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पश्चिम बंगाल : ममता बनर्जी की बादशाहत पर आज आएगा ‘जनादेश’

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पश्चिम बंगाल : ममता बनर्जी की बादशाहत पर आज आएगा ‘जनादेश’

ममता बनर्जी (फाइल फोटो)

कोलकाता:

पश्चिम बंगाल में गुरुवार को 294 सीटों के लिए मतों की गणना शुरू होने के साथ ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य पर ममता ‘दीदी’ की बादशाहत कायम रहेगी या वाममोर्चा और कांग्रेस गठबंधन ‘परिवर्तन’ की बयार लाने में कामयाब होगा।

उम्मीद है कि दोपहर 12 बजे तक विजेताओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी और यह साफ हो जाएगा कि पश्चिम बंगाल में ममता दीदी की पकड़ बनी हुई है या वाममोर्चा अपनी पुरानी हैसियत वापस पाने में सफल रहा, जिसका कांग्रेस के साथ गठबंधन है।

294-सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक-एक गणना प्रेक्षक नियुक्त किया गया है। इलेक्ट्रानिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीआईएल) के इंजीनियर भी गणना केंद्रों पर उपस्थित हैं, ताकि किसी तरह की तकनीकी दिक्कत होने पर वे तुरंत उसे ठीक कर सकें। केन्द्रीय सुरक्षा बलों की 78 कंपनियां मतदान मशीनों की सुरक्षा में तैनात की गई हैं। पश्चिम बंगाल में इस बार का विधानसभा चुनाव इस मायने में ख़ास है कि भारतीय जनता पार्टी भी पूरे दमख़म के साथ मैदान में उतरी है और इसलिए सियासी लड़ाई और दिलचस्प हो गई है।

पश्चिम बंगाल सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव लड़ रही है और उसने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं वाममोर्चा एवं कांग्रेस के बीच गठबंधन है जहां वाममोर्चा मोटे तौर पर 200 सीटों पर और कांग्रेस करीब 80 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। चुनाव में पहली बार ऐसे 9776 मतदाताओं को अपने मताधिकार के प्रयोग का हक मिला जो भारत और बांग्लादेश के बीच क्षेत्र की अदला बदली के बाद भारत के नागरिक बने।


राज्य में चुनाव प्रचार की कमान तृणमूल कांग्रेस की ओर से जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संभाली, वहीं कांग्रेस की ओर से स्थानीय नेताओं के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने और वाममोर्चा से बुद्धदेव दासगुप्ता, विमान बोस, सीताराम येचुरी समेत कई दिग्गजों ने प्रचार किया। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई नेताओं ने प्रचार किया।

तृणमूल कांग्रेस को शारदा घोटाले और अपने कुछ नेताओं के कथित नारद स्टिंग में फंसने जैसे मुद्दे से रूबरू होना पड़ा। तृणमूल के प्रतिद्वन्द्वी दलों ने इसे प्रचार का मुद्दा बनाया। कोलकाता शहर में बीचोंबीच एक फ्लाईओवर का गिर जाना भी चुनावी मुद्दा रहा। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण, बिजली की अच्छी उपलब्धता, छात्राओं को साइकिल और दो रुपये में एक किलो चावल जैसे कार्यक्रम को पेश किया। वाममोर्चा-कांग्रेस ने तालमेल करके सत्तारूढ़ तृणमूल के सामने चुनौती पेश की और अनेक मुद्दों पर ममता बनर्जी की पार्टी को घेरा।

पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के पास 184 सीटें हैं। कांग्रेस 42 विधायकों के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पास 40 विधायक हैं।

बहरहाल, एग्जिट पोल के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन नहीं होने जा रहा। ममता बनर्जी सत्ता में बनी रहेंगी।

एबीपी आनंद ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को 178 सीटें मिलने की संभावना जताई है। पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल को 184 सीटें मिली थीं। वाम-कांग्रेस गठबंधन को 110 सीटें मिलने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। वामपंथी पार्टियों और कांग्रेस को पिछले चुनाव में कुल 103 सीटें मिली थीं, लेकिन पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस का गठबंधन था।

इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया ने 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल को 233-253 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की है जबकि वाम-कांग्रेस गठबंधन को महज 38 से 51 सीटें मिलने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। भाजपा एवं अन्य को 5-5 सीटें मिलने की संभावना है।

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टाइम्स नाउ-सी वोटर ने तृणमूल कांग्रेस को 167, वामपंथी पार्टियों को 75 और कांग्रेस को 45 सीटें मिलने की संभावना जताई है। इसने भाजपा को 4 और अन्य तीन सीटें मिलने की संभावना जताई।

टुडेज चाणक्य ने तृणमूल को 210 जबकि वाम-कांग्रेस गठबंधन को 70 और भाजपा को 14 सीटें मिलने का पूर्वानुमान किया है।



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