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विधानसभा चुनावों में हार के बाद राज्यों में साइडलाइन हो सकते हैं शिवराज, वसुंधरा राजे और रमन सिंह, दिख सकते हैं नई भूमिका में !

राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथों हार पर वसुंधरा राजे, रमन सिंह और शिवराज सिंह चौहान को राज्यों से हटाया जा सकता है.

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विधानसभा चुनावों में हार के बाद राज्यों में साइडलाइन हो सकते हैं शिवराज, वसुंधरा राजे और रमन सिंह, दिख सकते हैं नई भूमिका में !

अमित शाह की फाइल फोटो.

नई दिल्ली:

छत्तीसगढ़ में तो कांग्रेस ने बीजेपी को एकतरफा मुकाबले में चित किया,वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान में टक्कर के बाद बीजेपी को पस्त किया. यूं तो बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व पहले से ही मानकर चल रहा था कि इन राज्यों में बीजेपी को एंटी इन्कमबेंसी झेलनी पड़ेगी. मध्य प्रदेश और राजस्थान में नेतृत्व बदलने की अंदरखाने पहले से तैयारी चल रही थी. मगर, अपने राज्यों में मजबूत पकड़ के चलते शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे को मूल भूमिका से टस से मस करने का साहस बीजेपी नहीं जुटा सकी. वहीं बीजेपी को इसमें नतीजे उल्टे होने के चलते खतरा भी मंडरा रहा था. मगर अब जिस तरह से हिंदी पट्टी के तीनों राज्यों में बीजेपी सत्ता से बाहर होती दिख रही है(अंतिम नतीजे आने बाकी), उससे अब एक बार फिर उन अटकलों को बल मिलने लगा है, जिसमें कहा जा रहा था कि तीनों नेताओं को राज्य से हटाकर नई भूमिका में लाया जाएगा.

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मिल सकती है ये जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान से वसुंधरा राजे और छत्तीसगढ़ से डॉ. रमन सिंह को केद्रीय मंत्रिमंडल में लिया जा सकता है.मध्य प्रदेश में खेती-किसानी को लेकर कई योजनाएं बनाने वाले शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय कृषि मंत्री बनाने की अटकलें पहले भी लगतीं रहीं हैं.  हालांकि अब आम चुनाव भी नजदीक आ रहा है. ऐसे में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को आशंका है कि तीनों नेताओं के रहते कहीं में भी राज्यों की एंटी इन्कमबेंसी लोकसभा चुनाव में न झेलनी पड़े. इसलिए तीनों नेताओं को केंद्रीय भूमिका में लाने की तैयारी जल्द हो सकती है. मध्य प्रदेश की कमान शिवराज की जगह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को दी जा सकती है. जबकि राजस्थान में ओम माथुर, भूपेंद्र यादव जैसे चेहरे को भी कमान मिल सकती है. छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी कोई नया नेतृत्व दे सकती है. बीजेपी सूत्रों का कहना है कि बीजेपी इन राज्यों में नए नेतृत्व के जरिए एंटी इन्कमबेंसी फैक्टर के असर को कम करने की कोशिश करने की तैयारी में है.


अब तक के रुझान
मध्य प्रदेश में 230 में से सभी सीटों के रुझान आ गए हैं. जिसमें कांग्रेस 117, बीजेपी 103 और बसपा तीन जबकि सात सीटों पर अन्य उम्मीदवार आगे हैं. इसी तरह राजस्थान में 199 सीटों के रुझान में कांग्रेस 104, बीजेपी 70 और बसपा 6 और अन्य 19 विधानसभा सीटों पर आगे हैं. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 63, बीजेपी 18 और बसपा प्लस को नौ सीटों पर बढ़त मिली है.  


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