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हाईकोर्ट के फैसले के बाद चंदा बाबू की आंखों से निकले खुशी के आंसू, कहा-ऐसे लोगों को फांसी देनी चाहिए

हाईकोर्ट के फैसले के बाद चंदा बाबू के आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े. उन्होंने कहा, न्यालय पर पूरा है भरोसा. ऐसे लोगों को फांसी ही देनी चाहिए सजा. उन्होंने कहा, अगर सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद्दीन अपील करता है तो शीर्ष न्यायालय भी ऐसे लोगो को फांसी की सजा सुनाए.

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हाईकोर्ट के फैसले के बाद चंदा बाबू की आंखों से निकले खुशी के आंसू, कहा-ऐसे लोगों को फांसी देनी चाहिए

तेजाब कांड में पटना हाईकोर्ट ने मोहम्मद शहाबुद्दीन की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. पटना हाईकोर्ट ने बुधवार को शहाबुद्दीन की उम्रकैद को रखा बरकरार
  2. फैसला सुनते ही चंदा बाबू की आंखों से निकले खुशी के आंसू
  3. चंदा बाबू के दोनों बेटों की तेजाब से नहलाकर कर दी गई थी हत्या
पटना: बिहार के बहुचर्चित तेजाब कांड में बुधवार को पटना हाईकोर्ट ने RJD के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है. हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन के अलावा राजकुमार साह, मुन्ना मियां और शेख असलम की उम्रकैद भी बरकरार रखी. तेजाब कांड में सीवान की स्पेशल कोर्ट शहाबुद्दीन को दो साल पहले ही सजा सुना चुकी है. इसके खिलाफ शहाबुद्दीन ने हाईकोर्ट में अपील की थी. हाईकोर्ट के फैसले के बाद चंदा बाबू के आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े. उन्होंने कहा, न्यालय पर पूरा है भरोसा. ऐसे लोगों को फांसी ही देनी चाहिए सजा. उन्होंने कहा, अगर सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद्दीन अपील करता है तो शीर्ष न्यायालय भी ऐसे लोगो को फांसी की सजा सुनाए. गौरतलब है कि चंदा बाबू के दो बेटों की तेजाब से नहलाकर हत्या कर शव को गायब कर दिया गया था. 

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चंदा बाबू ने दर्ज करवाया था मामला
इसके बाद राजीव रौशन के पिता ने शहाबुद्दीन समेत आधा दर्जन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया था. इसके बाद सिवान जेल में भी एक स्पेसल कोर्ट बनाया गया था. इसमें इस मामले की सुनवाई होती थी. उसी दौरान सिवान में बने स्पेसल कोर्ट ने आजीवन कारावास का फैसला सुनाया था. फैसले के बाद शहाबुद्दीन के वकील द्वारा हाईकोर्ट में अपील की गई थी. जिसका आज हाई कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट द्वारा दिए गए सजा को बरकार रखा. 

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क्या है तेजाब कांड?
16 अगस्त 2004 को बिहार के सीवान के कारोबारी चंदा बाबू जमीन विवादके निपटारे के लिए पंचायत में थे. पंचायत में ही कुछ लोगों ने उन्हें मारने की धमकी दी गई थी. पंचायत में उनके साथ मारपीट भी हुई. विवाद बढ़ता देख चंदा बाबू अपने घर आ गए. वे पत्नी और बेटों के साथ कहीं भागने लगे तभी वहां कुछ बदमाश आ गए. चंदा बाबू ने घर में रखे तेजाब को बदमाशों पर फेंककर अपनी और अपने परिवार की जान बचाई थी. आरोप है कि उसी शाम चंदा बाबू के दोनों बेटों गिरीश राज उर्फ निक्कू और सतीश राज उर्फ सोनू को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था. इसके बाद सीवान शहर के चौराहे पर दोनों पर तेजाब डालकर उनकी हत्या कर दी गई थी. इसके बाद 16 जून 2014 को सीवान के डीएवी कॉलेज मोड़ पर चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन की भी गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में शहाबुद्दीन और उनके पुत्र ओसामा नामजद अभियुक्त हैं.


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