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यूपी चुनाव 2017 : घरवाले शादी करवाना चाहते थे, वह अकेले ही निकल पड़ी नामांकन भरने

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यूपी चुनाव 2017 : घरवाले शादी करवाना चाहते थे, वह अकेले ही निकल पड़ी नामांकन भरने

वंदना शर्मा, फतेहपुर सीकरी से निर्दलीय खड़ी हुई हैं

खास बातें

  1. वंदना शर्मा फतेहपुर सीकरी से निर्दलीय खड़ी हुई हैं
  2. उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए हैं
  3. वंदना को सिर्फ अपने भाई का साथ हासिल है
फेतहपुर सीकरी:

चुनाव के लिए खड़ा होना आसान काम नहीं है, खासतौर पर तब जब आपके सामने उत्तरप्रदेश जैसे विशाल राज्य की नामी और बाहूबली हस्तियां खड़ी हुई हैं जिनके पास पैसा, ताकत और पार्टी काडर सब कुछ है. इसके बावजूद 25 साल की वंदना शर्मा पीछे नहीं हटी और जनवरी की एक सर्द भरी सुबह घर से 10 हज़ार रुपये लेकर निकल पड़ी नामांकन भरने. वंदना ने फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार का नामांकन भरा है. चुनावी हलफनामे में उन्होंने 32 हज़ार रुपये की संपत्ति की घोषणा की है जिसमें से एक तिहाई यानि करीब 10 हज़ार रुपये उन्होंने सेक्योरिटी डिपोज़िट के लिए जमा किये हैं.

वंदना बताती हैं कि चुनाव में खड़े होने के लिए उन्हें अपने परिवार से भी समर्थन हासिल करने में खासा संघर्ष करना पड़ा. वंदना इस वक्त आगरा कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक कर रही हैं और उन्होंने NDTV से बातचीत में कहा 'मेरे माता-पिता मेरी शादी करवा देना चाहते हैं लेकिन मैं अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं.' वंदना की लड़ाई सिर्फ अपने घर तक की नहीं है, उनके उठाए गए मुद्दे सीकरी से 40 किलोमीटर दूर उनके गांव से जुड़े हुए हैं. एक किसान की बेटी वंदना बताती हैं 'गांव में कोई सुविधा ही नहीं है. पास में कोई कॉलेज नहीं है. लड़की को बाहर निकलना है तो साथ में कोई लड़का होना चाहिए. छह बजे के बाद तो हम घर से बाहर ही नहीं निकल सकते. 21वीं सदी के भारत में यह सब बदलना होगा.'


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अपने स्कूटर पर हेलमेट लगाकर गांव गांव घूमकर चुनावी अभियान चला रही वंदना औरतों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर बात करती दिखती हैं. वंदना से मिलने के बाद गांव की सरला देवी कहती हैं 'मैं इन्हें ही वोट दूंगी, हमने तो पूरी जिंदगी घर के भीतर बिता दी है, अब हमारी बेटियां बाहर निकलेगीं.' फतेहपुर सीकरी में 11 फरवरी को पहले चरण में ही मतदान हो जाएगा. हालांकि वंदना इस चुनावी संघर्ष में अकेली ही हैं, सिर्फ उनके छोटे भाई सुशील शर्मा ही उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं. सुशील कहते हैं 'शुरू में तो किसी ने उसका साथ नहीं दिया, किसी ने उससे बात नहीं की, वह अकेले ही नामांकन दाखिल करके आ गई. लेकिन अब जब मैं उसे मेहनत करते हुए देखता हूं तो मैंने सोचा कि मैं भी उसका साथ दूंगा.'

गुरुवार को चुनावी अभियान खत्म हो गया है और वंदना मानती हैं कि यूपी के 403 विधानसभा सीटों में उसको जगह मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. लेकिन वह खुश हैं कि उन्होंने यह कदम उठाया और वो काम किया जो वो करना चाहती थीं.



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