहौल बन गया है.

महत्वपूर्ण है कि 11 जुलाई को कुछ दलितों की कथित गौरक्षकों ने पिटाई की थी. उन्हें खुलेआम पीटा था, घटना का वीडियो भी बनाया गया था और उन्हें पुलिस थाने तक मारते-मारते परेड भी कराई थी. ये घटना सामने आने के बाद से ही पूरे देश में दलितों में आक्रोश है. उसी घटना के विरोध में दलित अस्मिता रैली निकाली गई थी.