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मध्य प्रदेश में बहुमत के जादुई आंकड़े से दो कदम दूर रह गई कांग्रेस, जानें अब क्या होगा सियासी समीकरण

Madhya Pradesh vidhan Sabha Chunav results: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के आधिकारिक नतीजे घोषित हो गए हैं.

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मध्य प्रदेश में बहुमत के जादुई आंकड़े से दो कदम दूर रह गई कांग्रेस, जानें अब क्या होगा सियासी समीकरण

मध्य प्रदेश में बहुमत से दूर रह गई कांग्रेस

नई दिल्ली:

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh vidhan Sabha Chunav results) के आधिकारिक नतीजे घोषित हो गए हैं. करीब 15 सालों से वनवास झेल रही कांग्रेस पार्टी (Congress) ने बीजेपी को हरा दिया है और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर चुकी है, मगर वह बहुमत के जादुई आंकड़े से दो कदम दूर रह गई. चुनाव आयोग द्वारा जारी नतीजों के मुताबिक, मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को 114 सीटों पर जीत मिली है, जो बहुमत के आंकडे से दो कम है. वहीं बीजेपी को राज्य में 109 सीटों पर संतोष करना पड़ा है. दरअसल, कांग्रेस को राज्य में सरकार बनाने के लिए 116 सीटों की जरूरत है, मगर अब उसके पास 114 नंबर होने से मदद की जरूरत पड़ गई है. हालांकि, जिस तरह के सियासी समीकरण दिख रहे हैं उससे यह लग रहा है कि कांग्रेस सहयोगियों की मदद से आसानी से सरकार बना लेगी और अपना वनवास खत्म कर लेगी. 

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बहरहाल, चुनाव आयोग के नतीजों के मुताबिक, कांग्रेस 114, बीजेपी 109,  बसपा 2, सपा 1 और निर्दलीय के खाते में 4 सीटें गई हैं. अगर इन नतीजों पर गौर करें तो कांग्रेस को बहुमत का आंकड़ा छूने के लिए दो सीटों की जरूरत है. ऐसे में कांग्रेस को मदद की जरूरत पड़ेगी. हालांकि, कांग्रेस के लिए दो सीटों की समर्थन जुटाना आसान माना जा रहा है. क्योंकि समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल ने मंगलवार को घोषणा की कि वह कांग्रेस को अपना समर्थन देंगे. अगर सपा की सीटें कांग्रेस को मिल जाती हैं तब यह आंकड़ा 115 पहुंच जाता है. तब भी एक सीट कम है. मगर माना जा रहा है कि बसपा कांग्रेस को समर्थन दे देगी. 

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संभावनाओं पर बात करे तो अगर बसपा कांग्रेस का समर्थन न भी करती है तो कांग्रेस को निर्दलीय पर निर्भर होना पड़ेगा. ऐसी स्थिति में निर्दलीय अहम भूमिका निभाएंगे. हालांकि, माना जा रहा है कि कांग्रेस बसपा और सपा के सहयोग से सरकार बना लेगी और बीजेपी को सत्ता से बेदखल कर देगी. बता दें कि इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस में कांटे की टक्कर देखने को मिली. अंत-अंत तक बीजेपी के लिए उम्मीद बनी रही. 

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दरअसल, बीते 15 सालों से राज्य में बीजेपी की सरकार थी. कांग्रेस को एंटी इनकंबेंसी का फायदा मिला है. मगर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस पूरी तरह से इन इनकंबेंसी को नहीं भूना पाई. क्योंकि कांग्रेस को राज्य में पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया. बता दें कि कांग्रेस भले ही राज्य में बहुमत के आंकड़े से दो कदम दूर रह गई, मगर कांग्रेस ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को हरा कर लोकसभा चुनाव 2019 का शंखनाद कर दिया है. 

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