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क्या तेजस्वी यादव मर्यादित भाषा लिखने और बोलने में असमर्थ हैं?

उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भाषा की मर्यादाएं तोड़ीं

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क्या तेजस्वी यादव मर्यादित भाषा लिखने और बोलने में असमर्थ हैं?

तेजस्वी यादव ने ट्वीट और प्रेस विज्ञप्ति में सुशील मोदी के खिलाफ अशालीन भाषा का उपयोग किया है.

खास बातें

  1. तेजस्वी की प्रेस विज्ञप्ति और ट्वीट में अशालीन भाषा
  2. मोदी को धांधलीबाज़, फ़रेबी व्यक्ति, फ़्रॉड, दोगला कहा
  3. कहा, मोदी की कुर्सी हिलने लगी तो नामी-बेनामी का बेसुरा राग आलाप रहे
पटना: बिहार की राजनीति में शनिवार को एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला. लेकिन उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भाषा की मर्यादा का ख़्याल नहीं रखा.

तेजस्वी यादव ने जो मोदी के आरोपों के जवाब में अपनी प्रेस विज्ञप्ति और ट्वीट में शब्दों का चयन किया उससे साफ़ झलक रहा था कि या तो उन्हें भाषा की शालीनता का ज्ञान नहीं हैं या वे जानबूझकर गुस्से में अपना आपा खो रहे हैं.

तेजस्वी ने कहा कि मोदी इतने बड़े धांधलीबाज़ और फ़रेबी व्यक्ति हैं कि अपनी मां के कोख से जन्मे सगे भाई को अपना दूर का रिश्तेदार बताते हैं. जो व्यक्ति अपने भाई को रिश्तेदार बताता हो तो सोच लीजिए वह इंसान कितना बड़ा फ़्रॉड और ‘दोगला‘होगा? अगर फिर भी कोई उनकी बातों पर यक़ीन करता है तो समझो वह जानबूझकर जहर पी रहा है.

उन्होंने सुशील मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि सुशील मोदी का अप्रवासी परिवार अरबों की काली कमाई के ढेर पर बैठा है. सुशील मोदी यह साफ क्यों नहीं करते कि छोटी सी कपड़े की दुकान चलाने वाला मोदी खानदान आज खरबों का मालिक कैसे बन बैठा?

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तेजस्वी ने कहा कि इनके भाई राजकुमार मोदी की 10 हजार करोड़ की रीयल इस्टेट कंपनी इनके उप मुख्यमंत्री बनने के बाद कैसे आगे बढ़ी? इनकी बहन रेखा मोदी को सृजन घोटाले के पैसे में बंदरबांट करने में सुशील मोदी ने कैसे मदद की? यह ललित छाछवरिया इनका कौन सा रिश्तेदार है जो इनके खानदान को खरबों की मनी लॉन्ड्रिंग में मदद कर रहा है?

उन्होंने पूछा कि क्यों बार-बार शिकायतों के बावजूद वित्त मंत्री रहते हुए इन्होंने और मुख्यमंत्री ने सृजन घोटाले में जांच के आदेश नहीं दिए? क्यों नहीं सुशील मोदी जेब में पड़े अगले हुक्म का इंतज़ार कर रहे. जांच एजेंसियों को अपने भाई के काले कारोबार की जांच करने के लिए ED, CBI, IT को लिखते? जो खुद घोटालेबाज़ है, वो आए दिन PC में घोटाला-घोटाला चिल्लाता है पर अपने पूरे कुनबे के घोटालों पर चुप्पी साध कर बैठा रहता है.

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तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा कि दरअसल सुशील मोदी की कुर्सी हिलने लगी है तो फिर एक साल बाद नामी-बेनामी का बेसुरा राग आलापना शुरू कर दिया है. तेजस्वी ने मोदी से कहा कि, आप आदरणीय हैं, बुज़ुर्ग हैं इसलिए यह तो नहीं कहूंगा कि आप बेशर्म हैं. लेकिन मेरे बार-बार आपके मनपसंद जगह और समय पर खुली बहस की चुनौती देने के बावजूद आप चुप्पी साधे हुए हैं. शायद अपने ख़ानदान के काले कारनामों व घोटालों के डर से मुझसे बहस करने की आपमें हिम्मत नहीं.

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हालांकि अंत में तेजस्वी ने मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर आप ईमानदार हैं और हम बेईमान तो मुझसे खुली बहस करने में आप क्यों डर रहे हैं, ख़ुलासा मियां? मैं सच्चा हूं इसलिए सीना ठोक बहस की चुनौती दे रहा हूं. है हिम्मत! बोलो!


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