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0.5 से 1.2 फीसदी अल्कोहल वाले ड्रिंक शराबबंदी में आते हैं या नहीं, दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा मामला

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पटना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एनर्जी ड्रिंक और फ्रूट बियर के एक गोदाम मालिक को हाई कोर्ट ने राहत देते हुए गोदाम के सील खोलने के आदेश दिए  थे.

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0.5 से 1.2 फीसदी अल्कोहल वाले ड्रिंक शराबबंदी में आते हैं या नहीं,  दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा मामला

सुप्रीम कोर्ट में शराबबंदी को लेकर अनोखा मामला

खास बातें

  1. 0.5 से 1.2 फीसदी अल्कोहल वाले एनर्जी ड्रिंक को लेकर सवाल
  2. सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा पटना हाईकोर्ट भेजा मामला
  3. बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
नई दिल्ली:

बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद एक दिलचस्प मामला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले को पटना हाई कोर्ट वापस भेजते हुए कहा कि पटना हाई कोर्ट यह तय करे कि बिहार में  0.5 से 1.2 फीसदी अल्कोहल वाले एनर्जी ड्रिंक या फ्रूट बियर शराबबंदी के कानून के तहत बिक सकते हैं या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने 6 हफ्ते में हाईकोर्ट को मामले का निपटारा करने को कहा है.

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दरअसल, बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पटना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एनर्जी ड्रिंक और फ्रूट बियर के एक गोदाम मालिक को हाई कोर्ट ने राहत देते हुए गोदाम के सील खोलने के आदेश दिए  थे. दरअसल- 9 फरवरी 2017 को पटना के आलमगंज थाने में एनर्जी ड्रिंक और फ्रूट बियर में अल्कोहल को लेकर एक FIR दर्ज हुई. जिसके बाद आबकारी विभाग और पटना पुलिस ने आलमगंज थाना के बजरंगपुरी कालोनी के अंगद नगर में एक गोदाम पर छापा मारा. जहां से 40 लाखों रुपये के एनर्जी ड्रिंक और फ्रूट बियर मिले, जिसके बाद गोदाम के मालिक के खिलाफ केस रजिस्टर हुआ और वह भी नए शराब बंदी कानून के तहत.


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इसके बाद इसके सैम्पल लिए गए और जांच के लिए एक्साइज कैमिस्ट भेजे गए. साथ ही सैम्पल को FSL भी भेजा गया. एक्साइज कैमिस्ट की रिपोर्ट थी उसमें इथाइल अल्कोहल मिला 0.2 से 05 परसेंट. FSL की रिपोर्ट में 0.2 से 1.2 इथाइल अल्कोहल मिला. अप्रैल 2017 में गोदाम मालिक ने इसके खिलाफ पटना हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की, जिसमें यह मांग की गई कि एफआईआर को रद्द किया जाए और गोदाम को डिसिल किया जाए. पटना हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान गोदाम मालिक के खिलाफ करवाई पर रोक लगा दी और 40 लाख के बॉन्ड पर 17 जुलाई को गोदाम को डिसिल करने के आदेश दे दिए.
31 अगस्त को पटना हाई कोर्ट ने एक्साइज विभाग के अफसरों को आदेश पालन न करने के लिए अदालत में तलब कर लिया. इसके खिलाफ बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट आ गई. बिहार सरकार की ये दलील थी कि 2016 के शराबबंदी कानून के मुताबिक किसी भी तरह के अल्कोहल कंटेंट पर प्रतिबंध लगाता है. ऐसे में पटना हाई कोर्ट का आदेश सही नहीं है. 


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