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नीतीश-लालू के ट्विटर जंग के बाद तेजस्वी भी मैदान में उतरे, कहा- घोटालों पर चुप रहना सबसे बड़ा घोटाला

बिहार की राजनीति के शीर्ष पर पिछले 27 वर्षों से बैठे दो नेता सीएम नीतीश कुमार और लालू यादव की सुबह की रूटीन अब बदल गयी है.

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नीतीश-लालू के ट्विटर जंग के बाद तेजस्वी भी मैदान में उतरे, कहा- घोटालों पर चुप रहना सबसे बड़ा घोटाला
पटना: बिहार की राजनीति के शीर्ष पर पिछले 27 वर्षों से बैठे दो नेता सीएम नीतीश कुमार और लालू यादव की सुबह की रूटीन अब बदल गयी है. दोनों नेता नाश्ते के पहले ट्विटर पर ट्वीट कर एक दूसरे पर हमला बोलते हैं. लेकिन अब बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी ट्वीट के जरिए सीएम नीतीश पर हमला बोला है. शुक्रवार को तेजस्वी ने दो ट्वीट किए, जिसमे उन्होंने लिखा कि घोटालों पर चुप रहना ही सबसे बड़ा घोटाला है और छोटे कर्मचारियों को बलि बनाना सबसे बड़ी कार्रवाई है. तेजस्वी ने आगे लिखा कि मुख्यमंत्री घोटालों पर अपना मुँह क्यों नहीं खोलते? छुपो न छुपो न.. ! ना..ना..ना ऐसे ना छुपो.. ना चुपो! जनता जवाब मांग रही है महोदय?

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ये सिलसिला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुरू किया हैं इसलिए लालू यादव जवाब देते हैं और नीतीश के ट्वीट से लगता हैं कि उस जवाब को पढ़कर वो नया ट्वीट करते हैं. फिलहाल ट्वीट इस बात पर आधारित होता हैं कि कौन-कितने घोटाले किए. लालू यादव ने अपने जवाब में गुरुवार को लिखा था कि नीतीश ने अपने नाक के तले चालीस घोटाले करवाएं.

इसलिए शुक्रवार सुबह-सुबह नीतीश ने जवाब दिया कि घोटालों को उजागर करना और घोटालेबाजों के खिलाफ कारवाई करना बड़ा घोटाला हैं. नीतीश इस बात से भली भांति परिचित हैं कि घोटाले के बहस में फिलहाल कोई उन्हें खासकर लालू यादव नसीहत दे सकते. वही लालू यादव का परिवार भी इस बात को स्वीकार करने में कभी पीछे नहीं हटा कि वो चारा घोटाला हो या मॉल घोटाला उसको उजागर करने में नीतीश ने अहम भूमिका निभायी.  

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फिलहाल नीतीश कुमार जिसने भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर लालू और कांग्रेस का साथ छोड़ा. उनको उम्मीद होगी कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर देर-सवेर जांच एजेंसियों की चार्ज शीट जरूर झेलेंगे. ये माना जाता हैं कि नीतीश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच में दूरी भी असल में नोटबंदी और बेनामी संपती पर उनके समर्थन के बाद ही घटी.


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