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प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के पीछे का गणित, क्या बीजेपी को हो सकता है इससे फायदा?

वैसे तो सबसे अनुभवी विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है. कर्नाटक के राज्यपाल ने पांच बार के विधायक केजी बोपैया को यह ज़िम्मेदारी दी.

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प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के पीछे का गणित, क्या बीजेपी को हो सकता है इससे फायदा?

प्रोटेम स्पीकर आज पर आज 10.30 बजे सुनवाई होगी.

खास बातें

  1. प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति कांग्रेस पहुंची सुप्रीम कोर्ट
  2. आज 10.30 बजे सुनवाई
  3. केजी बोपैया को बनाया गया है प्रोटेम स्पीकर
बेंगलुरु: कांग्रेस और जेडीएस ने केजी बोपैया को आज होने वाले शक्ति परीक्षण से पहले विधानसभा का अस्थाई अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर) नियुक्त किए जाने के कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला के फैसले को आज सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सूत्रों के अनुसार याचिका शीर्ष अदालत के रजिस्ट्रार के समक्ष दायर की गई, लेकिन याचिका में कुछ खामियां बतायी गयीं. घटनाक्रम से जुड़े वकीलों में से एक ने कहा, ‘‘हमें कुछ खामियां बतायी गयी हैं और हम इन खामियों को ठीक कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाया है क्योंकि भाजपा विधायक बोपैया सबसे वरिष्ठ विधायक नहीं हैं और राज्यपाल को उन्हें अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त नहीं करना चाहिए था.  

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क्या है प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के पीछे का गणित
वैसे तो सबसे अनुभवी विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है. कर्नाटक के राज्यपाल ने पांच बार के विधायक केजी बोपैया को यह ज़िम्मेदारी दी. कांग्रेस-जेडीएस ने इस पर ऐतराज किया लेकिन बीजेपी का कहना है कि बोपैया दस साल पहले 2008 में भी स्पीकर रह चुके हैं. तब उन्होंने येदियुरप्पा को विश्वास मत हासिल करने में मदद दी थी. दरअसल, बीजेपी इसमें फायदा देख रही है. अगर प्रोटेम स्पीकर के बजाए स्पीकर की अध्यक्षता में विश्वास मत की बात होती तो सबसे पहले तो स्पीकर का ही चुनाव कराना होता और उसी में पता चल जाता कि आंकड़े किस के साथ हैं. साथ ही टाई होने पर प्रोटेम स्पीकर वोट डाल सकते हैं.

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हाल के वर्षों में यह दूसरी बार है जब प्रोटेम स्पीकर की अध्यक्षता में विश्वास मत हासिल किया जाएगा. इससे पहले 2005 में झारखंड में सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश के बाद प्रदीप कुमार बालमुचु के प्रोटेम स्पीकर रहते हुए संयुक्त विश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही की गई थी. 
 


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