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देश में पहली बार सामने आए जीका वायरस के मामले से सनसनी, लेकिन डरने की बात नहीं

जीका वायरस मच्छर से फैलता है और इसके लक्षण डेंगू और चिकनगुनिया की तरह ही होते हैं. जिसमें बुखार आना, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल हो जाना औऱ शरीर पर लाल निशान हो जाना वगैरह होते हैं.

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देश में पहली बार सामने आए जीका वायरस के मामले से सनसनी, लेकिन डरने की बात नहीं

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

अहमदाबाद: विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने जब दुनिया के सामने रखा कि भारत में भी जीका वायरस के केस सामने आए हैं तो स्वाभाविक रूप से सनसनी फैल गई. लेकिन ये जानकारी राज्य प्रशासन के सामने पहले से थी और प्रशासन के मुताबिक अब इसका खतरा समाप्त हो गया है. आधिकारीक जानकारी के मुताबिक सबसे पहले पिछले साल नवम्बर में 34 साल की एक गर्भवती महिला सिविल अस्‍पताल में दाखिल की गई थी. जब उसे बुखार आया तो स्वाभाविक तौर पर उसके खून की जांच के लिए सैंपल भेजे गये. लेकिन उसका सैंपल चिकनगुनिया और डेंगू के लिए नेगेटिव पाया गया. और जांच करवाने पर जनवरी 4 को पहली रिपोर्ट आई जिसमें उसे जीका वायरस होने की पुष्टी हुई. गुजरात के अहमदाबाद में तीन जीका वायरस के कंफर्म केस सामने आए थे. ये सभी मामले इसी साल जनवरी में सामने आये थे.

पॉजिटिव पाए गए मरीज़ों में दो गर्भवती महिलाएं भी थीं. जीका वायरस के मामले सामने आने के बाद अहमदाबाद के बापूनगर इलाके में करीब 1.25 लाख लोगों का सर्वे करके उनका स्वास्थ्य परिक्षण किया गया था लेकिन अन्य किसी में भी जीका वायरस नहीं पाया गया था. प्रशासन कहता है कि अब कोई डर नहीं है. सभी लोग रोगमुक्त हो गये हैं और सामान्य ज़िंदगी जी रहे हैं. गुजरात के मुख्य सचिव जे एन सिंह ने बताया कि वो डर फैलाना नहीं चाहते थे और उनके पास इलाज के लिए अच्छे डॉक्टर थे और जांच के लिए पर्याप्त मशीनरी थी इसलिए इसकी जांच करवाई गई और रोगग्रस्त लोगों का इलाज किया गया.

आम तौर पर जीका वायरस से ग्रस्त महिला के बच्चे के स्वास्थ्य पर असर होने की संभावना होती है. लेकिन इन दोनों ही मामलों में बच्चे सामान्य रूप से स्वस्थ रहे थे. जीका वायरस मच्छर से फैलता है और इसके लक्षण डेंगू और चिकनगुनिया की तरह ही होते हैं. जिसमें बुखार आना, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल हो जाना औऱ शरीर पर लाल निशान हो जाना वगैरह होते हैं. अब तक दुनिया के 67 देशों में ये रोग देखा गया है, भारत में हालांकि ये पहले मामले हैं. डॉक्टरी के व्यवसाय से जुड़े लोग कह रहे हैं कि अगर राज्य सरकार ने समय रहते आगाह किया होता तो डॉक्टरों और लोगों में बचाव को लेकर ज्यादा सतर्कता रहती.

अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रग्नेश वछराजानी का कहना है कि राज्य सरकार ने अगर इसकी जानकारी सार्वजनिक की होती तो ज्यादा अच्छा रहता और डॉक्टर भी ज्यादा चौंकन्ने होते और ज्यादा सावधानी बरतते. वैसे तो पुराने मामले हैं औऱ ये सभी स्वस्थ हो गये हैं अब कोई खतरा भी नहीं है. लेकिन आस-पास मच्छरों की उत्पत्ति रोककर इलाज से बचाव ही अच्छा है की नीति आम लोगों औऱ प्रशासन दोनों को ही अपनानी चाहिए. राज्य सरकार भी छुपाये नहीं लेकिन लोगों में सतर्कता बढ़ाये ये भी जरूरी है.


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