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2013 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना मध्य प्रदेश में इस बार मतदाताओं की संख्या में 8 फीसदी का इजाफा

गौरतलब है कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की 204 विधानसभाओं में 60 लाख फर्जी मतदाता होने के आरोप लगाए थे, चुनाव आयोग ने इस संबंध में पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि डुप्लिकेट मतदाताओं के संबंध में सभी शिकायतों की जांच की गई है.

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2013 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना मध्य प्रदेश में इस बार मतदाताओं की संख्या में 8 फीसदी का इजाफा

फाइल फोटो

भोपाल: नेपानगर में 104 साल की सबसे वयोवृद्ध मतदाता महोबाई के साथ मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया है. मध्य प्रदेश में 2013 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदाताओं की संख्या में आठ फीसदी का इजाफा हुआ है. वहीं चुनाव में अनुमानति खर्च 152 करोड़ रुपये से बढ़कर 411 करोड़ रूपये हो गया है. मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने बताया, ‘‘आज मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 5,03,94,086 (5.03 करोड़) है, जबकि वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के वक्त प्रदेश में 4.66 करोड़ मतदाता थे. इस प्रकार प्रदेश में मतदाताओं की संख्या में लगभग 8 फीसदी का इजाफा हुआ है.’’ सूची में थर्ड जेंडर की श्रेणी में 1410 मतदाताओं के नाम है. प्रदेश में मतदाता सूची में 2,63,14,957 पुरुष और 2,40,77,719 महिला मतदाता हैं. राव ने बताया कि सूची में सबसे अधिक 1,37,83,383 मतदाता 20-29 साल आयु समूह के हैं उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 4 अक्तूबर को 5.02 करोड़ मतदाताओं के नाम वाली सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया था. चुनाव आयोग को पिछले साल मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद इसमें संशोधन, नाम जोड़ने और नाम घटाने के लगभग 96 लाख आवेदन हासिल हुए. इनमें से 35.71 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के तथा 36.31 लाख मतदाताओं के नाम जोड़ने के आवेदन शामिल हैं. 

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गौरतलब है कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की 204 विधानसभाओं में 60 लाख फर्जी मतदाता होने के आरोप लगाए थे, चुनाव आयोग ने इस संबंध में पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि डुप्लिकेट मतदाताओं के संबंध में सभी शिकायतों की जांच की गई है और आवश्यक परिवर्तन किए गए हैं. आयोग ने इस संबंध में आंकड़ा तो नहीं दिया लेकिन कहा जैसे भोपाल में नरेला निर्वाचन क्षेत्र से उन्होंने 827 डुप्लिकेट मतदाताओं को हटाया जबकि वहां कांग्रेस ने 11,000 फर्जी मतदाताओं पर आरोप लगाया था.  
   
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मध्यप्रदेश में हाल ही में चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने वाले अधिकारियों के लिये एक परीक्षा आयोजित की थी जिसमें लगभग 58 फीसद अधिकारी फेल हो गये थे. इन अधिकारियों के लिये अब आयोग रीफ्रेश कोर्स और फिर से परीक्षा भी आयोजित कर रहा है. परीक्षा में उनसे कुछ इस तरह के सवाल पूछे गये थे जैसे किसी उम्मीदवार की ज़मानत कब जब्त होती है? यदि किसी व्यक्ति को निचली अदालत ने तीन साल की जेल की सज़ा दी है, और उच्च न्यायालय से जमानत मिलती है, तो क्या वे चुनाव लड़ने के पात्र हैं? चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने वाले 1,000 अधिकारियों में से 567 ने परीक्षा दी लेकिन केवल 244 को 70 प्रतिशत से अधिक अंक मिले, 58 प्रतिशत अधिकारी जिनपर राज्य में चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी होगी वो परीक्षा में फेल हो गये थे.

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