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...और अब बस यादों में रहेगा 155 साल पुरानी 'श्रमिक' ट्रेन का सफर

रेलवे ने ट्रेनों की समय सारिणी में बदलाव के साथ-साथ घाटे में चल रही श्रमिक ट्रेन को बंद करने का फैसला किया है.

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...और अब बस यादों में रहेगा 155 साल पुरानी 'श्रमिक' ट्रेन का सफर
पटना:

डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा पुरानी श्रमिक ट्रेन 1 नवंबर से बंद हो गई. रेलवे के अधिकारी मानते हैं कि इसमें मुसाफिर से ज्यादा बेटिकट यात्री सफर करते थे, जिससे रेलवे को लगातार घाटा हो रहा था. बता दें कि बिहार के जमालपुर में रेलवे का प्रसिद्ध कारखाना है. यहां अब डीजल इंजन का निर्माण और मरम्मत का काम होता है. इसे 8 फरवरी, 1862 को अंग्रेजों ने स्थापित किया था. बताते हैं कि यहां ब्रिटिश शासन में आयुध कारखाना था जहां तोपों का निर्माण किया जाता था. बाद में इसे रेलवे इंजन के निर्माण कारखाना के रूप में अंग्रेजों ने ही तब्दील किया था. तभी से कारखाने में काम करनेवाले श्रमिकों की सहूलियत के लिए इन दो रूटों पर श्रमिक नाम से ट्रेनें चलाई गईं थीं.

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रेलवे ने ट्रेनों की समय सारिणी में बदलाव के साथ-साथ घाटे में चल रही श्रमिक ट्रेन को बंद करने का फैसला किया है. यह ट्रेन जमालपुर से कजरा और जमालपुर से सुल्तानगंज के बीच मंगलवार तक ही चली. मालदा डिवीजन के डीआरएम मोहित कुमार सिन्हा ने बताया कि ट्रेन के परिचालन में प्रतिदिन 10 लाख रुपये खर्च होते थे और आमदनी 1 लाख से भी कम थी. इस ट्रेन का टिकट यात्री नहीं कटाया करते थे. इधर रेल कारखाना के श्रमिक बताते हैं कि कारखाना जाने और आने के लिए इससे अच्छा साधन कोई नहीं था. कारखाना के कर्मचारी रामविलास यादव और रामप्रकाश 1985 से इस ट्रेन में सफर करते आ रहे थे. कर्मचारी प्रेम कुमार भी 1993 से सफर कर रहे थे. अब कहते हैं कि इस ट्रेन का कोई विकल्प रेलवे को देना चाहिए.

VIDEO : हवाई जहाज से महंगी ट्रेन की टिकट
https://khabar.ndtv.com/video/show/news/hema-told-deepika-todays-dream-girl-470202 बहरहाल रेलवे के अधिकारी ने बताया कि कारखाना और ओपेन लाइन कर्मचारी तथा उनके आश्रितों के लिए श्रमिक ट्रेन की तरह दूसरे ट्रेनों को विभिन्न हॉल्ट एवं स्टॉपेज पर ठहराव दिया जाएगा, ताकि कर्मचारियों एवं यात्रियों को परेशानी नहीं उठानी पड़े.



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