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बीजेपी नेता सुब्रमण्‍यन स्‍वामी ने ट्रंप की तरह यूपी में मायावती के जीतने की भविष्‍यवाणी की!

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बीजेपी नेता सुब्रमण्‍यन स्‍वामी ने ट्रंप की तरह यूपी में मायावती के जीतने की भविष्‍यवाणी की!

सुब्रमण्‍यन स्‍वामी ने हालांकि बाद में कहा कि ऐसा गलती से हो गया.

खास बातें

  1. स्‍वामी ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि लापरवाही से ऐसा हुआ
  2. वह दरअसल मायावती की जगह नरेंद्र मोदी (नमो) लिखना चाहते थे
  3. पिछले दिनों राहुल गांधी ने मोदी की ट्रंप से तुलना की थी
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अक्‍सर अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले बीजेपी नेता और सुब्रमण्‍यन स्‍वामी ने यूपी चुनावों में मद्देनजर ऐसी भविष्‍यवाणी की है जिससे उनकी पार्टी असहज हो सकती है. दरअसल बुधवार शाम उन्‍होंने बीजेपी की धुर विरोधी बसपा सुप्रीमो मायावती के यूपी में जीतने के कयास लगाए. सिर्फ इतना ही नहीं उन्‍होंने यहां तक लिख दिया कि जिस तरह अमेरिका में डोनाल्‍ड ट्रंप ने जीत हासिल की, कमोबेश वैसे ही अंदाज में मायावती को जीत हासिल होगी. उनके ट्वीट के तहत बाद सोशल मीडिया पर जब इसकी चर्चा शुरू हो गई तो कुछ देर बाद ही उन्‍होंने सफाई देते हुए दूसरा ट्वीट कहा कि दरअसल यूपी चुनावों से जुड़े अपने ट्वीट में मैं नमो(नरेंद्र मोदी) कहना चाहता था लेकिन लापरवाही में मायावती लिख दिया. गलती के लिए खेद है. उसके कुछ समय बाद उन्‍होंने अपना पहला वाला ट्वीट हटा दिया.
 


लेकिन सोशल मीडिया पर उनके पहले ट्वीट पर ही लोगों ने प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं. संदीप देशपांडे ने लिखा कि स्‍वामी अपने चिर-परिचित अंदाज में हैं.
 
  दरअसल स्‍वामी की टिप्‍पणी को पिछले दिनों राहुल गांधी के बयान से जोड़कर देखा जा रहा है. नौ फरवरी को बुलंदशहर में एक रैली के दौरान राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से उनकी तुलना की थी. वहां उन्‍होंने कहा था कि अमेरिका ने तो हाल ही में डोनाल्‍ड ट्रंप को चुना है लेकिन भारत ने मोदी के रूप में ट्रंप को ढाई साल पहले ही चुना था.

गौरतलब है कि मायावती ने इस बार यूपी चुनावों में दलित-मुस्लिम सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को अपनाते हुए दांव खेला है. इसके चलते तकरीबन 100 सीटों पर मुस्लिम प्रत्‍याशी चुनाव लड़ रहे हैं और उसके बाद दूसरे नंबर पर 87 सीटों पर दलित प्रत्‍याशी हैं. मायावती के राजनीतिक भविष्‍य के लिए यह चुनाव बेहद अहम है क्‍योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उनका परंपरागत वोटर कुछ हद तक उनसे छिटक कर बीजेपी के खाते में चला गया था.इसी वजह से राजनीतिक विश्‍लेषक मानते हैं कि उस चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुला.




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