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हार्दिक पटेल ने डेढ़ साल बाद की अहमदाबाद में रैली, कहा- पाटीदारों के आरक्षण के लिए आंदोलन जारी रहेगा

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हार्दिक पटेल ने डेढ़ साल बाद की अहमदाबाद में रैली, कहा- पाटीदारों के आरक्षण के लिए आंदोलन जारी रहेगा

17 जनवरी को गुजरात लौटने से पहले हार्दिक पटेल राजस्थान के उदयपुर में रह रहे थे (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. 25 अगस्त, 2015 की विशाल रैली के बाद अहमदाबाद में हार्दिक ने की पहली जनसभा
  2. 'सत्ताधारी पार्टी ने हमारे आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की'
  3. 'पटेल समुदाय को एकजुट होने की जरूरत'
अहमदाबाद: पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने डेढ़ साल से ज्यादा वक्त के बाद अहमदाबाद में अपनी पहली रैली में कहा कि आरक्षण के लिए आंदोलन जारी रहेगा और पाटीदार समुदाय को इसके लिए मिलकर लड़ने की जरूरत है. हार्दिक ने कहा, हमारे समुदाय में विभाजन है. हमें अपने आंदोलन को मजबूत करने के लिए एकजुट होने की जरूरत है. उन्होंने कहा,  पिछले 18 महीने में सत्ताधारी पार्टी ने हमारे आंदोलन को तोड़ने की बार-बार कोशिश की. हमारे खिलाफ राजद्रोह के मामले दर्ज किए गए, लेकिन हम टूटने वाले नहीं है, आरक्षण आंदोलन जारी रहेगा और कोई भी इसे नहीं रोक सकता है. हार्दिक ने कहा कि आंदोलन पटेलों की भविष्य की पीढ़ियों के लिए है, क्योंकि आंदोलन से वे लाभान्वित होंगे.

वह 2015 में अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण के तहत पटेलों को आरक्षण की मांग के लिए गुजरात में पाटीदारों को एकजुट करने के बाद सुखिर्यों में आए थे. 25 अगस्त, 2015 की विशाल रैली के बाद शहर में हार्दिक की यह पहली जनसभा थी. उस दिन यहां जीएमडीसी मैदान से हार्दिक को हिरासत में लेने के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में हिंसा भड़क उठी थी और पुलिस के साथ संघर्ष में करीब 10 युवकों की मौत हो गई थी.

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बाद में उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था और पिछले साल 15 जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट द्वारा सर्शत रिहा करने से पहले उन्हें जेल में रहना पड़ा था. अदालत ने उन्हें रिहा करने पर यह शर्त लगाई थी कि वह छह महीने तक राज्य से बाहर रहेंगे जो 17 जुलाई से शुरू हुआ था. 17 जनवरी को गुजरात लौटने से पहले हार्दिक पटेल राजस्थान के उदयपुर में रह रहे थे.

हार्दिक ने अपने समुदाय को याद दिलाया कि उन्होंने गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल को उचित सम्मान नहीं दिया जो उनके समुदाय के हैं. उन्होंने दावा किया, 'केशूभाई के समय में गुजरात का कर्ज 36,000 करोड़ रुपये था, लेकिन अब यह तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. यह किस तरह का विकास है?' केशूभाई ने राज्य के विकास की कई योजनाओं को शुरू किया, लेकिन हमारे समुदाय ने उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया.


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