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2013-14 में 'मूंछ वाले' तेजस्वी यादव ने 13 बेनामी संपत्तियों का मालिकाना हक लिया

उन्होंने तेजस्वी यादव के उस बयान के जरिए भी हमला किया जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरी मूंछ भी नहीं आई थी तब के केस सुशील मोदी उठा रहे हैं.

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2013-14 में 'मूंछ वाले' तेजस्वी यादव ने 13 बेनामी संपत्तियों का मालिकाना हक लिया

बिहार बीजेपी के नेता सुशील मोदी.

खास बातें

  1. एक बार सुशील मोदी ने किया तेजस्वी यादव पर हमला
  2. सुशील मोदी बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता
  3. बेनामी संपत्ति का मामला उठा रहे हैं मोदी.
पटना: बिहार में एक बार फिर बीजेपी नेता सुशील मोदी ने आरजेडी प्रमुख के परिवार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि 13 फर्जी कंपनियों के जरिए बेनामी संपत्ति का मालिकाना हक लिया. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने वयस्क होने के बाद 13 बेनामी संपत्ति का मालिकाना हक लिया.उन्होंने कहा कि अवयस्क होने के दौरान भी 13 अन्य बेनामी संपत्तियों का मालिकाना हक लिया. उन्होंने तेजस्वी यादव के उस बयान के जरिए भी हमला किया जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरी मूंछ भी नहीं आई थी तब के केस सुशील मोदी उठा रहे हैं. लेकिन आज मोदी ने कहा कि ये मामले उनके मूंछ आ जाने के बाद है.

उन्होंने कहा कि ये पूरा मामला 2013-14 का है. उन्होंने कहा कि इस समय वह डिलाइट कंपनी के मालिक बने. इसी कंपनी के जरिए मोदी ने इस संपत्तियों का अर्जन किया. उन्होंने कहा कि इस प्रकार तेजस्वी यादव ने 26 बेनामी संपत्तियां गलत तरीके से हासिल कीं.

उन्होंने कहा कि 2013 में उन्होंने राबडी देवी के साथ इस कंपनी का मालिकाना हक हासिल किया है. उन्होंने कहा कि जमीन खरीद में दाम भी पूरा नहीं दिखाया गया. 

बिहार में पत्रकारों को सोमवार और मंगलवार का बेसब्री से इंतजार रहता है.  सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मीडिया से रूबरू होते हैं और मंगलवार को विपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी.  पिछले तीन महीने से सुशील मोदी के संवाददाता सम्मलेन को लेकर कुछ खास उत्सुकता इस बात को लेकर रहती है कि आखिर राष्ट्रिय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ वो क्या नया खुलासा करते हैं.

सुशील मोदी ने आज के संवाददाता सम्मलेन में उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को एक बार फिर  घेरा. मोदी ने तेजस्वी यादव के उस तर्क कि उनके खिलाफ सीबीआई ने जिस रेलवे के सम्पत्ति के बदले माल बनाने के लिए जमीन का मामला दर्ज किया है उस समय उनकी मूंछ दाढ़ी भी नहीं थी पर नए सम्पत्तियों के ब्योरे देते हुए कई सवाल किये. सबसे पहले मोदी ने साफ़ किया कि हाल में सीबीआई ने जो उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है वो इस आधार पर कि तेजस्वी डिलाइट मार्केटिंग में निदेशक बने और मात्रा 65 लाख में 94 करोड़ की सम्पति के मालिक बने और उस समय उनकी उम्र 24 साल थी.  मोदी ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव के नाम से दो सम्पत्ति उस समय रजिस्टर्ड की गई जब उनकी उम्र मात्र तीन साल थी.  मोदी के अनुसार तेजस्वी यादव के नाम गोपालगंज, पटना से दिल्ली तक 26 सम्पति हैं जिसमे 13 सम्पत्ति के मालिक वो नाबालिग उम्र में बने.  मोदी के अनुसार जब नाबालिग रहने पर उन्होंने कभी इस बात का विरोध नहीं किया कि आखिर ये सम्पत्ति उनके नाम क्यों की जा रही हैं, तब अब मुकदमा होने पर वो ये दलील क्यों दे रहे हैं.  

हालांकि सुशील मोदी के ताजा बयान और आरोप पर तेजस्वी यादव या उनके पिता लालू यादव ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि मोदी के बयान से हमे इस बात की एक बार फिर आशंका हो रही हैं कि महागठबन्धन को तोड़ने के लिए कुछ और नए मामले केंद्रीय एजेंसियां दर्ज करने वाली है.  लेकिन सवाल यह हैं कि आखिर राजद या तेजस्वी यादव अपने ऊपर लगे आरोपों का तथ्यवार जवाब क्यों नहीं देते. खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले मंगलवार को अपने पार्टी के नेताओं के सामने ये बयान दिया था कि जिनके ऊपर आरोप लगे उन्हें प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर जवाब देना चाहिए.

इस पर राजद अध्यक्ष लालू यादव और खुद तेजस्वी यादव ने कहा था कि उनके खिलाफ सारे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं,  लेकिन जनता दल यूनाइटेड इससे संतुस्ट नहीं दिखी.

इस बीच राष्ट्रीय जनता दल ने नीतीश कुमार के कांग्रेस पार्टी आलाकमान को मध्यस्थता के आग्रह पर फ़िलहाल कोई समाधान नहीं निकला हैं. और राजद के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस पार्टी पहले हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का इस्तीफा करवाए तब तेजस्वी यादव का इस्तीफा मांगे.  इस पर कांग्रेस के नेता चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन जनता दल यूनाइटेड के नेता कहते हैं कि ऐसे तर्कों के आधार पर चार्ज शीट होने पर बंगाल के तृणमूल सरकार के मदन मित्रा का उदाहरण दे सकते हैं जो जेल जाने के बाद भी मंत्री बने रहे. राष्ट्रीय जनता दल के नेता आश्वस्त हैं कि महागठबंधन चलाने के लिए नीतीश, चार्ज शीट होने तक कुछ शर्तों के आधार पर मंत्री पद पर बने रहने देंगे.

लेकिन राज्य में नीतीश-लालू गतिरोध के कारण उसका असर विकास कार्यों पर साफ़ देखा जा  सकता है.  जहां तेजप्रताप और तेजस्वी यादव ने अपने कार्यालय जाना बंद कर दिया है, वहीं नीतीश कुमार ने भले विभागीय कार्यों की समीक्षा करनी शुरू कर दी है.  लेकिन जब महागठबंधन के दो बड़े दलों के बीच संवाद भी बंद हो वहां उसका असर सरकार के काम काज पर पड़ना लाजिमी है.  

बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने पूर्व में मंत्रियों का इस्तीफा लिए जाने का उदाहरण पेश करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भ्रष्टाचार के मामले में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का इस्तीफा लिए जाने की मांग की है. राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके परिवार के खिलाफ पिछले डेढ़ महीने से 'बेनामी संपत्ति' को लेकर लगातार आरोप लगा रहे सुशील ने पटना में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राजद प्रमुख लालू प्रसाद को उनपर और उनके परिवार पर स्वयं द्वारा लगाए गए आरोप का बिंदुवार जवाब देने की भी चुनौती दी.

इससे पहले बिहार में राष्ट्रीय जनता दल कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है. एक ओर जहां सहयोगी पार्टी जेडीयू से रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे हैं तो दूसरी ओर पूर्व उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी लगातार पार्टी के लिए सिरदर्दी बने हुए हैं. सुशील मोदी और आरजेडी में पिछले काफी समय से शाह-मात का खेल जारी है. इसी बीच सोमवार को मोदी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की मांग की. मोदी ने आरोप लगाया कि चुनाव लड़ने के दौरान तेजप्रताप ने शपथपत्र में आयोग को सही जानकारी नहीं दी है.


 


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