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सात भयावह त्रासदियां, जिनसे दहल उठा था देश...

आज़ाद भारत ने बहुत तरक्की की, लेकिन पिछले 70 सालों में हम कई त्रासदियों के शिकार भी हुए हैं...

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सात भयावह त्रासदियां, जिनसे दहल उठा था देश...

16 जून, 2013 की रात उत्तराखंड में बारिश लाखों लोगों पर प्रलय बनकर बरसी थी...

नई दिल्ली: आजादी के बाद देश ने काफी तरक्की की है. कृषि, विज्ञान से लेकर अंतरिक्ष तक अपना प्रभुत्व जमा लिया है, और एक से बढ़कर एक नई तकनीक भी विकसित की हैं, लेकिन कुछ त्रासदियों का भी सामना किया, जिन्होंने हमारी रफ्तार को थामने की कोशिश की. कभी ऐसा किसी मानवीय गलती की वजह से हुआ, तो कभी प्रकृति ने ही कहर बरपा दिया. इन हादसों ने असमय लाखों लोगों को काल के गाल में समा दिया. दिल दहलाने वाले 7 प्रमुख हादसों पर डालते हैं एक नजर...
 
उत्तराखंड त्रासदी
उत्तराखंड में बारिश होना या मौसम बदलना सामान्य घटना है लेकिन 16 जून 2013 की रात जो बारिश हुई, वह लाखों लोगों पर प्रलय बनकर बरसी. बारिश के सैलाब से चारों तरफ हाहाकर मच गया. केदारनाथ का पावन दर्शन करने चारधाम की यात्रा पर गए हजारों श्रद्धालु कब अपनी अंतिम यात्रा पर चले गए, किसी को पता भी नहीं चला. एक अनुमान के मुताबिक इस जल प्रलय में 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जबकि 5 लाख से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए.

1981 का बिहार ट्रेन हादसा
6 जून 1981 को बिहार में हुए ट्रेन हादसे को देश का सबसे बड़ा रेल हादसा माना जाता है. बिहार के मानसी से सहरसा जा रही पैसेंजर ट्रेन अचानक आए तूफान की वजह से बागमती नदी में समा गई थी. कई दिनों तक लाशों की तालाश जारी रही. नदी की तेज बहाव की वजह से काफी लोगों की लाश भी नहीं मिल पाई. एक अनुमान के मुताबिक इस हादसे में लगभग 800 लोगों की मौत हुई थी.
 
bhopal gas tragedy 650

भोपाल गैस त्रासदी
3 दिसंबर 1984 की उस खौफनाक रात को आज भी भोपालवासी और पूरा देश नहीं भूला पाया है. एक ऐसा हादसा जिसने भोपाल के साथ-साथ पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कंपनी के कारखाने से मिथाइल आइसो साइनाइट नामक जहरीली गैस के रिसाव से 15,000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. 

भुज और कच्छ का भूकंप
26 जनवरी 2001 की सुबह पूरा देश गणतंत्र दिवस की खुशियां मना रहा था, लेकिन गुजरात के भुज और कच्छ में 6.9 रिक्टर की तीव्रता वाले भूकंप ने इस इलाके को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया. जब तक लोग कुछ समझ पाते बड़ी-बड़ी इमारतें ताश के पत्ते की तरह धराशाई हो गईं. महज दो मिनट की धरती की कंपकंपाहट ने सब कुछ तबाह कर दिया. बचा था तो सिर्फ हर तरफ चीख-पुकार और लाशों का ढेर. इस हादसे में भुज में 20 हजार और कच्छ में 12 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई. इस भयानक भूकंप का असर 700 किलोमीटर के दायरे में था. सैकड़ों गांवों के नामों निशान मिट गए और आसपास के 21 जिले के 6 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए.

सुनामी का कहर
26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर की लहरों ने जो तूफान मचाया, उसकी कल्पना मात्र से ही आज लोग सिहर जाते हैं. 9.3 तीव्रता के भूकंप की वजह से हिंद महासागर का सीना सुनामी से दहल उठा था. 30 मीटर ऊंची लहरों ने पलभर में प्रलय बनकर सबकुछ तबाह कर दिया. समुद्र तटीय दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ-साथ श्रीलंका, इंडोनेशिया और थाईलैंड की लोगों पर यह कहर बनकर टूटा. इस भयानक हादसे में भारत समेत अन्य प्रभावित देशों में लगभग 2.5 लाख लोग मारे गए. अकेले भारत में 8 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई और 34 लाख से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए.

कुंभकोणम स्कूल में आग
तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुए अग्निकांड ने न केवल सैंकड़ों घरों के चिराग को बुझा दिया, बल्कि देश के भविष्य हमारे बच्चे असमय काल के गाल में समा गए. 16 जुलाई 2004 को कुंभकोणम के स्कूल में दोपहर का खाना बनाने के दौरान रसोई से फैली आग में 94 मासूमों की मौत हो गई. देश की तरक्की में भागीदारी का सपना देखने वाले ये मासूम स्कूल प्रशासन की लापरवाही से हमेशा के लिए खामोश हो गए.

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मंधार देवी मंदिर में भगदड़
देश में हर साल तीर्थस्थलों पर हादसे होते रहते हैं, लेकिन 2005 में मंधार देवी मंदिर में हुआ भगदड़ अब तक का सबसे भयानक भगदड़ माना जा रहा है. 26 जून 2005 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के इस मंदिर में हुए भयानक हादसे में 350 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे.

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