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रियो से लौटी एथलीट सुधा सिंह ज़ीका वायरस के डर से अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में

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रियो से लौटी एथलीट सुधा सिंह ज़ीका वायरस के डर से अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में
बेंगलुरू:

रियो ओलिम्पिक 2016 से लौटते वक्त बुखार और बदन दर्द की शिकायत के साथ बेंगलुरू के अस्पताल में भर्ती करवाई गई भारतीय महिला एथलीट को आइसोलेशन में रखकर इलाज किया जा रहा है, और पूरी मेडिकल जांच की जा रही है कि कहीं उसकी समस्या ज़ीका वायरस तो नहीं है.

30-वर्षीय सुधा सिंह रियो डि जेनेरो से शनिवार को भारत लौटी थी, और उसके बाद उसे जोड़ों में दर्द और थकान की शिकायत के अलावा रक्तचाप कम हो जाने की वजह से अस्पताल ले जाया गया. रियो में स्टीपलचेज़ स्पर्द्धा में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली सुधा के खून के नमूने ज़ीका टेस्टिंग के लिए वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट में भेजे गए हैं. डॉक्टरों का कहना है कि वे अतिरिक्त सावधानी बरतना चाहते हैं, क्योंकि वह ब्राज़ील में थी, जहां यह वायरस काफी बड़ी समस्या है.

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के डॉ एसआर सरला ने NDTV को बताया, "हो सकता है, यह सिर्फ वायरल इंफेक्शन ही हो, लेकिन नियमों के अनुसार हम इसलिए जांच कर रहे हैं, ताकि ज़ीका वायरस की आशंका को खारिज किया जा सके..."


सुधा के अलावा, उसके साथ रियो में एक ही कमरे में रह रहीं मैराथन धाविकाओं ओपी जैशा और कविता राउत में भी वायरल इंफेक्शन के हल्के लक्षण दिखाई देने की ख़बर है. डॉक्टर के अनुसार, "यह सांस के साथ फैल सकने वाला इंफेक्शन है," और इसी वजह से एक ही कमरे में रहने वाली तीनों महिलाओं में इसके होने के आसार बन गए. जैशा केरल स्थित अपने घर गई हैं.

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डॉक्टरों ने बताया कि सुधा की हालत में सुधार हुआ है, और जिस हालत में उन्हें दाखिल करवाया गया था, उसकी तुलना में उनकी स्थिति अब बेहतर है.

वैसे, ज़ीका मच्छरों के ज़रिये फैलने वाला वायरस है, और इसकी वजह से बच्चों के जन्म में गंभीर समस्याएं आ सकती हैं, तथा इसे एक दिमागी बीमारी का भी कारण माना जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कह चुका है कि ब्राज़ील में हुए ओलिम्पिक खेलों की वजह से अन्य देशों में ज़ीका वायरस के फैलने का खतरा 'काफी कम' है.



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