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मध्य प्रदेश : कहीं कांग्रेस के अरमानों में पानी न फेर दें सत्यव्रत चतुर्वेदी, BJP को मिल सकता है सीधा फायदा

पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन राजनगर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

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मध्य प्रदेश : कहीं कांग्रेस के अरमानों में पानी न फेर दें सत्यव्रत चतुर्वेदी, BJP को मिल सकता है सीधा फायदा

सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

खास बातें

  1. कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं सत्यव्रत
  2. बुंदेलखंड में है अच्छी-खासी पकड़
  3. कांग्रेस को पहुंचा सकते हैं नुकसान
भोपाल:

मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी  के आक्रामक तेवरों के चलते कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने चतुर्वेदी के निष्कासन की अनुशंसा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) से की है. अब इस पर आलाकमान को फैसला लेना है. पार्टी के प्रदेश कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि राज्य इकाई को चतुर्वेदी को निष्कासित करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं. लिहाजा, निष्कासन की अनुशंसा प्रदेश इकाई ने एआईसीसी को भेज दी है. अब फैसला एआईसीसी को करना है. चतुर्वेदी पर अनुशासनहीनता का आरोप लगा है, साथ ही पार्टी हाईकमान के खिलाफ टिप्पणी करने के भी आरोप लग रहे हैं. पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन राजनगर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस की ओर से वादा किए जाने के बावजूद नितिन को कांग्रेस का टिकट न दिए जाने से चतुर्वेदी नाराज है. चतुर्वेदी बेटे की खुले तौर पर मदद कर रहे हैं, उनका कहना है कि वे एक बेटे के लिए उसके पिता का फर्ज निभा रहे हैं.  सोमवार की शाम को कांग्रेस के प्रदेश दफ्तर से सत्यव्रत के निष्कासन की चर्चा ने जोर पकड़ा, पार्टी की प्रदेश इकाई की बैठक में मंथन हुआ और लंबी चर्चा के बाद निष्कासन की अनुशंसा कर दी गई. 

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बुंदेलखंड में कांग्रेस को दे सकते हैं झटका
सूत्रों का कहना है कि चतुर्वेदी की बुंदेलखंड के कई क्षेत्रों में पैठ है, वे किसी उम्मीदवार को जिता नहीं सकते मगर कांग्रेस के उम्मीदवार को हराने की क्षमता रखते हैं. लिहाजा, अभी पार्टी को चतुर्वेदी सिर्फ एक सीट राजनगर में ही चुनौती दे रहे है, उन्हें पार्टी से बाहर किया जाता है तो चुनाव जिस मोड़ पर खड़ा है, उसमें पार्टी को बड़ा नुकसान होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता. सूत्रों के मूताबिक, निष्कासन के बाद चतुर्वेदी स्वतंत्र हो जाएंगे और पूरे क्षेत्र में पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलने में नहीं हिचकेंगे. यही कारण है कि एआईसीसी भी मंथन कर रही है, क्योंकि बुंदेलखंड की कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय है और कांग्रेस किसी भी तरह का नुकसान उठाने को तैयार नहीं है.  

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नेताओं की महत्वाकांक्षा से कांग्रेस को हो सकता है नुकसान
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में बीते 15 सालों से काबिज बीजेपी सरकार को हराने के लिए कांग्रेस पूरी कोशिश कर रही है. पार्टी को लगता है कि शिवराज सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाकर राज्य में सरकार बनाई जा सकती है. लेकिन प्रदेश में पार्टी अपने ही बड़े नेताओं की महत्वाकांक्षा में उलझती चली जा रही है. जहां एक ओर ज्योतिरावदित्य सिंधिया-कमलनाथ के बीच सीएम पद के लिए होड़ की खबरें हैं तो दूसरी ओर दिग्विज सिंह खुद की उपेक्षा का दर्द सार्वजनिक मंचों से बता रहे हैं. वहीं चौथे बड़े सत्यव्रत चतुर्वेदी का पार्टी के खिलाफ खड़े होकर बयान और प्रचार करना चुनावा के लिहाज से कांग्रेस के लिए बिलकुल अच्छे संकेत नही हैं. 

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सत्यव्रत चतुर्वेदी का परिचय
सत्यव्रत चतुर्वेदी की मां विद्यावती चतुर्वेदी लोकसभा सांसद रहीं, उनकी इंदिरा गांधी से काफी करीबी थी, सत्यव्रत के पिता बाबूराम चतुर्वेदी राज्य सरकार में मंत्री रहे. विद्यावती-बाबूराम चतुर्वेदी ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था.  चतुर्वेदी की पहचान ऐसे नेता के तौर पर है, जो जिद्दी, हठी है और अपनी बात कहने से किसी से हिचकता नहीं है. यही कारण है कि उनकी वर्तमान दौर के नेताओं से ज्यादा पटरी मेल नहीं खाती. संभवत: देश में कम ही ऐसे नेता होंगे जो इस स्तर पर पहुंचने के बाद भी बगैर सुरक्षाकर्मी के चलते हों, उनमें चतुर्वेदी एक हैं. चतुर्वेदी का राजनीतिक जीवन-उतार चढ़ाव भरा रहा है. अर्जुन सिंह की सरकार में उप-मंत्री थे, न्यायालय का फैसला उनके खिलाफ आया तो पद से इस्तीफा देना पड़ा, दिग्विजय सिंह से टकराव हुआ तो विधानसभा की सदस्यता त्याग कर संन्यास ले लिया. सोनिया गांधी के कहने पर संन्यास छोड़कर खजुराहो से लोकसभा का चुनाव लड़े और जीते, उसके बाद का चुनाव हार गए.  अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह से उनका टकराव जग-जाहिर रहा, मगर कांग्रेस ने समन्वय समिति में उन्हें रखा तो वे सारे मतभेद को भुलाकर इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए दिग्विजय सिंह के साथ पूरे प्रदेश के दौरे पर निकल पड़े. जब बेटे को टिकट नहीं मिला तो नाराजगी जाहिर की और अब कांग्रेस के दरवाजे पर बाहर जाने को खड़े हैं.​
पन्ना में BJP-कांग्रेस में सीधी टक्कर​


इनपुट : आईएनएस से भी
 


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