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किस तरह अमित शाह ने केंद्र के 2 दर्जन मंत्रियों को वाराणसी में काम पर लगाया

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किस तरह अमित शाह ने केंद्र के 2 दर्जन मंत्रियों को वाराणसी में काम पर लगाया

अमित शाह और उनकी टीम बनारस में मौजूद है

वाराणसी: करीब एक हफ्ते से वाराणसी का शहर बीजेपी प्रमुख अमित शाह और केंद्र के दो दर्जन वरिष्ठ मंत्रियों का ठिकाना बना हुआ है. यूपी विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के लिए पूर्वी यूपी में जोर शोर से चुनावी अभियान चलाया जा रहा है. पीएम मोदी जो कि वाराणसी से सांसद हैं, पिछले तीन दिन से बनारस में रोड शो कर रहे हैं.

विरोधी पार्टियों ने बीजेपी की इस कोशिश को घबराहट करार दिया है, वहीं बीजेपी ने इस आलोचना को दरकिनार कर दिया है. बीजेपी का इरादा पूर्वी यूपी की 102 सीटों पर कब्ज़ा जमाने का है, जबकि राज्य के जाट बहुल पश्चिमी इलाके में वोटर बीजेपी से आरक्षण और नोटबंदी से नाराज़ दिखाई दिए हैं जिसकी वजह से पार्टी की स्थिति कमजोर नजर आ रही है.

इसके अलावा बीजेपी द्वारा पुराने वफादारों को अनदेखा कर नए चेहरों को टिकट देने से पार्टी में मची आंतरिक कलह भी अमित शाह और उनकी टीम के लिए किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ रही है. केंद्रीय मंत्री, छोटे छोटे समूह में घर-घर जाकर वोटरों से बात कर रहे हैं.

इस बीच केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बनारस के व्यापारियों से मुलाकात की और उन्हें नोटबंदी से होने वाले लंबे फायदों से अवगत करवाया. बता दें कि व्यापारी वर्ग जिसे बीजेपी का खाटी समर्थक कहा जाता है, पार्टी के नोटबंदी के फैसले से नाराज़ चल रहा है. इसके अलावा व्यापारी वर्ग इस साल से लागू होने वाले जीएसटी को लेकर भी चिंतित है और जेटली ने इस टैक्स सुधार कार्यक्रम के फायदे पर भी इन सब से बातचीत की है.

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उधर वाराणसी के डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की है जो इस समुदाय के साथ बातचीत का काम कर रहे हैं. वह होम्योपैथ एसोसिएशन से मिले जिनके सदस्यों को शिकायत थी कि दिल्ली में उन्हें मंत्री से मिलने के लिए वक्त नहीं दिया जा रहा था. इनके अलावा कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी को महिला वोटरों से बात करने की जिम्मेदारी दी गई है. रवि शंकर प्रसाद की अगुवाई में चार बड़े मंत्रियों के एक गुट को लोकप्रिय राम मिष्ठान भंडार की कचौड़ी सब्ज़ी खाते हुए लोगों से घुलते मिलते देखा गया.

ये सभी मंत्री 20-30 लोगों के समूह से बात करने के लिए आसानी से उपलब्ध हैं. यही नहीं विरोधी पार्टी से कोई इस तरफ आना चाहता है तो उससे भी कैमरे से अलग हटकर बातचीत की संभावना बनी हुई है. छोटी जाति के सदस्यों की समस्याएं भी सुनी जा रही हैं और उनका तुंरत निदान भी किया जा रहा है. वाराणसी के नागरिक अशोक कपूर मानते हैं कि यह सब पीएम के संसदीय क्षेत्र होने की वजह से मुमकिन हुआ है. हालांकि सभी ये जानने के लिए इच्छुक हैं कि 11 मार्च को यूपी के नतीजे घोषित होने के बाद भी क्या ये सभी मंत्री इतनी ही पहुंच में होने वाले हैं.


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