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मंदसौर फायरिंग : शिवराज सरकार ने तत्कालीन कलेक्टर और एसपी को सस्पेंड किया

मध्यप्रदेश सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर जिले में हुए गोलीकांड और उसमें पांच किसानों के मारे जाने के बाद मंदसौर के तत्‍कालीन कलेक्टर और एसपी को सस्पेंड कर दिया है.

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मंदसौर फायरिंग : शिवराज सरकार ने तत्कालीन कलेक्टर और एसपी को सस्पेंड किया

मंदसौर में हुई किसान आंदोलन को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उपवास पर बैठना पड़ा था..

खास बातें

  1. मंदसौर के पूर्व जिलाधीश स्वतंत्र कुमार सिंह को निलंबित किया
  2. पुलिस अधीक्षक ओपी त्रिपाठी को भी सरकार ने सस्पेंड कर दिया है
  3. दोनों अफसरों पर सरकार को अंधेरे में रखने की वजह से गाज गिरी
भोपाल:

मध्यप्रदेश सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर जिले में हुए गोलीकांड और उसमें पांच किसानों के मारे जाने के बाद मंदसौर के तत्‍कालीन कलेक्टर और एसपी को सस्पेंड कर दिया है. बुधवार शाम जारी आदेश के मुताबिक मंदसौर के पूर्व जिलाधीश स्वतंत्र कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक ओपी त्रिपाठी को सरकार ने निलंबित कर दिया है. फायरिंग के बाद गृहमंत्री ने पहले कहा था कि गोली पुलिस ने नहीं चलाई, जबकि तीन दिन बाद साफ हो गया था कि गोली पुलिस ने ही चलाई है. सूत्रों के मुताबिक दोनों अफसरों पर सरकार को अंधेरे में रखने की वजह से गाज गिरी है.

आंदोलन के दौरान कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह के साथ कुछ लोगों ने हाथापाई भी थी. फायरिंग के दूसरे दिन कलेक्टर और एसपी का तबादला कर दिया गया था. मामले की जांच के लिये एक सदस्यीय जांच आयोग का भी गठन किया गया है जो तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा.  
 
गौरतलब है कि पिछले पखवाड़े मध्य प्रदेश के मंदसौर में मध्य प्रदेश में कर्जमाफी और फसलों की उचित मांग को लेकर किसानों ने जगह-जगह उग्र प्रदर्शन किया था. पुलिस ने फायरिंग की थी. मध्य प्रदेश सरकार ने पहले तो इस बात से इनकार कर दिया था कि मंदसौर में पांच किसानों की मौत पुलिस की फायरिंग से हुई. बाद में 6 जून को राज्य सरकार ने माना कि किसानों की मौत पुलिस फायरिंग में ही हुई. पुलिस कार्रवाई में घायल होने के बाद छठे शख्स की मौत अगले दिन हो गई.

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बढ़ते दबाव को चलते सरकार ने एक करोड़ रुपये के मुआवजे का ऐलान किया था लेकिन जब किसानों का गुस्सा शांत नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उपवास पर बैठ गए थे. हालांकि 24 घंटे बाद उन्होंने अपना उपवास यह कहते हुए तोड़ लिया था कि पीड़ित परिवारों के परिजनों ने उनसे उपवास तोड़ने की अपील की है.  


 


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