NDTV Khabar

नीतीश की मंत्रिमंडल से दूरी पर बिहार बीजेपी मौन, आरजेडी नेता ने ली चुटकी

आरजेडी ने कहा- अंधेर नगरी वाले फ़ैसले पर मौन रह जाने का मतलब भविष्य में कहां-कहां दबना होगा, इसका कोई ठिकाना नहीं है, इसीलिए चतुर नीतीश कुमार मंत्रिमंडल से बाहर

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
नीतीश की मंत्रिमंडल से दूरी पर बिहार बीजेपी मौन, आरजेडी नेता ने ली चुटकी

नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के मोदी सरकार में शामिल न होने पर बीजेपी मौन है.

पटना:

जब से जनता दल यूनाइटेड ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल न होने की घोषणा की है तब से राजनीतिक अटकलों का बाज़ार गरम है. हर मुद्दे पर प्रखर और आक्रामक बिहार भाजपा के नेता जहां इस मुद्दे पर नीतीश कुमार के बयानों पर मौन धारण किए हुए हैं वहीं राजद के नेता अब इस पर चुटकी ले रहे हैं.

हालांकि नीतीश कुमार ने ख़ुद सफ़ाई दी है कि सरकार में शामिल न होने की घोषणा का बिहार में सरकार पर कोई असर नहीं होगा लेकिन भाजपा के नेताओं की मुश्किल है कि अगर नीतीश ने फिर कुछ वैकल्पिक राजनीतिक रास्ता ढूंढने की कोशिश भी की तो सरकार में रहने का सुख छिन सकता है. भाजपा के अधिकांश नेता मीडिया से इस मुद्दे पर दूरी बनाए हुए हैं. हालांकि निजी बातचीत में उनका मानना है कि उनके केंद्रीय नेतृत्व ने नीतीश को नाराज़ कर अच्छा नहीं किया. खासकर सरकार में शामिल बिहार भाजपा के नेताओं का कहना है कि नीतीश के बिहार में एनडीए के हर प्रत्याशी को जिताने के लिए मेहनत और उसके सार्थक परिणाम के बाद यह पूरा प्रकरण दुखद है.

शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में इस मुद्दे से किनारा करते हुए कहा लोकतंत्र में जीत-हार लगी रहती है, लेकिन जिनकी नीति-नीयत में साफगोई होती है, वे हार को भी गरिमा के साथ स्वीकार करते हैं और जनता का विश्वास जीतकर वापसी करते हैं. लोकसभा में  दो सीटों से 303 सीट पर पहुंची भाजपा का संघर्ष इसकी मिसाल है. सीटें कम मिलीं हों या एक वोट से अटलजी की सरकार गिरी हो, हमने न जनादेश का अपमान किया, न चुनाव आयोग पर संदेह किया और न मीडिया का बहिष्कार किया. कांग्रेस ये तीनों काम करते हुए संवैधानिक व्यवस्था का अपमान कर रही है.


टिप्पणियां

जहां मोदी मौन हैं वहीं राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी का कहना है कि छह सांसदों वाली पार्टी लोजपा को मंत्रिमंडल में एक जगह और सोलह सांसदों वाली पार्टी जनता दल यूनाईटेड को भी एक ही जगह! सोलह सांसद और छह सांसदों वाली पार्टी को तराजू के एक ही पलड़े में तौल दिया गया. यह तो अंधेर नगरी वाली बात हो गई. नीतीश जी कल अमित शाह से मिले थे. हमें लगता है कि नीतीश जी के पार्टी से दो लोग मंत्रिमंडल में शामिल होंगे, यह तय हो गया होगा. उसके बाद चाय का न्योता एक ही आदमी के लिए आया. संभवत: इसलिए जनता दल यूनाईटेड ने मंत्रिमंडल के बाहर रहने का फैसला किया है.

शिवानंद ने कहा कि दरअसल भारतीय जनता पार्टी को जिस प्रकार का प्रचंड बहुमत मिला है उसकी गर्मी तो उन लोगों को ज़रूर महसूस हो रही होगी. नीतीश कुमार राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं. अंधेर नगरी वाले फ़ैसले पर मौन रह जाने का मतलब भविष्य में कहां-कहां दबना होगा, इसका कोई ठिकाना नहीं है. इसलिए चतुर नीतीश कुमार को मंत्रिमंडल से बाहर रहने का फ़ैसला बेहतर लगा होगा. लेकिन यह तो पहले कौर में मक्खी वाली बात हो गई.



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement