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केंद्र को उदार हृदय से राशि का आवंटन करना चाहिए: नीतीश कुमार

उन्होंने प्रसाद से मुखातिब होते हुए कहा कि बिहार में कुल 38 जिला और 101 अनुमंडल हैं और आप कह रहे हैं कि बिहार में अधिनस्थ अदालतों को सुदृढ़ बनाने के लिए 50, 60 या 70 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इससे उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी.

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केंद्र को उदार हृदय से राशि का आवंटन करना चाहिए: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

पटना:

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय विधि न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद को यह कहकर प्रेरित करते हुए कि 'हम आप साथ आ गए हैं.' केंद्र सरकार से प्रदेश की अधिनस्थ अदालतों को सुदृढ़ बनाकर त्वरित न्याय दिलाने के लिए उदारतापूर्वक राशि का आवंटन करने को कहा. पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में न्याय विभाग, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित ‘टेली लॉ: मेन स्ट्रीमिंग लिगल एड थ्रू कॉमन सर्विस सेंटर’ कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए नीतीश ने प्रसाद से कहा, 'हम (जदयू—भाजपा) साथ-साथ आ गए हैं, जो जरूर परिलक्षित भी होना चाहिए.

उन्होंने प्रसाद से मुखातिब होते हुए कहा कि बिहार में कुल 38 जिला और 101 अनुमंडल हैं और आप कह रहे हैं कि बिहार में अधिनस्थ अदालतों को सुदृढ़ बनाने के लिए 50, 60 या 70 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इससे उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी. नीतीश ने कहा कि 2005—06 में उनके सत्ता में आने के समय बिहार बजट जो 25—26 हजार करोड़ रुपये था, आज बढ़कर 1.40 लाख करोड़ रुपये अधिक हो गया है. अगर आप (केंद्र) देना चाहते हैं तो उदारतापूर्वक राशि का आवंटन करें. वह अधिनस्थ अदालतों को सशक्त बनाने के बारे में बातें कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पटना उच्च न्यायालय के भवन के विस्तार के लिये राज्य सरकार द्वारा 169 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गयी तथा इस पर कार्य हो रहा है.

उन्होंने कहा कि टेली लॉ के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंदों को कानूनी सहायता मिलने में सुविधा होगी. इससे पारदर्शिता आने वाली है. टेली लॉ के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को जल्दी न्यायिक सहायता मिल जायेगी, यह बहुत बड़ी बात है. नीतीश ने कहा कि कॉमन सर्विस सेंटर एवं पारा लिगल वोलेंटियर के माध्यम से कमजोर तबके के व्यक्ति भी जो कानूनी सहायता चाहते हैं उन्हें आसानी से कानूनी सहायता मिल पायेगी.


उन्होंने कहा कि आईटी से कार्यों में पूरी पारदर्शिता आयेगी तथा सबकों सहायता मिलेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में कॉमन सर्विस सेंटर की तरह सुविधा केन्द्र की शुरुआत पहले भी की जा चुकी है. परंतु उसकी परिकल्पना उस तरह से नहीं है जैसा आज के कॉमन सर्विस सेंटर का है. आज कॉमन सर्विस सेटर के माध्यम से लोगों को अनेक प्रकार की सुविधायें उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि कानूनी सलाह उपलब्ध कराने के लिए ऐेसे 500 कॉमन सर्विस सेंटर विधि मंत्रालय द्वारा खोले जा रहे हैं. वह केन्द्रीय कानून मंत्री से आग्रह करता हूं कि इसकी संख्या और बढ़ाई जाये तथा पूरे बिहार में यह फैला हो.

नीतीश ने कहा कि इससे टेक्नोलॉजी के प्रति लोगों के मन में आकर्षण बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि बिहार में छह करोड़ मोबाइल फोन है. नीतीश ने कहा कि लोगों को सेवा उपलब्ध कराने के लिये बिहार में 2010 में लोक सेवा अधिकार की शुरुआत की गयी. इसके तहत लोगों को सेवा मिलना शुरू हो गया. इससे पहले लोगों को आवासीय, जाति, चरित्र प्रमाण पत्र आदि के लिये कितना चक्कर लगाना पड़ता था. बिहार में इस कानून को लागू किया गया. सेवा यात्रा के दौरान हमने विभिन्न जिलों में जाकर इसके क्रियान्वयन को देखा. आज लोगों को विभिन्न सेवाएं मिलने में कोई समस्या नहीं हो रही है.

उन्होंने कहा कि सेवा को उपलब्ध कराने की अवधि को भी घटाया गया है. नीतीश ने कहा कि इसके साथ-साथ लोगों की शिकायतों के निष्पादन के लिये लोक शिकायत निवारण अधिकार कानून लागू किया गया, इसके तहत लोगों की शिकायतों का समाधान किया जाता है, इसमें अपील का भी प्रावधान है. उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी चीज है कानून का शासन स्थापित करना. मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी चीजों का लगातार अध्ययन करते रहते हैं. अध्ययन के क्रम में यह बात सामने आयी कि प्राप्त होने वाली शिकायतों में भूमि विवाद लगभग साठ प्रतिशत है. अगर भूमि विवाद के समस्याओं का समाधान किया गया तो समाज में शांति आ जायेगी.

उन्होंने कहा कि इसके लिये नये सिरे से सर्वेक्षण कराया जा रहा है. पुराने सारे दस्तावेजों को अपडेट कर डिजिटाइज कराया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में न्यायिक क्षेत्र में पटना उच्च न्यायालय द्वारा पहले भी कई पहल की गयी है. इनमें एक लोक अदालतों का आयोजन है. उन्होंने कहा कि 2016 से अब तक लोक अदालत के माध्यम से चार लाख से ज्यादा मामलों का निष्पादन किया जा चुका है. नीतीश ने कहा कि न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये राज्य सरकार की तरफ से जो भी सहायता एवं राशि की जरूरत होगी, उसे तुरंत उपलब्ध कराया जायेगा. उन्होंने कहा कि बिहार में लाभार्थियों के बीच ‘डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर’ का प्रयोग पहले से किया जा रहा है.

बालिका साइकिल योजना का उदाहरण देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के अन्तर्गत शुरू से साइकिल खरीदने के लिये छात्र-छात्राओं को पैसे नकद दिये जाते थे. उन्होंने कहा कि बालिका साइकिल योजना के फलस्वरूप स्कूलों में लड़कियों की संख्या एक लाख 70 हजार से बढ़कर नौ लाख हो गयी है. नीतीश ने कहा कि अब बैंकों के जरिये राशि छात्रों को दी जायेगी. इसके साथ-साथ अन्य सभी छात्रवृत्ति योजनाओं तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ भी लाभार्थियों को बैंक के माध्यम से दी जायेगी, इसकी शुरुआत की जा चुकी है. बैंक खातों को आधार कार्ड से भी जोड़ा जा रहा है.

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उन्होंने कहा कि कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से अधिक से अधिक राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों को दिलाने का प्रयास किया जायेगा. नीतीश ने कहा कि लोक शिकायत कानून से भी कॉमन सर्विस सेंटर को जोड़ने की कोशिश करेंगे. इससे पूर्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बिहार में अधिनस्थ अदालतों को सुदृढ़ बनाने के लिए 2016-17 में 50 करोड़ रुपये दिए गए हैं. संबंधित प्राधिकार द्वारा राशि का इस्तेमाल का प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए जाने पर मैं इसे अगली बार बढ़ाकर 60—70 करोड़ रूपये कर दूंगा. कार्यक्रम को न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, बिहार के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेन्द्र मेनन ने भी समारोह को संबोधित किया.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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