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सचिन पायलट का असली इम्तिहान शुरू, याद रखना होगा मोहम्मद अजहरुद्दीन का हश्र

टोंक विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बहुल है. यहां पर 40 हजाज से ज्यादा मुस्लिम हैं. 30 हजार के करीब गुर्जर, 35 हजार अनुसूचित जाति और 15 हजार माली जाति के मतदाता हैं.

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सचिन पायलट का असली इम्तिहान शुरू, याद रखना होगा मोहम्मद अजहरुद्दीन का हश्र
नई दिल्ली:

राजस्थान विधानसभा चुनाव में टोंक सीट इस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है. कांग्रेस ने इस सीट पर 20 साल बाद किसी हिंदू प्रत्याशी को उतारा है तो वहीं बीजेपी ने रणनीति बदलते हुए यूनूस खान को पायलट के सामने उतारा है.  बीजेपी ने सोमवार को जारी प्रत्याशियों की अपनी अंतिम सूची में यूनुस खान का नाम टोंक सीट से शामिल किया. पार्टी ने इससे पहले यहां से मौजूदा विधायक अजित सिंह मेहता को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी. लेकिन कांग्रेस ने जब मुस्लिम बहुल टोंक सीट से पायलट को उतारने की घोषणा की तो यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि भाजपा यहां अपने प्रत्याशी को बदलकर युनुस खान को उतार सकती है.  दरअसल वसुंधरा राजे सरकार में कद्दावर मंत्री रहे युनुस खान इस समय डीडवाना से विधायक हैं. पार्टी ने अब तक जारी अपनी तीन सूचियों में उनका नाम ही शामिल नहीं किया था. अपनी पांचवीं सूची में पार्टी ने टोंक से मेहता व खेरवाड़ा से शंकर लाल खराड़ी का नाम वापस लिया है. मेहता की जगह युनुस खान तथा शंकरलाल की जगह नानाला आहरी को प्रत्याशी बनाया है. इसके साथ ही पार्टी ने कोटपूतली से मुकेश गोयल, बहरोड़ से मोहित यादव, करौली से ओपी सैनी, केकड़ी से राजेंद्र विनायक व खींवसर से रामचंद्र उत्ता को उम्मीदवार घोषित किया है. राज्य की 200 विधानसभा सीटों के लिए सात दिसंबर को मतदान होगा. 

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क्या है टोंक का समीकरण
टोंक विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बहुल है. यहां पर 40 हजाज से ज्यादा मुस्लिम हैं. 30 हजार के करीब गुर्जर, 35 हजार अनुसूचित जाति और 15 हजार माली जाति के मतदाता हैं. कांग्रेस हमेशा से ही यहां पर मुस्लिम समुदाय से आए नेता को ही टिकट देती है और बीजेपी आरएसएस से आए नेता को. 

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क्या है गहलोत का 'जादुई' दांव
इसमें कोई दो राय नहीं है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए कड़ा मुकाबला है. कांग्रेस आलाकमान चाहता था कि अशोक गहलोत का दखल राजस्थान पूरी तरह से खत्म हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. गहलोत की उपेक्षा कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती थी. अब गहलोत सरदारपुरा सीट से मैदान हैं जहां से उनको 20 सालों कोई हरा नहीं पाया है. राजस्थान में इस सीट को गहलोत की जादुई सीट कहा जाता है.  वहीं टोंक जैसी कठिन सीट सचिन पायलट के हिस्से में आ गई है. टोंक सीट के लिए जरूरी है कि यूनूस खान के समर्थन वाले मुस्लिमों के वोट ज्यादा से ज्यादा काटे जाएं.

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क्या है टोंक सीट का इतिहास
कांग्रेस टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा सीट का चुनाव हार चुकी है. यहां से मोहम्मद मो. अजहरुद्दीन को टिकट दिया गया था. मुस्लिम प्रत्याशी होने के बावजूद भी वह बीजेपी के उम्मीदवार गुर्जर नेता सुखबीर सिंह जौनपुरिया से हार गए. इस समीकरण को देखते हुए इस बार पायलट को टिकट दिया गया है. लेकिन सवाल इस बात का क्या यूनूस खान राजस्थान के नेता हैं और उनकी पैठ भी है. वह मोहम्मद अजहरुद्दीन की तरह बाहरी नही हैं.

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राजस्थान के टोंक में सचिन पायलट बनाम यूनुस​


 


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