शिवराज सिंह चौहान के तीखे तेवर, 'संदिग्ध आतंकवादियों को सालों तक जेल में बिरयानी खिलाई जाती है'

शिवराज सिंह चौहान के तीखे तेवर, 'संदिग्ध आतंकवादियों को सालों तक जेल में बिरयानी खिलाई जाती है'

भोपाल:

मध्य प्रदेश में जिस तरह से प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के आठ सदस्यों को मार गिराया गया, उस पर विपक्षी दलों के अलावा देश की सर्वोच्च मानवाधिकार संस्था ने भी सवाल उठाए हैं. लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हमलावर तेवर दिखाते हुए मंगलवार को एक भाषण के दौरान कहा, "जिन पर आतंकवाद से जुड़े मामलों में सुनवाई चलती है, उन्हें सज़ा मिलने में सालों लग जाते हैं... सालों तक उन्हें जेल में चिकन बिरयानी खिलाई जाती है... फिर वे भाग जाते हैं, और फिर अपराध और हमले करते हैं... हमें आतंकवाद से जुड़े मामलों में भी फास्ट-ट्रैक अदालतों की ज़रूरत है..."

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी पूरी तरह अपने राज्य की पुलिस का बचाव कर रहे हैं, जिन्होंने भोपाल की कड़ी सुरक्षा वाली सेंट्रल जेल से भागने के कुछ ही घंटे बाद सिमी के संदिग्ध आतंकवादियों को ढूंढ निकाला और मार गिराया. सरकार ने कहा है कि पुलिस वालों पर कैदियों में गोलियां चलाईं, और इसीलिए उन्हें मार गिराने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, जिन्हें NDTV ने देखा है, से पता चलता है कि मारे गए आठों लोगों में से प्रत्येक को कम से कम दो गोलियां मारी गईं, जिनमें से कुछ पीठ पर भी दागी गईं.

जेल से भागे कैदियों को इस तरह मार गिराए जाने से राष्ट्रीय स्तर पर बहसें शुरू हो गई हैं, और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी शिवराज सिंह चौहान सरकार तथा राज्य पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा है, क्योकि कैदियों को मार गिराए जाने के वक्त के कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें किसी शूटआउट के कोई संकेत नहीं मिलते, और पुलिस वाले काफी नज़दीक से कैदियों को मारते दिखाई दे रहे हैं. (NDTV इन वीडियो की सच्चाई और प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकता है)

पुलिस और सरकार, दोनों ही कह चुकी हैं कि जेल से भागते वक्त कैदियों के पास हथियारों के रूप में सिर्फ चम्मच थे, लेकिन जिस गांव में वे छिपे हुए मिले, वहां उनके पास से चार देसी कट्टे भी बरामद हुए.

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मध्य प्रदेश की जेलमंत्री कुसुम मेहदाले ने NDTV से बातचीत में स्वीकार किया कि यह जेलब्रेक 'किसी अंदरूनी मदद' से किया गया हो सकता है. कई सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जबकि वे जेल की उस कड़ी सुरक्षा वाले हिस्से में लगे थे, जहां सिमी के कैदियों - लगभग 30 कैदी - को रखा गया था. जेल अधिकारियों का दावा है कि लगभग 30 फुट ऊंची दीवार को फांदने के लिए सिमी सदस्यों ने चादरों का इस्तेमाल किया, और दरवाज़ों पर लगे तालों को टूथब्रश से बनाई चाबियों से खोला. इन्हीं दावों पर सिमी सदस्यों के वकील सहित बहुत-से लोगों ने सवालिया निशान खड़े किए हैं.

भागने से पहले इन कैदियों ने जेल के एक गार्ड का गला रेत दिया था. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को सवाल करते हुए कहा था, "विपक्षी दल शहीदों के बारे में बात क्यों नहीं करते..." उन्होंने विपक्षी दलों पर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया. मध्य प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह भी NDTV से बातचीत में दावा कर चुके हैं कि सिमी के सदस्यों को जेल से भागने में एक 'बड़े नेटवर्क' ने मदद की थी, और ये कैदी 'बड़ी आतंकवादी वारदात की साज़िश रच रहे थे, जिसे काबिल पुलिस फोर्स ने नाकाम कर दिया...'