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साइकिल और यूनिफॉर्म के बाद अब किताबों का पैसा भी छात्रों के खाते में भेजना चाहते हैं नीतीश कुमार

अगर केंद्र सरकार ने अनुमति दे दी तब यह पैसा बिहार में पढ़ने वाले दो करोड़ छात्रों के खाते में सीधे ट्रांसफर हो जाया करेगा, वैसे ही जैसे साइकिल और यूनिफॉर्म के पैसे जाते हैं.

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साइकिल और यूनिफॉर्म के बाद अब किताबों का पैसा भी छात्रों के खाते में भेजना चाहते हैं नीतीश कुमार

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

पटना: बिहार सरकार ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि उसे छात्रों को किताब मुहैया कराने से मुक्ति देते हुए उस मद के पैसे सीधे छात्रों के खाते में भेजने की अनुमति दी जाय. अगर केंद्र सरकार ने अनुमति दे दी तब यह पैसा बिहार में पढ़ने वाले दो करोड़ छात्रों के खाते में सीधे ट्रांसफर हो जाया करेगा, वैसे ही जैसे साइकिल और यूनिफॉर्म के पैसे जाते हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्‍य सरकार किताब छापने और बांटने के काम से बाहर निकलना चाहती है. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस सबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. फ़िलहाल कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों के बीच हर वर्ष करीब 300 करोड़ रुपये की किताबें बांटी जाती हैं. लेकिन इसके राज्‍य सरकार को प्रकाशकों को कागज भी मुहैया कराना पड़ता है.

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नीतीश कुमार ने कहा कि जो किताबें छपेंगी उसपर राज्य सरकार इतना नियंत्रण जरूर रखेगी कि कुछ गलत न छप जाए. हालांकि नीतीश ने माना कि वर्तमान व्‍यवस्‍था में छात्रों को समय पर किताबें नहीं मिल पाती हैं. नीतीश कुमार का कहना था कि क्या जरूरत है कि राज्य सरकार किताब छपवाए. जब छात्र खुद से साइकिल और अपनी पोशाक खरीद सकते हैं तब वो अपनी किताब भी खरीद लेंगे. सीधे उनके अकाउंट में पैसा जाने से समय और पैसे की बचत होगी.

नीतीश ने माना कि इस योजना को लागू करने के लिए फ़िलहाल केंद्र सरकार की सहमति जरूरी है. इस संबंध में केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारियों की बातचीत हुई है. नीतीश के इस सुझाव को केंद्रीय मंत्री एवं सचिव ने सही माना है. बिहार में हर वर्ष लाखों छात्र किताब समय पर नहीं मिल पाने के कारण पढ़ाई में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है. राज्य सरकार तमाम दावों के बावजूद समय पर किताब मुहैया नहीं करा पाती. ऐसे में इस सुझाव को मान लिया जाता है तो छात्रों के लिए अच्छा होगा.


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