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बेंगलुरु : बड़े बिल्डरों, मॉल्स के खिलाफ भी डेमोलिशन ड्राइव चलाने की मांग पर याचिका दायर

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बेंगलुरु : बड़े बिल्डरों, मॉल्स के खिलाफ भी डेमोलिशन ड्राइव चलाने की मांग पर याचिका दायर

फाइल फोटो

बेंगलुरु:

कर्नाटक हाईकोर्ट में समर्पण नाम के एक एनजीओ की तरफ से याचिका दायर की गई है. इस एनजीओ के वकील सीआर मोहन ने बताया कि इस याचिका में दो बातों पर जोर दिया गया है.

पहली सरकारी एजेंसी ने जिन मकानों के प्रारूप यानी ब्लू प्रिंट को मंजूरी दी थी और उसके बाद जिन मकान मालिकों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किए, अगर उनके मकान तोड़े गए हैं, तो ऐसी सूरत में उन्हें बाजार की मौजूदा कीमत के आधार पर मुआवजा दिया जाए. और दूसरी कि कुछ मॉल्स और अपार्टमेंट्स बड़े-बड़े बिल्डर्स ने बनाए हैं, इनके खिलाफ भी सरकार कार्रवाई करे, क्योंकि इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जो स्टॉर्म वाटर ड्रेन पर बने हैं.

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वहीं, दूसरी तरफ कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से इस याचिका का हवाला देते हुए पूछा गया कि क्या वाकई सरकार भेदभाव कर रही है, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि चाहे मॉल हों या अपार्टमेंट, अगर नक्शे में गलत है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी. बेंगलुरु के टाउन हॉल में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें सत्तारूढ़ कांग्रेस को छोड़कर तकरीबन सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल थे. बीजेपी के नजदीकी माने जाने वाले निर्दलीय राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर का भी यही मानना है कि अप्रूवल के बाद जिनके मकान तोड़े गए हैं, उन्हें सरकार फौरन मुआवजा दे और साथ ही साथ उन मॉल्स के खिलाफ कार्रवाई करे, जो नक्शे के मुताबिक स्टॉर्म वाटर ड्रेन पर हुए बने हैं.


आरोप कई सरकारी अधिकारियों पर लगाए जा रहे हैं कि मॉल्स के लिए या किसी बड़े अपार्टमेंट के लिए कई जगह पर ऐसा भी पाया गया है कि स्टॉर्म वाटर ड्रेन का रास्ता बदल दिया गया. सरकार का कहना है कि अब तक 22 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, उनके खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज किया जा चुका है. जांच के बाद तय होगा कि मुकदमा किन धाराओं के तहत चलाया जाना है. जुलाई के आखिरी हफ्ते में बारिश का पानी जमा होने की वजह से शहर में कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे. लोग शहर की सड़कों पर मछलियां पकड़ते नजर आए. इसके बाद सरकार ने ऐसे मकानों को गिराने के आदेश दिए जो नालों पर बने थे.



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