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कर्नाटक चुनाव : कुर्सी बचाने के लिए कांग्रेस लगा रही है पूरा जोर, ये हैं पार्टी की 5 अहम रणनीति

कर्नाटक की लड़ाई आखिरी दौर में है. 12 मई को होने वाले चुनावों के लिए तमाम पार्टियां पूरी ताकत लगा रही हैं और विशेष रणनीति भी बनाई है.

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कर्नाटक चुनाव : कुर्सी बचाने के लिए कांग्रेस लगा रही है पूरा जोर, ये हैं पार्टी की 5 अहम रणनीति

चुनाव प्रचार (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. कर्नाटक में जीत के लिए कांग्रेस ने बनाई है रणनीति
  2. कार्यकर्ताओं को दी गई है तरजीह
  3. बूथ स्तर पर किया जा रहा है मैनेजमेंट
नई दिल्ली: कर्नाटक की लड़ाई आखिरी दौर में है. 12 मई को होने वाले चुनावों के लिए तमाम पार्टियां पूरी ताकत लगा रही हैं और विशेष रणनीति भी बनाई है. सत्तारूढ़ कांग्रेस पूरा दमखम लगा रही है. आइये जानते हैं चुनाव में कांग्रेस की क्या हैं 5 अहम रणनीतियां : 

1- यात्राओं के जरिये वोटरों पर निशाना 
कांग्रेस ने कर्नाटक में ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को जोड़ने के लिए 'जन आशीर्वाद यात्रा' का सहारा लिया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस यात्रा के जरिये खुद राज्य के तमाम हिस्सों में जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं. पार्टी का मानना है कि, इससे मतदाताओं में भरोसा पैदा होगा और पैठ बढ़ेगी. गौरतलब है कि, कांग्रेस ने गुजरात में 'नवसर्जन यात्रा' का आयोजन किया था. जो बहुत हद तक सफल था. इसी के बाद कर्नाटक में  'जन आशीर्वाद यात्रा' आयोजित करने का निर्णय लिया गया था. 

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2 - स्थानीय कार्यकर्ताओं को तरजीह 
पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद से ही राहुल गांधी स्थानीय कार्यकर्ताओं को तरजीह देने की बात कर रहे हैं. कर्नाटक चुनाव में पार्टी इसी रणनीति को पूरी तरह फॉलो कर रही है. राहुल गांधी व पार्टी का अन्य शीर्ष नेतृत्व स्थानीय कार्यकर्ताओं से रूबरू हुआ. इस बार 14 सीटिंग विधायकों का टिकट काटा गया है. इनकी जगह पर कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा गया है. इसके जरिये जनता में एक संदेश भी देने की कोशिश की गई है. 

3 - बूथ स्तर पर मैनेजमेंट 
कर्नाटक चुनावों में कांग्रेस भाजपा के पदचिन्हों पर चलते हुए बूथ स्तर पर जोर लगा रही है. इस बार पार्टी ने हर बूथ पर 3-5 सक्रीय कार्यकर्ताओं को लगाया है. जिन्हें एक-एक वोटर के पास पहुंचने की जिम्मेदारी दी गई है. दूसरी तरफ, राज्य भर में 57,000 से ज्यादा बूथ हैं जहां कमेटियां बनाई गई हैं.

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4 - 'सेक्‍युलरवाद' बनाम 'सांप्रदायिकता' 
कर्नाटक में कांग्रेस 'सेक्‍युलरवाद' बनाम 'सांप्रदायिकता' की रणनीति पर भी काम कर रही है. वह विपक्ष यानी भाजपा पर जोरदार हमले कर रही है और सांप्रदायिकता के तमाम मुद्दे उठा रही है. बिहार, अलीगढ़ या अन्य जगहों की घटनाओं को जोरशोर से उठाया जा रहा है और जनता को यह बताने का प्रयास है कि किस तरह भाजपा की इसमें लिप्तता है. कर्नाटक में राहुल गांधी ने खुद कहा कि, जहां कहीं भी अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होगा वहां कांग्रेस व इसके कार्यकर्ता खड़े नजर आएंगे. 
 
5 - दुष्प्रचार से बचने के लिए जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक जतन 
कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस ने खुद दुष्प्रचार से भी बचाने के लिए रणनीति बनाई है. इसके लिए जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक जतन किये जा रहे हैं. कांग्रेस ने ऐसे नेताओं को भी चुनाव प्रचार से दूर रखा है जिनके बयान खुद पार्टी के लिए भारी पड़ते रहे हैं. 

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