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राजीव पाठक की कलम से : जारी है चुटकियों का दौर, बुरा न मानो चुनाव है

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राजीव पाठक की कलम से : जारी है चुटकियों का दौर, बुरा न मानो चुनाव है
गांधीनगर:

पिछले कुछ समय से दिल्ली के चुनावी दंगल के लिए प्रचार अपने चरम पर है। रोज़ अलग-अलग नेता भाषण दे रहे हैं, और बहुत गंभीर बातें की जा रही हैं। लेकिन सभी पार्टियों का एक बहुत बड़ा तबका है जो एक ख़ुफ़िया कैंपेन चलाता है। सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह से चुटकी ली जाती है, जोक्स कहे जाते हैं विरोधी पार्टी के लोगों और नेताओं के लिए। दिल्ली में भी यही हुआ, आइए जानते हैं कार्यकर्ताओं के क्रिएटिव दिमाग से उपजी ऐसी ही कुछ चुटकियां जो दिल्ली के चुनावी दंगल में अंदर ही अंदर धूम मचा रही हैं।

महत्वपूर्ण यह है कि इसमें भी कांग्रेस बहुत पीछे है और आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ही ज़्यादा सक्रिय दिखते हैं।
सबसे पहले तो जब शाज़िया इल्मी ने आप छोड़ी और बीजेपी में शामिल हो गईं तो बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, योगेन्द्र यादव और कुमार विश्वास की तस्वीर दिखाकर ट्वीट करना शुरू कर दिया की 'चार बच गए लेकिन पार्टी अभी बाकी है।'

जवाब देने में आप के कार्यकर्ता भी पीछे नहीं रहनेवाले थे। उन्होंने भी चुटकी लेना शुरू किया कि शाज़िया ने आप छोड़कर बीजेपी में जुड़ने पर कहा कि आम आदमी पार्टी में उनकी पूछ नहीं हो रही थी, ये सुनकर आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी हंस पड़े।  

जहां बीजेपी के केजरीवाल को उपद्रवी गोत्र का बताने के मसले पर बवाल उठ रहा है, वहीं बीजेपी कार्यकर्ता अरविन्द केजरीवाल के आंदोलन में शामिल होने और उनके धरना राजनीति पर चुटकी लेते हुए लिखते हैं कि जब केजरीवाल की पत्नी ने थाली में दाल और भात परोसा तो केजरीवाल ने कहा, मैं खाना नहीं खाऊंगा, ये दोनों मिले हुए हैं।

इस कैंपेन में आम आदमी पार्टी बहुत ज़ोर लगा रही है। उनकी तरफ से ये व्हाट्स ऐप मैसेज भेजा गया कि बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवार तब बौखला जाते हैं जब वो प्रचार के लिए जाते हैं और जनता उन्हें जवाब देती है कि हम वोट 'आप' को ही देंगे।

मुझे सबसे बढ़िया तो उस दिन लगा जब बीजेपी ने किरण बेदी का नाम अपने मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित कर दिया। आम लोगों ने चुटकी ली कि देर रात अन्ना हज़ारे ने केजरीवाल और किरण बेदी को फ़ोन करके कहा कि मुबारक हो हमारा आंदोलन कामयाब हो गया। पार्टी कोई भी जीते मुख्यमंत्री हमारा होगा।

इस तरह के कैंपेन ही हैं जो चुनाव को थोड़ा और रसीला बना देते हैं और आम लोगों को गंभीर चुनावों में थोड़ी सी मस्ती का तड़का लगता है तो थोड़ा प्रचार का स्वाद आता है। और हमको ये सब इसलिए आता रहता है कि गुजरात मोदी का होम स्टेट है इसलिए भाजपाई यहाँ ज़्यादा अग्रेस्सिव रहते हैं और एग्जिट पोल्स में कड़ी लड़ाई के चलते आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का उत्साह भी बढ़ा हुआ है।

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