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ईवीएम से छेड़छाड़ के मायावती के दावे को चुनाव आयोग ने किया खारिज

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ईवीएम से छेड़छाड़ के मायावती के दावे को चुनाव आयोग ने किया खारिज

खास बातें

  1. मायावती ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था
  2. बैलेट पेपर के आधार पर दोबारा चुनाव की मांग की थी
  3. चुनाव आयोग ने मायावती के आरोपों का कोई आधार नहीं
नई दिल्ली / लखनऊ: चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से छेड़छाड़ के बसपा सुप्रीमो मायावती के दावे को खारिज करते हुए कहा कि बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके फिर से मतदान कराने की उनकी मांग पूरी करने योग्य नहीं है. आयोग ने उन यांत्रिक एवं इलेक्ट्रॉनिक कदमों के बारे में भी जानकारी दी जो वह ईवीएम के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए उठाता है. उसने कहा कि न्यायपालिका ने भी लगातार चुनावों में मशीनों के इस्तेमाल को समर्थन दिया है.

आयोग ने मायावती से कहा, 'उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड चुनावों में राजनीतिक दलों एवं उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया. अत: आयोग को आपके लगाए आरोपों का कोई आधार नजर नहीं आता और आपके पत्र में किया अनुरोध कानूनी रूप से मानने योग्य नहीं है.'

उसने कहा कि हालांकि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ किए जा सकने के आरोप लगाने वालों को आयोग ने एक से अधिक बार यह बात साबित करने का मौका दिया है, लेकिन कोई भी यह साबित नहीं कर पाया कि देश की चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती है. इससे पहले मायावती ने चुनाव आयोग से अपील की थी कि वह मतगणना और परिणाम रोक दे और पारंपरिक पेपर बैलेट का इस्तेमाल करके फिर से चुनाव कराए.

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मायावती ने पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं को चुनौती देते हुए कहा था कि वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी की गई है. वोटिंग मशीन का चुनाव रद्द कराकर पुरानी व्यवस्था बैलेट पेपर से चुनाव कराएं, दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा.' उन्होंने कहा, ... मैं खुली चेतावनी देती हूं यदि वे सही मायने में ईमानदार हैं तो मुख्य चुनाव आयोग को लिखकर दें कि इस चुनाव में उनको सही वोट पड़ा है. यदि इनमें थोड़ी सी भी ईमानदारी है तो घबराना नहीं चाहिए और बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराएं.'

मायावती ने संवाददाताओं से कहा, 'मुस्लिम बहुल इलाकों में भी ज्यादातर वोट भाजपा को ही चले गए, जिससे इस आशंका को और बल मिलता है कि वोटिंग मशीनों को अवश्य ही मैनेज किया गया है. जिस भाजपा ने उत्तर प्रदेश में, जहां मुस्लिम समाज का 18 से 20 प्रतिशत वोट है, एक भी टिकट मुसलमान को ना दिया हो, उसके बावजूद मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम समाज का वोट भाजपा को चला जाए, गले के नीचे नहीं उतर रहा है.'
(इनपुट एजेंसी से)


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